मोहम्मदी, जिसे चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में मोहम्मदी की जगह मोहमदी लिखा गया है, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित एक तहसील स्तरीय शहर और नगर पालिका बोर्ड वाला क्षेत्र है. स्थानीय परंपरा इस स्थान को रामायण काल से जोड़ती है, जब इसे लक्ष्मण नगर के नाम से जाना जाता था. ऐतिहासिक रूप से यह शहर बरवर सैयदों के शासन में विकसित हुआ और अवध के विलय के बाद कुछ समय के लिए जिला मुख्यालय भी रहा. मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में स्थित मोहम्मदी गन्ने की खेती और सुगंधित केतकी फूल के लिए जाना जाता है.
1957 के परिसीमन आदेश के तहत स्थापित मोहम्मदी एक सामान्य, गैर-आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और धौरहरा लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन में इसकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया. वर्तमान में इसमें मोहम्मदी नगर पालिका बोर्ड, बरबर नगर पंचायत और मोहम्मदी, अटवा पिपरिया तथा पसगवां कानूनगो सर्किल के बड़ी संख्या में गांव शामिल हैं. इसके अलावा औरंगाबाद कानूनगो सर्किल के कुछ हिस्से भी इस क्षेत्र में आते हैं. विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.
मोहम्मदी ने 1957 से अब तक 17 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. 1957 में जब यह दो सदस्यीय सीट थी, तब दोनों सीटें भारतीय जनसंघ ने जीती थीं. मुस्लिम नाम होने के बावजूद इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास अलग रहा है. भारतीय जनता पार्टी और उसके पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ ने कुल 10 बार यह सीट जीती है, जिसमें जनसंघ की चार जीत शामिल हैं. कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की है, जबकि जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
अपनी मजबूत चुनावी स्थिति और लंबे समय से मौजूद प्रभाव के बावजूद भाजपा 2007 में जीती सीट को बरकरार नहीं रख सकी. 2012 में भाजपा तीसरे स्थान पर रही और उसकी जमानत भी जब्त हो गई. पड़ोसी धौरहरा विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन बसपा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने इस सीट पर बसपा के टिकट पर जीत हासिल की. उन्होंने समाजवादी पार्टी के इमरान अहमद को 11,344 वोटों से हराया. भाजपा ने 2017 में लोकेंद्र प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाकर फिर वापसी की. उन्होंने कांग्रेस के संजय शर्मा को 33,918 वोटों से हराया. 2022 में भाजपा ने सीट बरकरार रखी, हालांकि जीत का अंतर काफी कम हो गया. लोकेंद्र प्रताप सिंह को 99,377 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के दावेदार दाऊद अहमद को 94,506 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 4,871 वोटों या 2.10 प्रतिशत अंक के अंतर से जीत दर्ज की.
लोकसभा चुनावों में भी मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 31,060 वोटों की बढ़त बनाई थी. उस चुनाव में चौथे स्थान पर रही भाजपा 2014 में आगे निकल गई और समाजवादी पार्टी पर 24,086 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में बसपा के खिलाफ उसकी बढ़त घटकर 9,530 वोट रह गई. 2024 में भाजपा का प्रदर्शन और कमजोर हुआ और समाजवादी पार्टी उससे आगे निकल गई. समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया को 86,097 वोट मिले, जबकि भाजपा की प्रतिद्वंद्वी रेखा वर्मा को 82,842 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 3,255 वोटों या 1.40 प्रतिशत अंक की मामूली बढ़त हासिल की.
मोहम्मदी में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,07,243 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,15,263, 2019 में 3,31,141, 2022 में 3,38,779 और 2024 में 3,47,304 हो गई. मतदान प्रतिशत ऊंचा रहा है और इसमें मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान 65.12 प्रतिशत था, जो 2017 में बढ़कर 69.51 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 66.34 प्रतिशत रहा, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 68.66 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत घटकर 66.19 प्रतिशत रह गया.
मोहम्मदी हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भी मजबूत मौजूदगी है. मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का 23.50 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 29.11 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न अन्य पिछड़ा वर्ग और सवर्ण समुदाय शामिल हैं. यह क्षेत्र काफी हद तक ग्रामीण है, जहां 87.78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 12.22 प्रतिशत आबादी शहरी है.
