उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में करबन नदी के पास बसा सादाबाद शहर अपनी मिठाइयों, खासकर बालूशाही के लिए मशहूर है. इसका इतिहास मुगल काल से जुड़ा है और यह इलाके के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अहम भूमिका निभाता है.
1951 के संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश के तहत बनी सादाबाद विधानसभा सीट एक सामान्य सीट है और हाथरस लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें सादाबाद नगर पंचायत का पूरा इलाका, लगभग पूरी सादाबाद तहसील, मुरसान डेवलपमेंट ब्लॉक और करीब 130 गांव शामिल हैं, जिससे इसकी पहचान मुख्य रूप से ग्रामीण इलाके की है.
1952 में पहली बार चुनाव होने के बाद से सादाबाद ने उत्तर प्रदेश के सभी 18 विधानसभा चुनावों में वोट दिया है. शुरुआत में यहां की राजनीति पर पुराने नवाब परिवार का दबदबा था. परिवार के तीन सदस्यों ने कुल मिलाकर सात चुनाव जीते. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट पांच बार जीती, चार बार कुंवर मोहम्मद अशरफ अली खान और एक बार उनके बेटे कुंवर जावेद अली ने जीत हासिल की. बाद में, कुंवर मुस्तमिद अली खान ने दो बार जीत हासिल की, एक बार लोक दल से और एक बार जनता दल से. उनकी जीत इसलिए भी खास है क्योंकि यहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या अपेक्षाकृत कम है.
सादाबाद में जीतने वालों की सूची में विविधता रही है. कई पार्टियों ने दशकों में यह सीट जीती है. कांग्रेस की पांच जीतों के अलावा, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने तीन बार, BJP और जनता दल ने दो-दो बार यह सीट जीती है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार, भारतीय क्रांति पार्टी, जनता पार्टी, लोक दल, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक-एक बार जीत हासिल की है. हाल के वर्षों में सादाबाद एक 'स्विंग सीट' बन गई है, क्योंकि पिछले तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों ने जीत हासिल की है.
2012 में, समाजवादी पार्टी ने देवेंद्र अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाकर सादाबाद में अपना खाता खोला. उन्होंने BSP के सतेंद्र शर्मा को 5,187 वोटों से हराया. रामवीर उपाध्याय ने 2017 में BSP के लिए यह सीट जीती थी. उन्होंने RLD के डॉ. अनिल चौधरी को 26,590 वोटों से हराया था, जबकि समाजवादी पार्टी के मौजूदा MLA बहुत पीछे तीसरे स्थान पर रहे थे. बाद में, BSP के विधायक रामवीर उपाध्याय BJP में शामिल हो गए, लेकिन 2022 में RLD के प्रदीप कुमार सिंह ने उन्हें 6,437 वोटों से हरा दिया और वे दूसरे स्थान पर रहे. प्रदीप कुमार सिंह को 104,874 वोट मिले और उपाध्याय ने BJP के लिए 98,437 वोट हासिल किए.
विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के मुकाबले, BJP ने लोकसभा चुनावों के दौरान इस इलाके में बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. 2009 में, RLD ने BJP के साथ गठबंधन करके हाथरस लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा था और इस इलाके में BSP से 23,949 वोटों से आगे रही थी. उस गठबंधन के टूटने के बाद BJP को 2014 में हाथरस लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का मौका मिला. तब से वह तीनों संसदीय चुनावों में आगे रही है. वह 2014 में BSP से 60,356 वोटों से, 2019 में 58,737 वोटों से और 2024 में 52,855 वोटों से आगे रही. अनूप प्रधान बाल्मीकि ने BJP के लिए 105,264 वोट हासिल किए, जबकि सादाबाद इलाके में जसवीर वाल्मीकि को समाजवादी पार्टी के लिए 52,409 वोट मिले.
