ललितपुर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में ललितपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है. यह झांसी से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. यह दक्षिणी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक और प्रशासनिक केंद्र है तथा जिले के मुख्य शहरी केंद्र के रूप में कार्य करता है.
ललितपुर के नाम पर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जो स्वतंत्र भारत में 1952 में हुए पहले आम चुनाव के समय से अस्तित्व में है. यह झांसी लोकसभा सीट के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में पूरी तालबेहट तहसील, ललितपुर तहसील के कुछ हिस्से, जिनमें बिरधा और बार विकासखंड शामिल हैं, तथा ललितपुर नगर पालिका बोर्ड शामिल हैं. इस कारण इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप अर्ध-शहरी है.
ललितपुर में विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से अब तक 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है. यहां से कुल 20 विधायक चुने गए हैं, क्योंकि 1957 में इस सीट पर दो विधायकों का चुनाव हुआ था. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट सात बार जीती है, जिसमें 1957 में उपलब्ध दो सीटों में से एक सीट भी शामिल है. भाजपा ने भी यह सीट सात बार जीती है, जिसमें 1969 में उसके पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनसंघ की जीत भी शामिल है. बहुजन समाज पार्टी ने लगातार तीन कार्यकाल तक इस सीट पर जीत हासिल की. इसमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है, जो उसके मौजूदा विधायक की मृत्यु के कारण हुआ था. 1957 में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने दो सीटों में से एक पर जीत हासिल की थी, जबकि जनता पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती.
2012 में बसपा ने लगातार तीसरी बार इस सीट पर जीत हासिल की. पार्टी ने अपनी मौजूदा विधायक सुमन देवी कुशवाहा का टिकट काट दिया था. सुमन देवी ने अपने पति नत्थू राम कुशवाहा की मृत्यु के बाद 2009 का उपचुनाव जीता था. नत्थू राम कुशवाहा इस सीट से बसपा के पहले विजेता थे. बसपा के नए उम्मीदवार रमेश प्रसाद कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी के चंद्र भूषण सिंह बुंदेला को 11,323 वोटों से हराया. 2017 में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया. भाजपा के रामरतन कुशवाहा ने 2012 के चुनाव में तीसरा स्थान हासिल किया था. उन्होंने समाजवादी पार्टी की ज्योति सिंह को 68,255 वोटों से हराया. चंद्र भूषण सिंह बुंदेला बसपा में शामिल हो गए थे और तीसरे स्थान पर रहे.
रामरतन कुशवाहा ने 2022 में भी भाजपा के लिए यह सीट बरकरार रखी. उन्हें 176,550 वोट मिले, जबकि बसपा के चंद्र भूषण सिंह बुंदेला को 69,335 वोट मिले. इस तरह भाजपा की जीत का अंतर बढ़कर 107,215 वोट हो गया.
लोकसभा चुनावों के दौरान ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान के रुझानों से भी भाजपा का बढ़ता प्रभाव दिखाई देता है. 2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 3,935 वोटों की बढ़त बनाई थी. भाजपा उस चुनाव में पांचवें स्थान पर थी, लेकिन 2014 में उसने समाजवादी पार्टी पर 52,354 वोटों की बढ़त हासिल कर ली. 2019 में समाजवादी पार्टी पर भाजपा की बढ़त बढ़कर 103,962 वोट हो गई. 2024 में कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने झांसी लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ा. भाजपा आगे रही, हालांकि 2019 की तुलना में उसकी बढ़त काफी कम हो गई. भाजपा उम्मीदवार अनुराग शर्मा को 174,521 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप जैन आदित्य को 123,880 वोट मिले. इस तरह ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 50,641 वोटों की बढ़त मिली.
पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 390,258 से बढ़कर 2017 में 453,315 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 474,286 थी. 2022 में मतदाताओं की संख्या 488,101 और 2024 में 494,178 हो गई. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 452,604 मतदाता दर्ज किए गए. यह 2024 के आंकड़े से 41,574 कम है, यानी इसमें 8.41 प्रतिशत की कमी आई है.
यहां मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट देखने को मिली है. 2012 में मतदान प्रतिशत 70.37 रहा, जबकि 2017 में यह 70.12 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 69.66 रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 68.29 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65.96 प्रतिशत रह गया.
ललितपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है. मुस्लिम आबादी का अनुमान लगभग 5 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 17.84 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी 6.68 प्रतिशत होने का अनुमान है. यहां की सामाजिक संरचना में बुंदेला और अन्य ठाकुर समूह, यादव, लोधी, कुशवाहा, कुर्मी, ब्राह्मण, वैश्य और साहू समुदाय शामिल हैं. इनके अलावा अहिरवार, कोरी, जाटव और पासी जैसे दलित समुदाय भी रहते हैं. आसपास के क्षेत्र में सहरिया आदिवासी समुदाय की भी मौजूदगी है. यह विधानसभा क्षेत्र नगरपालिका केंद्र से काफी आगे तक फैला हुआ है. अनुमान के अनुसार, इसकी 75.89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में और 24.11 प्रतिशत आबादी ललितपुर नगर पालिका बोर्ड की सीमा के भीतर रहती है.
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, ललितपुर नगर की स्थापना राजा सुमेर सिंह ने की थी. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी पत्नी ललिता देवी के नाम पर इसका नाम रखा था. इस क्षेत्र का इतिहास काफी पुराना है. यहां गुप्त काल के पुरातात्विक अवशेष मिले हैं और बाद में इस क्षेत्र पर चंदेलों तथा बुंदेलों का प्रभाव रहा. यह क्षेत्र पुराने चंदेरी राज्य का हिस्सा था. वर्ष 1974 में ललितपुर को अलग जिला बनाया गया. इससे पहले 1891 से यह झांसी जिले का हिस्सा था.
यह क्षेत्र पुरातात्विक अवशेषों और मंदिरों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. ललितपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर देवगढ़ स्थित दशावतार मंदिर छठी शताब्दी का गुप्तकालीन विष्णु मंदिर है. यह उत्तर भारत के सबसे पुराने संरक्षित पत्थर के मंदिरों में से एक है. देवगढ़ में आठवीं से 12वीं शताब्दी के बीच बने प्राचीन जैन मंदिरों का एक समूह भी है. अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में चंदपुर, दुधई और बानपुर के चंदेलकालीन मंदिर तथा जैन अवशेष शामिल हैं. यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित कई स्मारक भी मौजूद हैं.
कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है. खेती, पशुपालन और कृषि उपज के व्यापार से पूरे विधानसभा क्षेत्र में लोगों की आजीविका चलती है. तालबेहट और अन्य बाजार केंद्र आसपास के गांवों की जरूरतों को पूरा करते हैं. छोटे व्यवसाय और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार भी शहरी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं. इस क्षेत्र के बांध और जलाशय सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पानी की उपलब्धता और बारिश की अनिश्चितता किसानों के लिए अब भी बड़ी चिंताएं हैं.
ललितपुर रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है. ललितपुर जंक्शन के माध्यम से यह शहर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रमुख केंद्रों से जुड़ता है. सड़क मार्ग से झांसी लगभग 95 किलोमीटर दूर है, जबकि चंदेरी की दूरी करीब 39 किलोमीटर और सागर की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है. टीकमगढ़ लगभग 100 किलोमीटर और ग्वालियर करीब 200 किलोमीटर दूर है. कानपुर की दूरी लगभग 300 किलोमीटर और लखनऊ की दूरी करीब 350 किलोमीटर है.
भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में पिछले एक दशक में हासिल की गई मजबूत चुनावी बढ़त के साथ उतरेगी. विधानसभा चुनावों में लगातार जीत और लोकसभा चुनावों के दौरान ललितपुर विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाए रखने से पार्टी ने विपक्ष के सामने बड़ी चुनौती पेश की है. हालांकि, 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की बढ़त में आई कमी से पता चलता है कि उसके चुनावी लाभ का अंतर बदल सकता है. समाजवादी पार्टी और बसपा को मुकाबले को कड़ा बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर विश्वसनीय चुनौती पेश करनी होगी. उम्मीदवार का चयन और पूरे विधानसभा क्षेत्र में समर्थन जुटाने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी, खासकर ऐसी सीट पर जहां भाजपा ने हाल के चुनावों में निर्णायक जीत हासिल की है.
(अजय झा)
Chandra Bhusan Singh Bundela (guddu Raja)
BSP
Ramesh Prasad
SP
Vandana
JANADIP
Balwant Singh Rajpoot
INC
Nota
NOTA
Rahul Kushwaha
IND
Pradip Kumar Gupta
IND
Anil
IND
Sanjay Khan
AAAP
Akhilesh Kumar
IND
Hariom
BHLKSTP
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