किदवई नगर उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक प्रसिद्ध आवासीय इलाका है. आजादी के बाद शहर के दक्षिण दिशा में विस्तार के साथ इसका विकास हुआ. यहां मध्यम वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग के आवास, स्थानीय बाजार और जरूरी सेवाओं का मिश्रण देखने को मिलता है. इसका आवासीय स्वरूप, व्यावसायिक गतिविधियों और शहर के दूसरे हिस्सों से बेहतर संपर्क के साथ इसे एक स्थापित शहरी इलाके की पहचान देता है.
किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र कानपुर लोकसभा सीट का हिस्सा है. यह एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जिसका गठन 2008 के परिसीमन के बाद हुआ था और इसमें कानपुर नगर निगम के 17 वार्ड शामिल हैं. यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र है और इसमें कोई ग्रामीण इलाका शामिल नहीं है.
किदवई नगर में इसके गठन के बाद से तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की और अगले दो चुनावों में भाजपा ने सीट अपने नाम की. 2012 के पहले चुनाव में कांग्रेस के अजय कपूर ने भाजपा के विवेकशील शुक्ला को 2,027 वोटों से हराया था. इस चुनाव में कुल 22 उम्मीदवार मैदान में थे. 2017 में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदला और महेश त्रिवेदी को मैदान में उतारा. इससे पहले त्रिवेदी कानपुर देहात की राजपुर और डेरापुर विधानसभा सीटों का निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर प्रतिनिधित्व कर चुके थे. त्रिवेदी ने मौजूदा कांग्रेस विधायक कपूर को 33,983 वोटों से हराया. 2022 में दोनों एक बार फिर आमने-सामने थे. इस चुनाव में त्रिवेदी को 1,14,111 वोट मिले, जबकि कपूर को 76,351 वोट मिले. इसके साथ भाजपा की जीत का अंतर बढ़कर 37,760 वोट हो गया.
किदवई नगर में भाजपा की मजबूती इसके गठन के बाद हुए चार लोकसभा चुनावों में भी दिखाई देती है. 2009 में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले 9,015 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में यह बढ़त 1,02,660 वोट और 2019 में 88,203 वोट रही. 2024 में भाजपा उम्मीदवार रमेश अवस्थी को 1,28,302 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार आलोक मिश्रा को 66,680 वोट मिले. इस तरह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 61,622 वोटों की बढ़त मिली. यह अंतर 2014 और 2019 की तुलना में कम था, लेकिन भाजपा कांग्रेस से काफी आगे रही.
2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,25,432 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,54,693 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 3,59,185 थी. 2022 में यह 3,49,525 और 2024 में 3,51,458 रही. 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 2,73,355 मतदाता दर्ज थे. यह संख्या 2024 के आंकड़े से 78,103 कम थी, यानी इसमें 22.22 प्रतिशत की कमी आई.
मतदान प्रतिशत आम तौर पर मध्यम रहा है, हालांकि अलग-अलग चुनावों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान प्रतिशत 54.40 रहा, जबकि 2017 में यह बढ़कर 57.83 प्रतिशत हो गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 54.65 रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह बढ़कर 59.86 प्रतिशत हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 57.14 प्रतिशत रह गया.
किदवई नगर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी का हिस्सा अपेक्षाकृत कम है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम आबादी करीब 8.60 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 10.06 प्रतिशत है. ब्राह्मण और वैश्य यहां के महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में शामिल हैं. इनके अलावा अन्य सवर्ण हिंदू समुदाय और ओबीसी समूह भी यहां मौजूद हैं. दलित समुदाय भी यहां के मतदाताओं का हिस्सा हैं. इलाके में पंजाबी परिवारों की लंबे समय से मौजूदगी रही है. इसके साथ ही सिख, जैन और ईसाई निवासी तथा पीढ़ियों से कानपुर में बसे सिंधी परिवार भी यहां रहते हैं. इन सामाजिक समूहों का अनुपात विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में अलग हो सकता है.
इस क्षेत्र का नाम स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व केंद्रीय मंत्री रफी अहमद किदवई के नाम पर रखा गया है. कानपुर के पुराने शहरी क्षेत्र से बाहर विस्तार के साथ यह इलाका विकसित हुआ. यहां की आवासीय कॉलोनियां, स्कूल, अस्पताल, स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारी प्रतिष्ठान ऐसे लोगों की जरूरतें पूरी करते हैं, जिनमें पेशेवर, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और पीढ़ियों से यहां रहने वाले परिवार शामिल हैं. व्यावसायिक गतिविधियां मुख्य रूप से खुदरा कारोबार, सेवाओं और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी हैं. वहीं कानपुर के आसपास के दक्षिणी हिस्से इसे शहर की व्यापक औद्योगिक और व्यापारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ते हैं.
किदवई नगर सड़क और सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से कानपुर के दूसरे हिस्सों से जुड़ा हुआ है. कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन, जो दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर शहर का प्रमुख रेलवे स्टेशन है, यहां से करीब 4 किलोमीटर दूर है. गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन भी यहां से आसानी से पहुंचा जा सकता है. चकेरी स्थित कानपुर एयरपोर्ट की दूरी करीब 15-20 किलोमीटर है. सड़क संपर्क इसे शहर के केंद्र और दक्षिणी कानपुर से जोड़ता है. झकरकटी स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल भी यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है. किदवई नगर से सड़क मार्ग की अनुमानित दूरी उन्नाव के लिए 20-25 किलोमीटर, लखनऊ के लिए 85-95 किलोमीटर, प्रयागराज के लिए 200-220 किलोमीटर, वाराणसी के लिए 315-335 किलोमीटर और आगरा के लिए करीब 280-300 किलोमीटर है.
2012 के उस चुनाव को छोड़ दें, जब किदवई नगर में कांग्रेस ने पहली विधानसभा जीत दर्ज की थी, तो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इसके बाद हुए छह मुकाबलों में भाजपा का दबदबा रहा है. 2012 के बाद हुए दोनों विधानसभा चुनाव भाजपा ने जीते हैं और चारों लोकसभा चुनावों में उसने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है. कांग्रेस इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रही है, लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनावों में वह भाजपा को हटाने के करीब भी नहीं पहुंच सकी. अन्य दलों को यहां मजबूत राजनीतिक आधार बनाने में कठिनाई रही है.
लगातार विधानसभा जीत और लोकसभा चुनावों में बड़ी बढ़त ने किदवई नगर में भाजपा की स्थिति को मजबूत किया है. 2012 में कांग्रेस की जीत यह दिखाती है कि यह सीट हमेशा से भाजपा के लिए आसान नहीं रही थी. हालांकि इसके बाद के नतीजे समर्थन के संतुलन में बड़े बदलाव की ओर संकेत करते हैं. भाजपा की बढ़त को खत्म करने के लिए विपक्ष को इससे कहीं अधिक प्रभावी चुनौती पेश करनी होगी. 2027 के विधानसभा चुनाव में किदवई नगर फिलहाल भाजपा के लिए ऐसी सीट बनी हुई है, जिसे उसके हाथ से निकलने की संभावना तभी बनेगी जब उसके खिलाफ मजबूत चुनावी चुनौती खड़ी हो.
(अजय झा)
Ajay Kapoor
INC
Abhimanyu Gupta
SP
Mohan Mishra
BSP
Vivek Dwivedi
AAAP
Nota
NOTA
Seema Uttam
BSCP
Rakesh Kumar Dixit
JASP
Sitaram Shukla
IND
Alok Kumar Dwivedi
SABJANP
Pawan Kumar Tiwari
SHS
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