पुरवा उन्नाव जिले का एक ऐतिहासिक ब्लॉक स्तर का शहर है, जिसे नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, यहां की मूल बस्ती, जिसे नयावन के नाम से जाना जाता था, 800 साल से भी पहले अयोध्या के शासक वंश के एक वंशज ने बसाई थी. यह शहर लंबे समय से पारंपरिक जूते बनाने के उद्योग के लिए जाना जाता है, जो कृषि के साथ आज भी स्थानीय लोगों के मुख्य व्यवसायों में शामिल है.
1952 के आम चुनावों से पहले गठित पुरवा एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, हालांकि यहां अनुसूचित जाति समुदाय की अच्छी खासी आबादी है. यह उन्नाव लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसमें पूरी पुरवा तहसील और उन्नाव तहसील की बिछिया क्षेत्र पंचायत शामिल है, जिससे इसका स्वरूप काफी हद तक ग्रामीण हो गया है.
पुरवा ने अब तक उत्तर प्रदेश में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. समाजवादी पार्टी के 1993 से 2012 के बीच लगातार पांच चुनाव जीतने तक यह एक स्विंग सीट रही थी. कांग्रेस पार्टी भी यह सीट पांच बार जीत चुकी है. निर्दलीय उम्मीदवारों, जनता पार्टी और भाजपा ने इस सीट पर दो-दो बार जीत दर्ज की है. भाजपा के खाते में 1967 में उसके पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनसंघ की एकमात्र जीत भी शामिल है. जनता दल और बहुजन समाज पार्टी ने इस सीट पर एक-एक बार जीत दर्ज की है.
2012 में उदय राज यादव ने लगातार चौथी बार चुनाव जीता. यह समाजवादी पार्टी की लगातार पांचवीं जीत भी थी. उन्होंने बसपा के नरेंद्र सिंह लोधी को 27,901 वोटों से हराया. 2017 में नतीजा बदल गया और बसपा के अनिल कुमार सिंह ने जीत दर्ज की. उन्होंने भाजपा के उत्तम चंद्र उर्फ राकेश लोधी को 26,483 वोटों से हराया. इसके बाद मौजूदा बसपा विधायक अनिल कुमार सिंह भाजपा में शामिल हो गए. इसके चलते भाजपा ने 2022 में यह सीट जीत ली. यह 1967 में जनसंघ की जीत के 55 साल बाद इस सीट पर भाजपा की जीत थी. अनिल कुमार सिंह को 133,827 वोट मिले, जबकि उनके समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी उदय राज यादव को 102,766 वोट मिले. इस तरह भाजपा की जीत का अंतर 31,061 वोट रहा.
विधानसभा चुनावों में संघर्ष की तुलना में लोकसभा चुनावों के दौरान पुरवा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है. 2009 में कांग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर 57,418 वोटों की बढ़त बनाई थी. भाजपा उस चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन पांच साल बाद उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया और इसके बाद से उसकी स्थिति मजबूत रही है. 2014 में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 30,112 वोटों की बढ़त बनाई, जो 2019 में बढ़कर 78,695 वोट हो गई. हालांकि 2024 में यह बढ़त तेजी से घट गई. इस चुनाव में भाजपा के उन्नाव उम्मीदवार स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी, जिन्हें आम तौर पर साक्षी महाराज के नाम से जाना जाता है, को 116,533 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अन्नू टंडन को 107,077 वोट मिले. इस तरह इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त सिर्फ 9,456 वोट रही. यह नतीजा पार्टी और भगवा वस्त्र धारण करने वाले इस राजनेता के लिए चिंता का संकेत माना जा सकता है, जो 2014 से उन्नाव लोकसभा सीट जीतते आ रहे हैं.
पुरवा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 347,602 से बढ़कर 2017 में 390,082 और 2019 में 394,355 हो गई. 2022 में यह संख्या और बढ़कर 415,790 तथा 2024 में 425,126 हो गई. हालांकि मतदाता भागीदारी में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और लोकसभा चुनावों के दौरान यह अपेक्षाकृत कम रही है. 2012 में मतदान प्रतिशत 57.25 रहा और 2017 में बढ़कर 62.80 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 54.63 प्रतिशत रह गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में इसमें फिर सुधार हुआ और मतदान प्रतिशत 61.63 रहा. 2024 के संसदीय चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 56.79 रह गया.
पुरवा एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सीमित है. मुस्लिम मतदाता यहां के कुल मतदाताओं का लगभग 8.90 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 32.66 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं में रैदास, पासी, जाटव या चमार, कोरी, धोबी और वाल्मीकि समुदाय शामिल हैं. अन्य राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुदायों में ब्राह्मण, ठाकुर या राजपूत, लोध, कुर्मी, यादव, मौर्य, शाक्य, सैनी और निषाद शामिल हैं. इनके अलावा विभिन्न कारीगर और अन्य पिछड़ी जातियों के समुदाय भी यहां मौजूद हैं. यहां 92.87 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते हैं, जबकि केवल 7.13 प्रतिशत मतदाता पुरवा शहर के शहरी हिस्सों में रहते हैं. इस लिहाज से यह विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण स्वरूप वाला है.
