लखनऊ पूर्व एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और लखनऊ लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. यह लखनऊ शहर के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों को कवर करता है और पूरी तरह शहरी क्षेत्र है, जो लखनऊ नगर निगम की सीमा के भीतर आता है. इस विधानसभा क्षेत्र में स्थापित आवासीय मोहल्ले, सरकारी कॉलोनियां और नए विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्र शामिल हैं, जिससे यहां की सामाजिक संरचना मिश्रित है. इसका शहरी स्वरूप यहां मौजूद शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, सरकारी प्रतिष्ठानों, बाजारों, छोटे कारोबारों और बड़ी संख्या में सेवा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के रूप में दिखाई देता है.
1952 के विधानसभा चुनावों से पहले अस्तित्व में आए लखनऊ पूर्व विधानसभा क्षेत्र ने आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. यहां 2014 और 2024 में दो उपचुनाव भी हुए, जिससे विधानसभा चुनावों की कुल संख्या 20 हो गई. लगातार हुए परिसीमन के बावजूद इस विधानसभा क्षेत्र ने अपनी पहचान बनाए रखी है, हालांकि समय के साथ इसकी सीमाओं और विधानसभा क्षेत्र संख्या में बदलाव हुए हैं. लखनऊ पूर्व का भाजपा का गढ़ होना किसी से छिपा नहीं है. भाजपा ने लगातार 10 जीत दर्ज करके अपने इस गढ़ को मजबूत किले में बदल दिया है, जिसमें दोनों उपचुनावों की जीत भी शामिल है, और 1991 में पहली जीत दर्ज करने के बाद से पार्टी यहां कभी नहीं हारी है. 20 विधानसभा चुनावों में भाजपा की कुल जीत का आंकड़ा 11 हो जाता है, क्योंकि उसकी पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ ने 1967 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी.
हाल के चुनावों में भाजपा ने लगातार छठी जीत तब दर्ज की, जब 2012 में उसके वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने तीन बार विधायक रह चुके विद्यासागर गुप्ता की जगह पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. मिश्र ने समाजवादी पार्टी की जुही सिंह को 20,818 वोटों से हराया. 2014 में लोकसभा के लिए उनके चुने जाने के बाद उसी वर्ष इस सीट पर उपचुनाव हुआ. भाजपा के एक अन्य प्रमुख नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन ने इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की जुही सिंह को 26,459 वोटों से हराकर जीत हासिल की. टंडन ने 2017 में कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग सिंह भदौरिया को 79,230 वोटों के भारी अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी. उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अनुराग भदौरिया को 68,731 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीता. नवंबर 2023 में हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण टंडन के निधन के बाद 2024 में एक और उपचुनाव हुआ. भाजपा के ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने 1,42,948 वोट हासिल कर कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश चौहान के 89,061 वोटों के मुकाबले 53,887 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और भाजपा के लिए यह सीट बरकरार रखी.
लखनऊ पूर्व में भाजपा का दबदबा लोकसभा चुनावों के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र में उसके प्रदर्शन से भी दिखाई देता है. 2009 के बाद हुए चारों लोकसभा चुनावों में भाजपा इस क्षेत्र में आगे रही है. 2009 में उसने कांग्रेस के मुकाबले 16,909 वोटों की बढ़त हासिल की थी, जो 2014 में कांग्रेस के खिलाफ बढ़कर 1,02,560 वोट हो गई. 2019 में समाजवादी पार्टी के मुकाबले यह बढ़त मामूली रूप से घटकर 99,575 वोट रह गई और 2024 में इसमें और कमी आई. इसके बावजूद भाजपा काफी आगे रही. राजनाथ सिंह को 1,50,403 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रविदास मेहरोत्रा को 79,289 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 71,114 वोटों की बढ़त हासिल की.
लखनऊ पूर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,56,340 थी, जो 2017 में बढ़कर 4,22,773 और 2019 में 4,47,496 हो गई. 2022 में यह संख्या और बढ़कर 4,58,194 तथा 2024 में 4,65,095 हो गई. हालांकि, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आधार में भारी कमी आई. अप्रैल 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 3,19,147 मतदाता थे, जो पुनरीक्षण से पहले दर्ज 4,62,625 मतदाताओं की तुलना में 1,43,478 कम हैं. यह कमी लखनऊ जिले की नौ विधानसभा सीटों में सबसे अधिक थी.
मतदाता भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है, जैसा कि बड़े शहरी विधानसभा क्षेत्रों में अक्सर देखने को मिलता है. 2012 में मतदान प्रतिशत 53.13 रहा और 2017 में मामूली बढ़ोतरी के साथ 53.54 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 55.95 प्रतिशत और 2022 के विधानसभा चुनाव में 56.30 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत करीब 51.86 रहा.