सादाबाद में वोटरों की संख्या में दिलचस्प बदलाव देखे गए हैं. 2012 में यहां 311,121 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 345,400, 2019 में 356,485 और 2022 में 376,981 हो गई, लेकिन 2024 में यह घटकर 373,201 रह गई. वोटिंग प्रतिशत में भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव देखे गए हैं. यह 2012 में 60.54 प्रतिशत, 2017 में 65.64 प्रतिशत, 2019 में 59.54 प्रतिशत, 2022 में 64.50 प्रतिशत और 2024 में 53.22 प्रतिशत था.
सादाबाद हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां जाट सबसे प्रभावशाली समूह हैं, इसके बाद लोधी, ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी और अन्य जातियां आती हैं. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी इसके मतदाताओं में 22.28 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की अनुमानित संख्या 20 से 22 प्रतिशत है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण सीट है, जहां 87.54 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में और 12.46 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं.
सादाबाद की स्थापना मुगल सम्राट शाहजहां के मंत्री सादुल्ला खान ने की थी. 1997 तक यह मथुरा जिले का हिस्सा था. यह जाट-बहुल क्षेत्र है, जहां 'कोठी गंज' नाम का एक प्राचीन किला और करबन नदी इसकी पुरानी पहचान को और बढ़ाते हैं. सादाबाद उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख शहरों- आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और एटा - के बीच स्थित है, और इस स्थिति ने इसे लंबे समय से रणनीतिक और व्यावसायिक महत्व दिया है.
भौगोलिक दृष्टि से, सादाबाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समतल जलोढ़ मैदानों में ब्रज क्षेत्र में स्थित है. कृषि यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां आसपास के गांव अनाज, गन्ना और अन्य उपज बाजार वाले कस्बे तक पहुंचाते हैं. यह कस्बा छोटे पैमाने के व्यापार और स्थानीय उद्योगों, विशेषकर मिठाइयों और उससे जुड़े व्यवसायों के लिए भी जाना जाता है, जबकि प्रमुख शहरी केंद्रों के बीच इसकी स्थिति ने इसे व्यावसायिक रूप से सक्रिय बनाए रखने में मदद की है. यहां सड़क संपर्क मजबूत है. हाईवे और जिला सड़कें सादाबाद को नजदीकी कस्बों और बड़े केंद्रों से जोड़ती हैं. सादाबाद रेल मार्ग से नहीं जुड़ा है, और निकटतम रेलवे स्टेशन हाथरस जंक्शन है. सड़क संपर्क बहुत अच्छा है. हाईवे और जिले की सड़कें सादाबाद को आस-पास के कस्बों और बड़े शहरों से जोड़ती हैं. सादाबाद रेल मार्ग से नहीं जुड़ा है और सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हाथरस जंक्शन है. सड़क परिवहन व्यवस्था इस निर्वाचन क्षेत्र को इलाके के बाकी हिस्सों से जोड़ने में मदद करती है.
आस-पास के कस्बों और शहरों में जिला मुख्यालय हाथरस (लगभग 25 किमी दूर), आगरा (लगभग 50 किमी), मथुरा (लगभग 36 किमी), अलीगढ़ (लगभग 45 किमी), एटा (लगभग 55 किमी), वृंदावन (लगभग 45 किमी), भरतपुर (लगभग 75 किमी), दिल्ली (लगभग 160 किमी) और राज्य की राजधानी लखनऊ (सड़क मार्ग से लगभग 320 किमी) शामिल हैं.
सादाबाद में राजनीतिक वफादारी बदलने के चलन ने हर चुनाव को खुला और अनिश्चित बनाए रखा है. लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है, लेकिन विधानसभा चुनावों में वैसा दबदबा नहीं दिखा. अब RLD के गठबंधन में वापस आने से 2027 के चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त मिल गई है, जिससे पार्टी के लिए यह सीट जीतना कुछ आसान हो सकता है. चाहे गठबंधन का झंडा RLD उठाए या BJP, सत्ताधारी NDA मुकाबले में बढ़त के साथ उतरेगा, जबकि विपक्ष को सादाबाद के जाने-पहचाने राजनीतिक मिजाज को बदलने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी होगी.