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, नयावन नाम की मूल बस्ती 800 साल से भी पहले अयोध्या के शासक वंश से जुड़े रघुवंशी राजपूत राजा नयावन ने बसाई थी. जब लोनी नदी के बहाव से नयावन बस्ती बह गई, तब उनके वंशज राजा रणबीर सिंह ने लगभग 1400 के आसपास ऊंची जमीन पर एक नया शहर बसाया. इसका नाम रणबीरपुर या रणभीरपुर रखा गया. समय के साथ इस बस्ती का नाम बदलकर रंजीतपुरवा और बाद में छोटा होकर पुरवा हो गया. अकबर के समय के आईन-ए-अकबरी में इस शहर का उल्लेख रणभीरपुर नाम से मिलता है. बाद में नवाबों के शासन के दौरान यह पुरवा चकला का मुख्यालय भी रहा. 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध पर कब्जा किए जाने के बाद पुरवा कुछ समय के लिए बनाए गए नए जिले का मुख्यालय बना. उस समय इस जिले का नाम भी पुरवा जिला रखा गया था. बाद में जिला मुख्यालय को उन्नाव स्थानांतरित कर दिया गया.
पुरवा मध्य उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी क्षेत्र में स्थित है. यहां की मुख्य रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है. आसपास के गांवों के लिए पुरवा स्थानीय व्यापार और सेवाओं का केंद्र भी है. पारंपरिक जूते बनाने का काम यहां लंबे समय से एक महत्वपूर्ण व्यवसाय रहा है. इसके अलावा छोटे कारोबार, खुदरा व्यापार, परिवहन और अन्य स्थानीय गतिविधियां भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती हैं.
इस विधानसभा क्षेत्र का भूभाग मुख्य रूप से समतल है और यहां के बड़े हिस्से में कृषि भूमि मौजूद है. लोनी नदी और अन्य स्थानीय जल निकासी मार्ग क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित करते हैं. पुरवा सड़क मार्ग से उन्नाव, लखनऊ, कानपुर, रायबरेली और आसपास के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है. पुरवा सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ा नहीं है. यहां से लगभग 33 किलोमीटर दूर उन्नाव जंक्शन प्रमुख रेलवे स्टेशन है. यह कानपुर और लखनऊ को जोड़ने वाले मुख्य रेल मार्ग तक पहुंच उपलब्ध कराता है. सड़क मार्ग पुरवा को आसपास के जिलों और क्षेत्रीय केंद्रों से जोड़ते हैं.
पुरवा उन्नाव से लगभग 30 किलोमीटर, रायबरेली से 45 किलोमीटर, लखनऊ से 50 किलोमीटर और कानपुर से 55 किलोमीटर दूर है. सफीपुर लगभग 50 किलोमीटर दूर है, जबकि बांगरमऊ की दूरी करीब 75 किलोमीटर है. अयोध्या पुरवा से लगभग 185 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 145 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 250 किलोमीटर दूर है. वास्तविक दूरी चुने गए मार्ग के आधार पर अलग हो सकती है.
पुरवा में पिछले सात प्रमुख चुनावों में भाजपा का चार बार शीर्ष स्थान पर रहना उसके लिए एक मजबूत रिकॉर्ड दिखाई देता है. हालांकि इनमें से तीन प्रदर्शन लोकसभा चुनावों में रहे, जिनमें मुख्य रूप से उसके उन्नाव लोकसभा उम्मीदवार साक्षी महाराज की लोकप्रियता का प्रभाव रहा. यह प्रभाव विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन में सीधे तौर पर नहीं दिखा. पार्टी ने 2022 में दल बदल के बाद पहली बार यह विधानसभा सीट जीती. इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में पुरवा विधानसभा क्षेत्र में साक्षी महाराज की बढ़त में आई तेज गिरावट भी भाजपा के लिए चिंता का विषय है. भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच अंतर केवल 3.90 प्रतिशत अंक रहा. अगर पिछले लोकसभा चुनाव का रुझान जारी रहता है, तो 2027 का विधानसभा चुनाव पुरवा में पहले से अधिक करीबी मुकाबला बन सकता है. 2012 से 2022 के बीच तीनों प्रमुख दलों की जीत अपेक्षाकृत बड़े अंतर से हुई थी.
(अजय झा)
Uday Raj
SP
Vinod Kumar
BSP
Nota
NOTA
Uroosa Imran Rana
INC
Harshit Tiwari
IND
Mohd Ashfak
IND
Surendra Kumar
IND
Anil
IND
Sant Kumar
BTSTP
Ashish Bajpai
MANBP
Ved Prakash
LJPRV
Kuldeep Kumar
AAAP
Jagannath
LD
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