लखनऊ पूर्व हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है और यहां लखनऊ के कुछ अन्य शहरी विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में मुस्लिम आबादी कम है. अनुमान के अनुसार, इसके मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 15.10 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता करीब 8.89 प्रतिशत हैं. अन्य महत्वपूर्ण समुदायों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ, वैश्य और विभिन्न ओबीसी समूह शामिल हैं. यादव और अन्य ओबीसी समुदाय भी मतदाताओं के महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जबकि पासी और अन्य अनुसूचित जाति समूह दलित आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
लखनऊ पूर्व पूरी तरह शहरी विधानसभा क्षेत्र है और इसके सभी मतदाता लखनऊ नगर निगम की सीमा के भीतर रहते हैं. इसका सामाजिक और आवासीय स्वरूप लखनऊ के पुराने और अधिक घनी आबादी वाले मध्य तथा पश्चिमी हिस्सों से अलग है. इंदिरा नगर और गोमती नगर जैसे क्षेत्रों में बड़ी आवासीय कॉलोनियां, अपार्टमेंट परिसर, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जबकि पुराने बसे हुए क्षेत्र और सरकारी आवासीय कॉलोनियां नए निजी विकास क्षेत्रों के साथ मौजूद हैं. विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, कार्यालय और व्यावसायिक केंद्र भी हैं, जो शहर के तेजी से विकसित हो रहे पूर्वी हिस्से की जरूरतों को पूरा करते हैं.
लखनऊ पूर्व की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से शहरी और सेवा क्षेत्र पर आधारित है. सरकारी नौकरियां, निजी क्षेत्र की नौकरियां, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा कारोबार, रियल एस्टेट, परिवहन, छोटे व्यवसाय और पेशेवर सेवाएं यहां के बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार हैं. गोमती नगर एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक और संस्थागत केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जहां कार्यालय, होटल, खरीदारी क्षेत्र और सेवा प्रतिष्ठान मौजूद हैं. वहीं इंदिरा नगर और आसपास के आवासीय क्षेत्रों में खुदरा कारोबार और छोटे व्यवसायों की बड़ी अर्थव्यवस्था है. अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों की मौजूदगी से भी इस विधानसभा क्षेत्र को लाभ मिलता है, जो रोजगार पैदा करने के साथ लखनऊ के अन्य हिस्सों से लोगों को आकर्षित करते हैं.
लखनऊ पूर्व की सड़क और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था शहर के बाकी हिस्सों से मजबूत संपर्क प्रदान करती है. प्रमुख सड़कें इंदिरा नगर, गोमती नगर और आसपास के आवासीय क्षेत्रों को हजरतगंज, विधानसभा क्षेत्र और लखनऊ के मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों से जोड़ती हैं. लखनऊ मेट्रो का नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर शहर के पूर्वी हिस्से में इंदिरा नगर और आसपास के क्षेत्रों को सेवा प्रदान करता है, जिससे मध्य और उत्तरी हिस्सों से सीधा सार्वजनिक परिवहन संपर्क मिलता है. शहर की बस और साझा परिवहन व्यवस्था भी इस विधानसभा क्षेत्र को राजधानी के अन्य हिस्सों से जोड़ती है. गोमती नगर रेलवे स्टेशन और बादशाह नगर रेलवे स्टेशन रेल संपर्क उपलब्ध कराते हैं, जबकि लखनऊ जंक्शन और चारबाग रेलवे स्टेशन शहर की सड़क व्यवस्था के माध्यम से आसानी से पहुंच में हैं. चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी सड़क मार्ग से इस विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में आई भारी कमी विधानसभा क्षेत्र के चुनावी गणित में एक नया बदलाव लेकर आई है, हालांकि यह निर्धारित करने का कोई विश्वसनीय आधार नहीं है कि हटाए गए मतदाताओं में कौन से सामाजिक या राजनीतिक समूह शामिल हैं. विपक्ष के लिए भाजपा की बढ़त का पैमाना यह दर्शाता है कि केवल भाजपा विरोधी वोटों का एकजुट होना पर्याप्त नहीं होगा. लखनऊ पूर्व को प्रतिस्पर्धी चुनावी क्षेत्र बनाने के लिए विपक्ष को विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करना होगा और भाजपा के समर्थन में उल्लेखनीय कमी लानी होगी.
भाजपा के लिए मुख्य चिंता उसके प्रतिद्वंद्वियों की ताकत से कम और तीन दशक से अधिक समय से लगातार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पैदा होने वाली आत्मसंतुष्टि से अधिक जुड़ी है. जब तक कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव या पार्टी के शहरी समर्थन में महत्वपूर्ण गिरावट नहीं आती, लखनऊ पूर्व राजधानी की सबसे सुरक्षित भाजपा सीटों में से एक बना रहेगा और 2027 के विधानसभा चुनावों में विपक्ष के लिए यहां मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा.
(अजय झा)
Anurag Singh Bhadouriya
SP
Aashish Kumar Sinha
BSP
Manoj Tiwari
INC
Alok Singh
AAAP
Nota
NOTA
Avinash Bharti
ASPKR
Anurodh Srivastava
IND
Shiva Gupta
SASEPA
Mridul Kumar Srivastava (advocate)
IND
Vinai Prakash Srivastava
BKrD
Ravikant Jha Sintu
LD
Vijay Laxmi Jaiswal
GAPP
Dilip Kumar Rastogi
BMUP
Naimish Pratap Narayan Singh
RRP
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