कादीपुर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित एक उपखंड स्तर का कस्बा और कादीपुर तहसील का मुख्यालय है. गोमती नदी के पास स्थित कादीपुर मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र के लिए प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में कार्य करता है. कस्बे के आसपास कई गांव स्थित हैं.
कादीपुर स्वतंत्र भारत में 1951-52 में हुए पहले चुनावों के लिए बनाए गए विधानसभा क्षेत्रों में शामिल था. 1952 और 1957 दोनों में यह दो सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र था. 1952 में एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, जबकि दूसरी सामान्य सीट थी. 1957 में दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं. 1962 में यह एक सदस्यीय विधानसभा क्षेत्र बन गया और तब से यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. कादीपुर सुल्तानपुर लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद वर्तमान विधानसभा क्षेत्र में कादीपुर तहसील की पूरी अखंड नगर, दोस्तपुर, कादीपुर, बिजेथुआ और बेलवाई क्षेत्र पंचायतों के साथ दोस्तपुर और कादीपुर नगर पंचायतें शामिल हैं.
कादीपुर में उत्तर प्रदेश में अब तक हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में मतदान हुआ है. यह कभी कांग्रेस का मजबूत गढ माना जाता था, लेकिन 1989 में आखिरी बार सीट जीतने के बाद पार्टी का प्रभाव कम हो गया. 1952 से 1989 के बीच कांग्रेस ने 10 में से नौ चुनाव जीते. उसे केवल 1977 में जनता पार्टी के हाथों हार का सामना करना पडा. भारतीय जनता पार्टी ने यह सीट चार बार, बहुजन समाज पार्टी ने तीन बार और समाजवादी पार्टी ने एक बार जीती है. भाजपा की चार जीत 1991, 1996, 2017 और 2022 में हुईं.
2012 में समाजवादी पार्टी के राम चंद्र चौधरी विजयी हुए. इससे पहले वह 1991 में भाजपा के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीत चुके थे. उन्होंने दो बार चुनाव जीत चुके बसपा विधायक भगेलू राम को 38,110 मतों से हराया और बसपा नेता को लगातार तीसरी जीत हासिल करने से रोक दिया. उस चुनाव में भाजपा चौथे स्थान पर रही थी. इसके बाद 2017 में राजेश कुमार गौतम भाजपा के उम्मीदवार के रूप में कादीपुर से विजयी हुए. उन्होंने बसपा के भगेलू राम को 26,604 मतों से हराया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा. 2022 में भाजपा ने फिर राजेश कुमार गौतम को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने सीट बरकरार रखी. उन्हें 96,405 मत मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी भगेलू राम को 70,682 मत मिले. इस तरह भाजपा की जीत का अंतर 25,723 मत रहा.
कभी कांग्रेस के मजबूत क्षेत्र रहे कादीपुर में भाजपा का प्रभाव लोकसभा चुनावों के आंकडों में भी दिखाई देता है. 2009 में कादीपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने बसपा पर 23,056 मतों की बढ़त बनाई थी. उस चुनाव में भाजपा चौथे स्थान पर थी. 2014 में भाजपा ने बढ़त बनाते हुए पहला स्थान हासिल किया और उसके बाद से हर लोकसभा चुनाव में आगे रही है. 2014 में भाजपा ने बसपा पर 19,724 मतों की बढ़त बनाई थी, जबकि 2019 में यह बढ़त 13,759 मत रही. 2024 में भाजपा की बढ़त और कम हो गई. सुल्तानपुर लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार मेनका गांधी को कादीपुर विधानसभा क्षेत्र में 85,218 मत मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी रामभुआल निषाद को 80,777 मत मिले. इस तरह भाजपा की बढ़त केवल 4,441 मत रही.
कादीपुर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या समय के साथ बढ़ती रही है. 2012 में यहां 319,691 मतदाता थे. 2017 में यह संख्या बढ़कर 358,264 हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 366,038 मतदाता दर्ज थे. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या 379,901 रही, जबकि 2024 में 386,236 मतदाता दर्ज किए गए. 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 345,493 मतदाता थे. यह 2024 की संख्या से 40,743 कम है. इस तरह मतदाताओं की संख्या में लगभग 10.55 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.
मतदान प्रतिशत कादीपुर में मध्यम स्तर का रहा है और पिछले वर्षों में इसमें बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ है. 2012 में मतदान प्रतिशत 59.59 रहा. 2017 में यह 58.80 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली रूप से घटकर 58.08 प्रतिशत हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर बढ़कर 58.53 हो गया. 2024 में यह घटकर 56.16 प्रतिशत रहा.
कादीपुर हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है और यहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है. 2011 की जनगणना के अनुसार कादीपुर में मुस्लिम आबादी 8.70 प्रतिशत थी, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी 26.48 प्रतिशत थी. अन्य प्रमुख सामाजिक समूहों में ब्राह्मण, यादव, ठाकुर और कुर्मी शामिल हैं. यादवों की आबादी लगभग 6.30 प्रतिशत आंकी जाती है. ब्राह्मण, ठाकुर और कुर्मी समुदायों की भी क्षेत्र में उल्लेखनीय मौजूदगी है. निषाद और अन्य कारीगर तथा कृषि आधारित समुदायों सहित अन्य पिछडे वर्गों की भी यहां सामाजिक विविधता में भूमिका है.