(अजय झा)
Ramveer Upadhyay
BJP
Dr. Avin Sharma
BSP
Mathura Prasad
INC
Nota
NOTA
Shashikant
IND
Arti Bhatt
AAAP
Praveen Kumar
IND
Rajesh Kumar
IND
Nem Singh
IND
Jitendra
RSOSP
Avdhesh
IND
Omveer Singh
BMUP
Rajesh Kumar
SDHIP
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर परिणाम साफ हो गए हैं, जहां बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं. किसी अन्य प्रत्याशी के मैदान में न होने के कारण बिना मतदान के ही सभी 10 नेताओं की जीत घोषित कर दी गई है.
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ करने को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के लिए बड़ी सौगात बताया और प्रधानमंत्री का आभार जताया. अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जाने वाले लोग निशानी छोड़ना चाहते हैं और डबल इंजन सरकार के पास जनता के लिए अपना कोई काम नहीं है.
उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल अभी से ही काफी गरमा गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और सपा के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश बीजेपी ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को घेरते हुए लिखा कि बहरूपिया भेष बदलकर फिर वापस आ गया है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को एक बड़ा झटका लगने वाला है. पार्टी से बगावत करने वाले तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी अब आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने जा रहे हैं. इसके लिए 14 अक्टूबर को अमेठी के गौरीगंज में बीजेपी की ओर से एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ये तीनों नेता पार्टी की सदस्यता लेंगे.
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. समाजवादी पार्टी को अमेठी और उसके आसपास के इलाकों में बड़ा झटका लगा है. पार्टी के तीन बागी विधायक जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं. इन विधायकों में विनोद चतुर्वेदी, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के नाम शामिल हैं. ये तीनों विधायक पिछले राज्यसभा चुनाव के समय से ही समाजवादी पार्टी से बगावत कर रहे थे. अब खबर है कि अमेठी के गौरीगंज में 14 अक्टूबर को एक भव्य कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है.
उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हाल ही में अयोध्या के दौरे पर पहुंचे थे. हालांकि, इस दौरे के दौरान वे राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए, जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उन पर तीखा हमला बोला है. बीजेपी नेताओं ने अखिलेश यादव को 'बहुरूपिया' करार दिया है. अयोध्या दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने श्रीमद भागवत कथा के मंच पर त्रिशूल और सुदर्शन चक्र धारण किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.
उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने अपनी ही सरकार और संगठन में लोधी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाकर सियासी हलचल बढ़ा दी है. उन्होंने पूर्व सीएम कल्याण सिंह का जिक्र करते हुए चेतावनी दी है कि लोधी समाज को उचित प्रतिनिधित्व न मिलने से 2027 के चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है.
सपा के तीन बागी विधायक- राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी की बीजेपी में एंट्री से 2027 के चुनाव से पहले अवध और बुंदेलखंड का सियासी पारा चढ़ गया है. बागियों को साधने के चक्कर में बीजेपी के सामने अपनी पारंपरिक सीटों पर 'ठाकुर बनाम ब्राह्मण' के अंदरूनी असंतोष को संभालने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट आ गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे दी है. अखिलेश यादव पांच साल के लंबे अंतराल के बाद भगवान राम की नगरी अयोध्या के दौरे पर पहुंचे थे. हालांकि, इस दौरे के दौरान उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है.
एक लाख करोड़ का निर्यात मंजिल नहीं, एक पड़ाव है जिसकी दिशा स्पष्ट है. जेवर की चिप इकाई, लखनऊ के आईटी पार्क, प्रस्तावित जापान सिटी और काशी के रुद्राक्ष में बसा आबे मेमोरियल कॉरिडोर, ये सब मिलकर एक नए उत्तर प्रदेश का नक्शा गढ़ रहे हैं, जिसकी पृष्ठभूमि में राज्य का आर्थिक भूगोल है.