मोदीनगर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक सब-डिविजन लेवल का शहर है, जहां म्युनिसिपल बोर्ड है. यह बागपत लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के पास अपनी खास लोकेशन की वजह से 1933 में उद्योगपति गुजरमल मोदी ने इसे बसाया था. यहां आज भी मोदी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज मौजूद है और समय के साथ यह NCR में एक जाना-माना इंडस्ट्रियल और रिहायशी केंद्र बन गया है.
1957 के चुनावों से पहले बना मोदीनगर एक जनरल, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. इसमें मोदीनगर म्युनिसिपल बोर्ड के सभी वार्ड, फरीदनगर, पटला और निवाड़ी नगर पंचायतें और शहर के बाहरी इलाकों के कई गांव शामिल हैं. दिल्ली-मेरठ रूट पर होने के कारण इसका महत्व लगातार बढ़ा है. खासकर बेहतर रेल और सड़क कनेक्टिविटी की वजह से यह दिल्ली और आस-पास के NCR शहरों में काम करने वाले लोगों के लिए ज़्यादा आकर्षक बन गया है.
मोदीनगर में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस पार्टी और BJP, दोनों ने ही यह सीट पांच-पाच बार जीती है. शुरुआती दशकों में कांग्रेस का दबदबा रहा, हालांकि उसकी आखिरी जीत 1985 में हुई थी. दूसरी ओर, बाद के दौर में BJP मुख्य ताकत बनकर उभरी. जनता दल ने यह सीट दो बार जीती है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने एक-एक बार मोदीनगर सीट जीती है.
राष्ट्रीय लोक दल ने 2012 में यह सीट जीती थी, जब उनके उम्मीदवार सुदेश शर्मा ने मौजूदा BSP विधायक राजपाल सिंह को 13,949 वोटों से हराया था. BJP, जिसने पहले 1993, 1996 और 2002 में लगातार तीन जीत हासिल की थीं, 2017 में मजबूती से वापसी की. तब मंजू शिवाच ने BSP के वहाब चौधरी को 66,582 वोटों से हराया था. RLD के मौजूदा विधायक सुदेश शर्मा चौथे स्थान पर रहे थे. 2022 में मंजू शिवाच ने सुदेश शर्मा को 34,619 वोटों से हराकर BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. उन्हें 113,349 वोट मिले, जबकि शर्मा को 78,730 वोट मिले.
मोदीनगर इलाके में संसदीय वोटिंग में ज्यादातर बीजेपी और उसके सहयोगियों का दबदबा रहा है. 2009 में, कांग्रेस RLD से 1,730 वोटों से आगे थी. 2014 में बीजेपी ने BSP पर 59,873 वोटों की बढ़त बनाई और 2019 में RLD पर 36,734 वोटों की बढ़त हासिल की. 2024 में, RLD, जो बीजेपी की सहयोगी के तौर पर वापस आई थी, समाजवादी पार्टी से 49,268 वोटों से आगे रही. RLD के राजकुमार सांगवान को 106,296 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरपाल शर्मा को 57,028 वोट मिले.
मोदीनगर का वोट बेस शुरू में बढ़ा, लेकिन 2022 के चुनावों से पहले इसमें गिरावट आई. 2012 में यहां 283,131 रजिस्टर्ड वोटर थे, 2017 में 333,378 और 2019 में 342,002. फिर 2022 में यह संख्या घटकर 332,327 हो गई और 2024 में फिर बढ़कर 336,382 हो गई. वोटिंग प्रतिशत काफी ज्यादा और स्थिर रहा है- 2012 में 62.61 प्रतिशत, 2017 में 64.76 प्रतिशत, 2019 में 64.62 प्रतिशत, 2022 में 67.42 प्रतिशत और 2024 में 58.25 प्रतिशत.
मोदीनगर एक अर्ध-शहरी सीट है, जहां शहरी वोटर (52.09 प्रतिशत) ग्रामीण वोटरों (47.91 प्रतिशत) से ज्यादा हैं. यह हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है जहां मुस्लिम आबादी कम है. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 19.05 प्रतिशत है. 1933 में सुनियोजित औद्योगिक शुरुआत से पहले मोदीनगर का विकास पारंपरिक अर्थों में एक ऐतिहासिक शहर के रूप में नहीं हुआ था, लेकिन इसका उदय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आधुनिक औद्योगिक विस्तार से गहराई से जुड़ा है. यह शहर दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर स्थित है और इसे दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों के माध्यम से मजबूत सड़क संपर्क का लाभ मिलता है. यहां एक रेलवे स्टेशन भी है जहां कई ट्रेनें रुकती हैं, जिससे यहां आने-जाने वालों के लिए इसकी सुविधा और बेहतर हुई है. मोदीनगर से हापुड़ को जोड़ने वाली एक सड़क भी है, जो इसकी क्षेत्रीय पहुंच को बढ़ाती है. इन संपर्कों ने इसे उन लोगों के लिए आकर्षक बना दिया है जो दिल्ली में काम करते हैं लेकिन सस्ते और बड़े आवास वाले छोटे शहर में रहना पसंद करते हैं, जिससे यह अक्सर 'दिल्ली का बेडरूम' कहलाता है.
आर्थिक रूप से, मोदीनगर उद्योग, व्यापार, शिक्षा और कृषि के मिश्रित आधार पर टिका है. 'मोदी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज' शहर की सबसे प्रमुख औद्योगिक पहचान बनी हुई है, और चीनी मिलें लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा रही हैं. यह शहर एक शैक्षिक केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ है, जहां स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक संस्थान आसपास के क्षेत्रों से छात्रों को आकर्षित करते हैं. आसपास के इलाके में कृषि का महत्व अभी भी है, लेकिन औद्योगिक गतिविधियों, परिवहन-जुड़े व्यापार और एनसीआर (NCR) से जुड़े सेवा-क्षेत्र के रोजगार के बढ़ने के कारण इसका महत्व धीरे-धीरे कम हुआ है.
दूरी के लिहाज से, मोदीनगर से दिल्ली लगभग 35 किमी, गाजियाबाद लगभग 20 किमी, मेरठ लगभग 25 किमी, हापुड़ लगभग 30 किमी, नोएडा लगभग 40 किमी, ग्रेटर नोएडा लगभग 55 किमी, बुलंदशहर लगभग 60 किमी, मुजफ्फरनगर लगभग 60 किमी, मुरादाबाद लगभग 120 किमी दूर है और उत्तराखंड में हरिद्वार लगभग 120 किमी, देहरादून लगभग 145 किमी और मसूरी सड़क मार्ग से लगभग 170 किमी दूर है.
बीजेपी के सहयोगी के रूप में आरएलडी (RLD) की वापसी ने सत्तारूढ़ गठबंधन को 2027 में मोदीनगर को अपने पास बनाए रखने का अतिरिक्त भरोसा दिया है. इसके साथ ही, BSP का आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला BJP-विरोधी वोटों को और बांट सकता है, खासकर अनुसूचित जाति और मुस्लिम वोटरों के बीच. इससे समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के लिए मजबूत चुनौती पेश करना मुश्किल हो सकता है. अपनी मौजूदा संगठनात्मक ताकत, हालिया चुनावी रिकॉर्ड और गठबंधन के फायदे के साथ, BJP मोदीनगर में 2027 के मुकाबले में साफ बढ़त के साथ शुरुआत कर रही है.
(अजय झा)
Sudesh Sharma
RLD
Dr. Poonam Garg
BSP
Neeraj Kumari
INC
Harindra Kumar Sharma
AAAP
Nota
NOTA
Vijay
BMUP
Anil
IND
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