कादीपुर विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां की 95.46 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 4.54 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है. शहरी आबादी मुख्य रूप से कादीपुर और दोस्तपुर में केंद्रित है.
ऐतिहासिक रूप से कादीपुर एक छोटा बसा हुआ क्षेत्र था, जिसे तहसील मुख्यालय बनाए जाने के बाद महत्व मिला. इसका मुख्य कारण प्रशासनिक क्षेत्र के भीतर इसकी केंद्रीय स्थिति थी. 20वीं सदी की शुरुआत तक कस्बे में तहसील कार्यालय, पुलिस थाना, बाजार और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं मौजूद थीं. 1901 के गजेटियर में कादीपुर को एक छोटे तहसीली कस्बे के रूप में बताया गया था. इसके आसपास का क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि और स्थानीय भू-स्वामी समुदायों पर आधारित था. समय के साथ कादीपुर तहसील के प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित होता रहा और आज भी यह इसका प्रमुख शहरी क्षेत्र है.
कादीपुर गोमती नदी के पास स्थित है और पूर्वी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों का हिस्सा है. यहां की भूमि मुख्य रूप से समतल है और खेती के लिए उपयुक्त है. विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है. धान, गेहूं, दलहन और अन्य खाद्यान्न यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. डेयरी, पशुपालन, छोटे स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण, चावल और आटा मिलें, स्थानीय व्यापार तथा ग्रामीण सेवा गतिविधियां कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सहयोग देती हैं.
कादीपुर सडक मार्ग से सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, अकबरपुर और आसपास के अन्य कस्बों से जुडा है. यह कस्बा एक महत्वपूर्ण सडक जंक्शन के पास स्थित है, जो सुल्तानपुर को सुरापुर तथा प्रतापगढ़-दोस्तपुर-अकबरपुर मार्ग से जोडता है. सडक नेटवर्क के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश के व्यापक क्षेत्र तक पहुंच बनाई जा सकती है. आसपास के सडक मार्गों के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक भी पहुंच संभव है.
कादीपुर में स्वयं कोई रेलवे स्टेशन नहीं है. लखनऊ-जौनपुर-वाराणसी रेल मार्ग पर स्थित कोइरीपुर रेलवे स्टेशन कस्बे से लगभग 21 किलोमीटर दूर है. सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन व्यापक रेल नेटवर्क से जुडने का प्रमुख माध्यम है. यहां से लखनऊ, जौनपुर, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज की ओर रेल संपर्क उपलब्ध है. कादीपुर सुल्तानपुर से लगभग 39 किलोमीटर, अमेठी से 55 किलोमीटर, रायबरेली से लगभग 78 किलोमीटर, प्रयागराज से करीब 95 किलोमीटर, अयोध्या से लगभग 85 किलोमीटर और वाराणसी से लगभग 130 किलोमीटर दूर है. प्रतापगढ़ की दूरी करीब 52 किलोमीटर और जौनपुर की दूरी लगभग 55 किलोमीटर है. मार्ग के अनुसार वास्तविक दूरी में कुछ अंतर हो सकता है.
2014 के बाद लगातार पांच चुनावों के आंकड़ों को देखें तो कादीपुर में भाजपा का चुनावी प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है. पार्टी ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीते और 2014, 2019 तथा 2024 के तीनों लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मत हासिल किए. हालांकि लोकसभा चुनावों में भाजपा की बढ़त 2019 के 13,759 मतों से घटकर 2024 में केवल 4,441 मत रह गई. समाजवादी पार्टी के खाते में हाल का विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी है, क्योंकि उसने 2012 में यह सीट जीती थी.
2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या 2024 के आंकड़े से 40,743 कम हो गई है. उपलब्ध कुल आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि हटाए गए नामों में किस जाति या समुदाय की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. नई मतदाता सूची 2027 के विधानसभा चुनाव के आकलन में एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकती है. पिछले दो विधानसभा चुनाव भाजपा ने जीते हैं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कादीपुर विधानसभा क्षेत्र में उसकी बढ़त काफी कम हो गई थी. 2027 के विधानसभा चुनाव में कादीपुर पर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की नजर रहेगी.
(अजय झा)
Bhagelu Ram
SP
Heera Lal
BSP
Niklesh Saroj
INC
Nota
NOTA
Mukhram
AJPI
Hari Lal
IND
Dharmendra Kumar
IND
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने अपना रुख साफ किया है. इटावा के सैफई में मतदान के बाद उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों को पता है कि कितनी सीटों पर बंटवारा होना है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा. हालांकि, अखिलेश ने सीटों की संख्या का खुलासा नहीं किया.
पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.