लोनी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक शहर और सब-डिविजन है, जिसकी अपनी नगर पालिका परिषद है. दिल्ली की पूर्वी सीमा के दूसरी ओर स्थित यह शहर दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिससे यह असल में राष्ट्रीय राजधानी का ही एक विस्तार बन गया है.
लोनी एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और गाजियाबाद लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें लोनी शहर और आस-पास के कई अर्ध-ग्रामीण इलाके शामिल हैं, जिससे इसकी पहचान मुख्य रूप से शहरी इलाके की है.
लोनी विधानसभा क्षेत्र का गठन 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आदेश, 2008' के बाद किया गया था और यहां अब तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. जहां 2012 में हुए पहले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) जीती थी, वहीं अगले दो चुनावों में BJP ने जीत हासिल की.
2012 में, BSP के जाकिर अली ने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के मदन भैया को 25,248 वोटों से हराकर यह सीट जीती थी. 2012 में तीसरे स्थान पर रही BJP ने 2017 में जबरदस्त बढ़त बनाई और उसके उम्मीदवार नंद किशोर गुर्जर ने मौजूदा BSP विधायक जाकिर अली को 42,813 वोटों से हराया. गुर्जर ने 2022 में RLD के मदन भैया को 8,676 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. उन्हें 1,27,410 वोट मिले, जबकि मदन भैया को 1,18,734 वोट मिले थे.
लोकसभा चुनावों के दौरान लोनी क्षेत्र में वोटिंग के रुझान बताते हैं कि BJP धीरे-धीरे अपना दबदबा बना रही है. 2009 में, कांग्रेस पार्टी BJP से 11,725 वोटों से आगे थी. 2014 में BJP ने कांग्रेस पर 71,457 वोटों की बड़ी बढ़त बनाई और तब से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 में वह समाजवादी पार्टी से 63,542 वोटों से और 2024 में कांग्रेस पार्टी से 21,854 वोटों से आगे रही. BJP के अतुल गर्ग को 1,43,522 वोट मिले, जबकि उनकी कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी डॉली शर्मा को 1,21,668 वोट मिले. लोनी विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 358,553 थी. 98,160 नए वोटर जुड़ने से यह काफी बढ़कर 2017 में 456,713 और 2019 में 491,073 हो गई. इसके बाद 2022 में यह संख्या बढ़कर 513,114 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 523,641 हो गई.
वोटिंग प्रतिशत में उतार-चढ़ाव होता रहा है और यह कम ही रहा है, जिसकी एक वजह शहरी वोटरों की उदासीनता हो सकती है. यह 2012 में 60.19 प्रतिशत, 2017 में 60.12 प्रतिशत, 2019 में 57.74 प्रतिशत और 2022 में 61.44 प्रतिशत था, लेकिन 2024 में घटकर 54.29 प्रतिशत रह गया.
लोनी हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां की राजनीति में गुर्जर और जाट समुदायों का दबदबा है. यहां मुसलमानों की भी अच्छी-खासी आबादी है, जबकि अनुसूचित जाति के वोटर कुल वोटरों का लगभग 13.57 प्रतिशत हैं. यह मुख्य रूप से एक शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 80.75 प्रतिशत वोटर कस्बों में रहते हैं, जबकि 19.25 प्रतिशत वोटर बाहरी इलाकों (ग्रामीण क्षेत्रों) में रहते हैं.
लोनी का जिक्र मुगल-कालीन दस्तावेज 'आईन-ए-अकबरी' में मिलता है, जिसे अकबर के शासनकाल में दिल्ली सरकार के तहत एक परगना के तौर पर तैयार किया गया था. मुगल काल से पहले, 14वीं सदी में तुगलक सुल्तान महमूद शाह के खिलाफ लड़ाई से पहले तैमूर ने लोनी और उसके किले पर हमला किया था. इस इलाके में तैमूर की सेना द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर अत्याचारों के ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं.
लोनी भारत के सबसे प्रदूषित शहरी केंद्रों में से एक है. दिल्ली मेट्रो के आने से कनेक्टिविटी में काफी सुधार हुआ है और निवासियों के लिए रोजाना आना-जाना आसान हो गया है. नोली सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जबकि पुरानी दिल्ली और गाजियाबाद रेलवे स्टेशन भी पास ही हैं. लोनी दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, हापुड़, मोदीनगर, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां के कई निवासी काम के सिलसिले में रोजाना दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा आते-जाते हैं. दिल्ली का इंटर-स्टेट बस टर्मिनस (ISBT) यहां से लगभग 12 किमी दूर है, जबकि इंडिया गेट, कनॉट प्लेस और लाल किला लगभग 25-30 किमी दूर हैं. जिला मुख्यालय गाजियाबाद 18 किमी दूर है. हापुड़ लगभग 45 किमी, मोदीनगर लगभग 30 किमी, बुलंदशहर लगभग 60 किमी, मेरठ लगभग 70 किमी, सहारनपुर लगभग 140 किमी और हरिद्वार लगभग 180 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
RLD के BJP का सहयोगी बनने के बाद, समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि उसके किस सहयोगी दल को लोनी सीट से चुनाव लड़ना चाहिए और फिर किसी ऐसे उपयुक्त उम्मीदवार को चुनना होगा जो यहां BJP के दबदबे को चुनौती दे सके. जब तक BJP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर (anti-incumbency) एक बड़ा मुद्दा नहीं बन जाती, तब तक 2027 के चुनावों में लोनी में एकतरफा मुकाबला देखने को मिल सकता है, जिसमें BJP का पलड़ा काफी भारी रहेगा.
(अजय झा)
Madan Bhaiya
RLD
Ranjita Dhama
IND
Akil
BSP
Sachin Kumar Sharma
AAAP
Mehtab
AIMIM
Mohd Yamin Malik
INC
Amit Kumar
HND
Nota
NOTA
Dilshad
RSPS
Jai Prakash Dube
SBSPSP
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