मेहरौनी, जिसे महरौनी भी लिखा जाता है, उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्थित एक नगर पंचायत और मेहरौनी तहसील का मुख्यालय है. यह ललितपुर से लगभग 37 किलोमीटर पूर्व में और टीकमगढ़ के पास मध्य प्रदेश की सीमा के नजदीक स्थित है. यह दक्षिणी बुंदेलखंड क्षेत्र में एक स्थानीय प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में कार्य करता है.
मेहरौनी के नाम पर एक विधानसभा क्षेत्र है, जो स्वतंत्र भारत में 1952 में हुए पहले आम चुनावों के समय से अस्तित्व में है. 2007 के चुनावों तक यह सामान्य, अनारक्षित सीट रही, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. यह बदलाव 2012 के विधानसभा चुनाव से प्रभावी हुआ. यह झांसी लोकसभा सीट के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. इस विधानसभा क्षेत्र में पूरी मेहरौनी तहसील, ललितपुर तहसील के कल्याणपुरा, बिरधा और बालाबेहट के कानूनगो सर्किल तथा पाली नगर पंचायत शामिल हैं. इस कारण यहां ग्रामीण आबादी का वर्चस्व है.
मेहरौनी में अपने गठन के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. हालांकि, 1957 में इस क्षेत्र को दो सदस्यीय ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में मिला दिए जाने के कारण यह कुछ समय के लिए चुनावी नक्शे से गायब हो गया था. 1962 के चुनाव से पहले इसे फिर से बहाल कर दिया गया. भाजपा ने यह सीट आठ बार जीती है, जिनमें उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं. कांग्रेस ने इस सीट पर छह बार जीत हासिल की है. बहुजन समाज पार्टी ने दो बार और जनता पार्टी ने एक बार इस सीट पर कब्जा किया है.
2012 में अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने के बाद बसपा को अपने मौजूदा विधायक राम कुमार तिवारी का टिकट काटना पड़ा. पार्टी के उम्मीदवार फेरन लाल ने भाजपा के मनोहर लाल पंथ को केवल 1,737 वोटों से हराया. 2017 में चुनाव परिणाम पूरी तरह बदल गया, जब मनोहर लाल पंथ ने बसपा के मौजूदा विधायक को 99,564 वोटों से हराया. भाजपा ने 2022 में भी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. उस चुनाव में पंथ को 184,778 वोट मिले, जबकि बसपा की किरण रमेश खटीक को 74,327 वोट मिले. इस तरह जीत का अंतर बढ़कर 110,451 वोट हो गया.
लोकसभा चुनावों के दौरान मेहरौनी विधानसभा क्षेत्र में मतदान के रुझान भी भाजपा के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं. 2009 में बसपा ने एक क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय समता दल पर 574 वोटों की बढ़त हासिल की थी. उस चुनाव में पांचवें स्थान पर रहने वाली भाजपा ने 2014 में अपनी स्थिति मजबूत की और समाजवादी पार्टी पर 47,241 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में यह बढ़त बढ़कर 81,947 वोट हो गई. कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने 2024 में झांसी लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ा. भाजपा इस चुनाव में भी आगे रही, लेकिन जीत का अंतर काफी कम हो गया. भाजपा के अनुराग शर्मा को 156,512 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप जैन आदित्य को 138,795 वोट मिले. इस तरह मेहरौनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 17,717 वोटों की बढ़त मिली.
पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 363,660 से बढ़कर 2017 में 414,998 हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह 474,286 तक पहुंच गई. 2022 में यह संख्या 433,241 और 2024 में 460,118 थी. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 440,664 मतदाता दर्ज किए गए. यह 2024 के आंकड़े से 19,454 कम है, यानी इसमें 4.20 प्रतिशत की कमी आई है.
यहां मतदान प्रतिशत आमतौर पर अधिक रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 75.14 रहा, जबकि 2017 में यह 74.16 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 75.40 हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह 74.87 प्रतिशत रहा, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 70.66 प्रतिशत रह गया.
मेहरौनी विधानसभा क्षेत्र में हिंदू आबादी का स्पष्ट बहुमत है. मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या के 5 प्रतिशत से कम होने का अनुमान है. मेहरौनी कस्बे में मुस्लिम आबादी का अनुपात अधिक है, जहां 2001 की जनगणना में यह 12.92 प्रतिशत दर्ज किया गया था. अनुमान के अनुसार, अनुसूचित जाति की आबादी विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या का लगभग 21.62 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 5.01 प्रतिशत है. दलित समुदायों में अहिरवार, कोरी, जाटव और पासी शामिल हैं. अन्य समुदायों में यादव, लोधी, कुशवाहा, कुर्मी और साहू के साथ ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य भी शामिल हैं. व्यापक ललितपुर क्षेत्र में सहरिया जनजाति के लोग भी रहते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में गांवों की संख्या अधिक है. अनुमान के अनुसार, इसकी केवल 4.21 प्रतिशत आबादी मेहरौनी और पाली नगर पंचायत की सीमाओं के भीतर रहती है.
