खतौली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का एक नगर है, जहां नगर पालिका है. यह उपजाऊ ऊपरी दोआब क्षेत्र में स्थित है और गन्ने की खेती, गुड़ और खांडसारी उद्योग और जीवंत कृषि बाजोरों के लिए जाना जाता है. खतौली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा है.
खतौली एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. यह सीट 1967 में बनाई गई थी. 2008 के परिसीमन के बाद, इसके मौजूदा इलाके में खतौली, मंसूरपुर, जानसठ तहसील के कुछ हिस्से, खतौली नगर पालिका परिषद, खतौली जनगणना शहर और जानसठ नगर पालिका क्षेत्र शामिल हैं.
इस निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास लंबा और कड़े मुकाबले वाला रहा है. यहां सत्ता अक्सर बदलती रही है और यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आम मुद्दों जैसे खेती-किसानी, जातिगत समीकरण और समुदाय को एकजुट करने की राजनीति के मजबूत असर को दिखाता है. 2013 के मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों ने यहां की क्षेत्रीय राजनीति को काफी बदल दिया, जिससे जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ और बाद के चुनावों में BJP को फायदा हुआ.
खतौली में अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2022 का उपचुनाव भी शामिल है. BJP ने यह सीट चार बार, राष्ट्रीय लोक दल ने तीन बार और भारतीय क्रांति दल ने दो बार जीती है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, जनता पार्टी, कांग्रेस, लोक दल, जनता दल, भारतीय किसान कामगार पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने यह सीट एक-एक बार जीती है.
परिसीमन के बाद के दौर में, राष्ट्रीय लोक दल ने 2012 में जीत हासिल की, जब करतार सिंह भड़ाना ने BSP के तारा चंद शास्त्री को 5,875 वोटों से हराया. 2012 में चौथे स्थान पर रही BJP ने दंगों के बाद हुए ध्रुवीकरण के दम पर 2017 में यह सीट जीती. विक्रम सिंह ने समाजवादी पार्टी के चंदन सिंह चौहान को 31,347 वोटों से हराया. विक्रम सिंह ने 2022 में RLD उम्मीदवार राजपाल सिंह सैनी को 16,345 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. हालांकि, बाद में 2013 के दंगों में कथित भूमिका के कारण अदालत के आदेश से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया. इसके बाद उपचुनाव हुआ जिसमें BJP ने उनकी पत्नी राज कुमारी सैनी को मैदान में उतारा, लेकिन RLD उम्मीदवार मदन भैया (मदन सिंह कसाना) ने उन्हें 22,143 वोटों से हरा दिया.
खतौली विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों में भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले हैं. 2009 में, RLD ने BSP पर 320 वोटों की मामूली बढ़त बनाई थी. 2013 के दंगों के बाद BJP आगे निकल गई और 2014 में BSP पर 84,483 वोटों की भारी बढ़त हासिल की. 2019 में, BJP ने RLD पर 15,428 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में, BJP ने समाजवादी पार्टी पर 3,012 वोटों की मामूली बढ़त बनाए रखी. संजीव बालियान को 83,473 वोट मिले, जबकि SP के हरेंद्र सिंह मलिक को 80,461 वोट मिले.
खतौली में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में 272,214 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग प्रतिशत 62.54% था. 2017 में यह संख्या बढ़कर 298,738 वोटर (वोटिंग 71.33%) हो गई, 2019 में 306,871 (वोटिंग 71.99%) और 2022 में 318,047 वोटर (वोटिंग 69.79%) हो गई. 2024 के लोकसभा चुनावों में यह संख्या 331,034 थी और वोटिंग प्रतिशत 61.77% रहा.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, इस इलाके में हिंदू आबादी ज्यादा है और मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी है. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 17.39% है. खतौली मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहां 72.35% वोटर गांवों में और 27.65% शहरी इलाकों में रहते हैं. खतौली का इतिहास पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खेती-बाड़ी पर आधारित अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा है. यहां दशकों से गन्ना मुख्य फसल रही है, जिसकी खेती में नहरों से होने वाली सिंचाई का बड़ा योगदान है. यह इलाका कृषि मंडियों और छोटी प्रोसेसिंग यूनिट्स के केंद्र के तौर पर विकसित हुआ है. आज भी खेती, गन्ने की कीमतें और सिंचाई की सुविधाएं यहां के वोटरों के लिए अहम मुद्दे हैं.
भौगोलिक नजरिए से देखें तो खतौली समतल और उपजाऊ 'दोआब' इलाके में बसा है, जो कई तरह की फसलों के लिए बहुत अच्छा है. नहरों से सिंचाई की सुविधा गन्ने की सघन खेती में मदद करती है, जबकि गुड़, खांडसारी और दूसरे कृषि उत्पादों का स्थानीय व्यापार अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है. चुनावों के दौरान बिजली की सप्लाई, पानी का प्रबंधन और गन्ने की बेहतर कीमतें जैसे मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं.
यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर में दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे और गांवों को खतौली शहर और आगे मुजफ्फरनगर से जोड़ने वाली जिले की सड़कें शामिल हैं. शहर में एक रेलवे स्टेशन और शिक्षा व स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं.
खतौली, जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर से लगभग 25 किमी दूर है. यहां से मेरठ 45 किमी, सहारनपुर 80 किमी, शामली 35 किमी, पानीपत (हरियाणा) 95 किमी, बागपत 70 किमी, रुड़की 75 किमी, गाजियाबाद 85 किमी, नोएडा 95 किमी और दिल्ली 110 किमी दूर हैं. हरिद्वार लगभग 105 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 460 किमी दूर है.
राजनीतिक तौर पर, 2027 के विधानसभा चुनाव में खतौली सीट पर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. अभी यह सीट राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के पास है. RLD के NDA गठबंधन का हिस्सा बनने के बाद, सत्ताधारी गठबंधन मजबूत स्थिति में है. BJP के नेतृत्व वाला NDA इस सीट को अपने पास बनाए रखने की कोशिश करेगा, जबकि समाजवादी पार्टी और BSP मौजूदा सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी (एंटी-इनकंबेंसी) का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी. गन्ने की राजनीति और समुदाय के समीकरणों वाले इस ग्रामीण इलाके में, अगला मुकाबला टिकट बंटवारे, गठबंधन की ताकत और इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियां किसानों और युवा पीढ़ी की चिंताओं को कितनी असरदार ढंग से हल करती हैं.
(अजय झा)
Rajpal Singh Saini
RLD
Kartar Singh Bhadana
BSP
Gaurav Kumar Urf Gaurav Bhati
INC
Manoj Panwar
ASPKR
Nota
NOTA
Yajpal Singh Rathi
IND
Bablu Ram
BSKP
Pramod Arya
IND
Selu
SHS
Raju Bhatia
PHSP
Satyaveer Singh
IND
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