स्थानीय परंपरा मोहम्मदी को रामायण काल से जोड़ती है. मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था और लक्ष्मण ने एक पेड़ पर अपना धनुष टांगा था, जो आज भी क्षेत्र में मौजूद बताया जाता है. इस स्थान को कभी लक्ष्मण नगर के नाम से जाना जाता था. ऐतिहासिक रूप से बरवर सैयदों के समय में यह शहर महत्वपूर्ण बना. पुराना ईंटों का किला औरंगजेब के शासन के शुरुआती वर्षों में सैयद मुक्तदी ने बनवाया था. बाद में अली अकबर खान ने इस बस्ती को विकसित और विस्तारित किया. 19वीं सदी की शुरुआत में नाजिम के रूप में कार्य करते हुए हकीम मेहंदी अली खान ने शहर के विकास को आगे बढ़ाया और यहां बगीचे, सराय, मस्जिद और बाजार बनवाए. 1856 में अवध के विलय के बाद मोहम्मदी कुछ समय के लिए जिला मुख्यालय रहा. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने जिला मुख्यालय को लखीमपुर स्थानांतरित कर दिया. इसके बाद से मोहम्मदी तहसील मुख्यालय बना हुआ है.
कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और क्षेत्र में गन्ना प्रमुख व्यावसायिक फसलों में शामिल है. आसपास के ग्रामीण इलाकों में गेहूं, धान, दालें, तिलहन और अन्य खाद्यान्न भी उगाए जाते हैं. कृषि अर्थव्यवस्था स्थानीय व्यापार, परिवहन, छोटे कारोबार और कृषि आधारित गतिविधियों को सहारा देती है. मोहम्मदी तहसील और इसके आसपास के गांवों के लिए बाजार और सेवा केंद्र के रूप में भी काम करता है.
मोहम्मदी के आसपास का भूभाग मुख्य रूप से समतल जलोढ़ मैदानों से बना है, हालांकि यह क्षेत्र लखीमपुर खीरी जिले के व्यापक तराई प्रभाव वाले इलाके में आता है. यहां की जमीन गहन कृषि के लिए उपयुक्त है. सिंचाई के लिए नहरों, भूजल और स्थानीय जल स्रोतों का इस्तेमाल किया जाता है. बारिश और पानी की उपलब्धता में मौसमी बदलाव आसपास के गांवों में कृषि गतिविधियों को प्रभावित करते हैं.
मोहम्मदी सड़क मार्ग से लखीमपुर, शाहजहांपुर और क्षेत्र के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. यह शहर उत्तर प्रदेश के पड़ोसी क्षेत्रों को जिले से जोड़ने वाले सड़क नेटवर्क का हिस्सा है. यहां से पसगवां, गोला गोकर्णनाथ, कस्ता और अन्य स्थानीय केंद्रों तक सड़क संपर्क उपलब्ध है. मोहम्मदी रेलवे स्टेशन शहर और आसपास के इलाकों को रेल संपर्क प्रदान करता है.
लखीमपुर मोहम्मदी से लगभग 55 किलोमीटर दूर है, जबकि गोला गोकर्णनाथ करीब 35 किलोमीटर और कस्ता लगभग 40 किलोमीटर दूर है. शाहजहांपुर की दूरी करीब 70 किलोमीटर, सीतापुर की करीब 80 किलोमीटर और हरदोई की लगभग 85 किलोमीटर है. लखनऊ सड़क मार्ग से मोहम्मदी से लगभग 170 किलोमीटर दूर है.
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र की एक खास बात यह है कि भाजपा और उसके पूर्ववर्ती जनसंघ ने यहां 10 बार जीत दर्ज की है, लेकिन पार्टी कभी लंबे समय तक इस सीट पर लगातार मजबूत स्थिति में नहीं रही. पिछले सात प्रमुख चुनावों में भाजपा ने दो विधानसभा चुनाव और दो लोकसभा चुनावों में जीत या बढ़त हासिल की है. इसके मुकाबले बसपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार शीर्ष स्थान हासिल किया है.
मोहम्मदी में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो सकता है क्योंकि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच पिछले दो चुनावों में मुकाबला काफी करीबी रहा है. जहां भाजपा ने 2022 में 2.10 प्रतिशत अंक के अंतर से जीत हासिल की थी, वहीं 2024 में समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर 1.40 प्रतिशत अंक की बढ़त बनाई. ऐसे में दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है और चुनावी नतीजा किसी भी तरफ जा सकता है.
(अजय झा)
Daud Ahmad
SP
Shakeel Ahmad Siddiqui
BSP
Reetu Singh
INC
Nota
NOTA
Ravikant
AAAP
Anurag M. Sarthi
AcnP
Roopram
IND
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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
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