मेहरौनी ऐतिहासिक बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित है, जो पुराने चंदेरी क्षेत्र का हिस्सा था और बाद में बुंदेलों के प्रभाव में आया. यहां का आसपास का ग्रामीण इलाका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है. बेतवा और जामनी नदी प्रणालियों के मैदानी क्षेत्रों तथा पथरीले ऊंचे भूभागों में गांव बसे हुए हैं. इस क्षेत्र में छोटी पहाड़ियां, चट्टानी भूभाग और शुष्क पर्णपाती जंगलों के हिस्से हैं, जो बुंदेलखंड की भौगोलिक विशेषताओं में शामिल हैं. व्यापक क्षेत्र में सहरिया सहित अनुसूचित जनजाति के समुदायों की मौजूदगी यहां के सामाजिक और भौगोलिक इतिहास का हिस्सा है. ब्रिटिश शासन के दौरान मेहरौनी वर्तमान उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सीमा के पास स्थित गांवों की जरूरतों को पूरा करने वाले एक छोटे तहसील मुख्यालय के रूप में विकसित हुआ. आज भी यह कस्बा मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और यहां के स्थानीय बाजार आसपास के गांवों की जरूरतें पूरी करते हैं.
कृषि, पशुपालन और कृषि उत्पादों का व्यापार यहां की अर्थव्यवस्था का आधार हैं. छोटे व्यवसाय और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार भी लोगों की आजीविका के साधन हैं. मेहरौनी का बाजार तहसील के विभिन्न गांवों के लोगों की जरूरतों को पूरा करता है. इस अर्ध-शुष्क क्षेत्र में किसानों के लिए पानी की उपलब्धता, सिंचाई और बारिश की अनिश्चितता महत्वपूर्ण चिंताएं बनी रहती हैं.
सड़क संपर्क मेहरौनी को दक्षिणी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी मध्य प्रदेश के अन्य केंद्रों से जोड़ता है. उत्तर प्रदेश में ललितपुर यहां से लगभग 37 किलोमीटर दूर है, जबकि झांसी उत्तर दिशा में करीब 130 से 135 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. तालबेहट और पाली अन्य महत्वपूर्ण स्थानीय केंद्र हैं, जो क्रमशः लगभग 70 किलोमीटर और 25 किलोमीटर दूर हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से लगभग 450 किलोमीटर दूर है. कानपुर की दूरी करीब 300 किलोमीटर, प्रयागराज की लगभग 400 किलोमीटर, वाराणसी की करीब 500 किलोमीटर और अयोध्या की लगभग 450 से 480 किलोमीटर है. राज्य की सीमा पार मध्य प्रदेश में स्थित टीकमगढ़ केवल 21 से 25 किलोमीटर दूर है, जिसके कारण यह आसपास का एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र है. चंदेरी लगभग 70 किलोमीटर दूर है, जबकि सागर की दूरी करीब 150 से 170 किलोमीटर है. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन को आमतौर पर निकटतम रेलवे स्टेशन माना जाता है, जबकि ललितपुर जंक्शन से रेल संपर्क के अधिक विकल्प मिलते हैं.
मेहरौनी का हालिया चुनावी रिकॉर्ड 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को मजबूत स्थिति में दिखाता है. पार्टी ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में यह सीट जीती है और पिछले तीन लोकसभा चुनावों के दौरान भी उसके उम्मीदवार इस विधानसभा क्षेत्र में आगे रहे हैं. हालांकि, 2024 में भाजपा की बढ़त में आई भारी कमी विपक्षी दलों के बीच तालमेल के महत्व को दर्शाती है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था. दोनों दलों के संयुक्त समर्थन से इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की बढ़त कम करने में मदद मिली. यदि दोनों दल अपना तालमेल बनाए रखते हैं और इस समर्थन को विधानसभा चुनाव में प्रभावी चुनौती में बदल पाते हैं, तो भाजपा पर दबाव बढ़ सकता है. यदि वे ऐसा करने में नाकाम रहते हैं, तो भाजपा स्पष्ट बढ़त के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी.
(अजय झा)
Kiran Ramesh Khatik
BSP
Ram Vilas
SP
Brijlal Khabri
INC
Nota
NOTA
Chandrabhan
CPI
Jugal Kishor
IND
Jitendra
IND
Ravi Kumar
IND
Vijay Kumar
JANADIP
Kailash
JD(U)
Motilal
ASPKR
Lakhan
IND
Gorelal
IND
Monika
BMUP
Ganesh Ram Rajak
AAAP
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने अपना रुख साफ किया है. इटावा के सैफई में मतदान के बाद उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों को पता है कि कितनी सीटों पर बंटवारा होना है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा. हालांकि, अखिलेश ने सीटों की संख्या का खुलासा नहीं किया.
पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.