गोला गोकर्णनाथ उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का एक तहसील स्तरीय नगर है. यहां नगर पालिका बोर्ड है और यह गोला गोकर्णनाथ तहसील का मुख्यालय भी है. सरायन नदी के किनारे बसा यह नगर एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है. यह भगवान शिव को समर्पित प्राचीन गोकर्णनाथ मंदिर के लिए जाना जाता है, जहां पूरे साल और खासकर सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
2008 के परिसीमन आयोग के आदेश के तहत स्थापित गोला गोकर्णनाथ एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा सीट है और खीरी लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इसमें गोला गोकर्णनाथ नगर पालिका बोर्ड, मैलानी नगर पंचायत और अलीगंज, हैदराबाद तथा दौदपुर कानूनगो सर्किलों के बड़ी संख्या में गांव शामिल हैं. इस वजह से इस विधानसभा क्षेत्र का चरित्र मुख्य रूप से ग्रामीण है.
गोला गोकर्णनाथ उन नई विधानसभा सीटों में शामिल है, जहां पहली बार 2012 के विधानसभा चुनाव में मतदान हुआ था. इसके बाद यहां चार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2022 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती चुनाव समाजवादी पार्टी ने जीता था, जबकि इसके बाद के तीन चुनाव भाजपा ने अपने नाम किए. हालांकि लोकसभा चुनावों में भाजपा का कमजोर प्रदर्शन इस सीट को उसका मजबूत गढ़ बनने से रोकता रहा है.
2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के विनय तिवारी ने बहुजन समाज पार्टी की सिम्मी बानो को 19,329 वोटों से हराया था. इसके बाद एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. 2012 में भाजपा चौथे स्थान पर रही थी और उसे सिर्फ 3.89 प्रतिशत वोट मिले थे, जिससे उसकी जमानत भी जब्त हो गई थी. लेकिन पांच साल बाद भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज कर ली.
यह बदलाव कांग्रेस नेता अरविंद गिरी के भाजपा में शामिल होने के बाद आया. अरविंद गिरी 2012 में बेहद करीबी मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहे थे और कुछ समय बसपा में रहने के बाद भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा ने उन्हें 2017 में अपना उम्मीदवार बनाया. अरविंद गिरी ने मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक विनय तिवारी को 55,017 वोटों से हराकर सीट जीत ली.
2022 के विधानसभा चुनाव में अरविंद गिरी ने एक बार फिर विनय तिवारी को हराया, हालांकि इस बार जीत का अंतर घटकर 29,294 वोट रह गया. दूसरी लगातार जीत के कुछ महीनों बाद सितंबर 2022 में अरविंद गिरी का निधन हो गया. इसके कारण उसी साल उपचुनाव कराना पड़ा. इस उपचुनाव में उनके बेटे अमन गिरी ने भाजपा की जीत को बरकरार रखा और पार्टी की जीत का अंतर भी बढ़ा दिया.
अमन गिरी को 124,810 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विनय तिवारी को 90,542 वोट प्राप्त हुए. इस तरह भाजपा ने 34,268 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
विधानसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन के मुकाबले लोकसभा चुनावों में गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 5,584 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि भाजपा काफी पीछे चौथे स्थान पर रही थी. 2014 में बसपा ने भाजपा पर 23,236 वोटों की बढ़त हासिल की.
2019 में तस्वीर बदली और भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर 22,060 वोटों की बढ़त बनाई. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला. समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उत्कर्ष वर्मा को इस विधानसभा क्षेत्र में 122,060 वोट मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार अजय कुमार मिश्रा टेनी को 95,833 वोट प्राप्त हुए. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 26,227 वोटों की बढ़त हासिल की.
गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यहां 344,128 पंजीकृत मतदाता थे. यह संख्या 2017 में बढ़कर 365,767, 2019 में 370,810, 2022 में 396,376 और 2024 में 404,032 हो गई.
मतदान प्रतिशत भी आमतौर पर अच्छा रहा है, हालांकि लोकसभा चुनावों में इसमें कुछ कमी देखने को मिलती है. 2012 में मतदान प्रतिशत 64.68 प्रतिशत था, जो 2017 में बढ़कर 68.63 प्रतिशत पहुंच गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 62.67 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान फिर बढ़कर 65.65 प्रतिशत हुआ. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 61.56 प्रतिशत रह गया.
गोला गोकर्णनाथ हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है. अनुमान के अनुसार मुस्लिम मतदाता करीब 19.20 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 28.95 प्रतिशत है. बाकी मतदाताओं में विभिन्न ओबीसी समुदाय और अन्य वर्ग शामिल हैं. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां लगभग 84.22 प्रतिशत आबादी गांवों में और 15.78 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
इस नगर का धार्मिक महत्व प्राचीन गोकर्णनाथ मंदिर से जुड़ा है, जिसे लोकप्रिय रूप से छोटी काशी भी कहा जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग का संबंध त्रेता युग और रावण की कथा से है. कहा जाता है कि रावण भगवान शिव को लेकर लंका जा रहा था, लेकिन एक परिस्थिति में उसे शिवलिंग जमीन पर रखना पड़ा. स्थानीय मान्यता के अनुसार इसके बाद रावण दोबारा शिवलिंग को उठा नहीं सका और वह वहीं स्थापित हो गया. इसके बाद से यह मंदिर शैव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
गोला गोकर्णनाथ लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में स्थित है. यह इलाका उपजाऊ जलोढ़ मैदानों, बड़े कृषि क्षेत्र और अपेक्षाकृत ऊंचे भूजल स्तर के लिए जाना जाता है. पूरा लखीमपुर खीरी जिला हिमालय की तलहटी में स्थित है और यहां कई नदियां तथा छोटी धाराएं बहती हैं. गोला के आसपास की जमीन ज्यादातर समतल और खेती के लिए उपयुक्त है, जबकि जिले के उत्तरी हिस्सों में जंगल ज्यादा हैं और वे नेपाल सीमा के करीब हैं.
कृषि इस विधानसभा क्षेत्र और आसपास के इलाके की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. गन्ना लखीमपुर खीरी की प्रमुख व्यावसायिक फसलों में से एक है और जिले के बड़े चीनी उद्योग को समर्थन देता है. इसके अलावा धान, गेहूं, मक्का, जौ, दालें और तिलहन भी जिले के अलग-अलग हिस्सों में उगाए जाते हैं.
गोला गोकर्णनाथ चीनी उद्योग की वजह से एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र भी है. यहां बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल की मौजूदगी ने रोजगार के अवसर पैदा किए हैं और गन्ना खेती, परिवहन तथा स्थानीय व्यापार से जुड़ी कई गतिविधियों को बढ़ावा दिया है. यह नगर आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए एक प्रमुख बाजार केंद्र के रूप में भी काम करता है. गोकर्णनाथ मंदिर की वजह से सावन और अन्य बड़े धार्मिक अवसरों पर यहां व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं.
गोला गोकर्णनाथ सड़क और रेल दोनों माध्यमों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह नगर शाहजहांपुर और लखीमपुर को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित है और राज्य तथा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के जरिए जिले के अन्य महत्वपूर्ण नगरों और पड़ोसी क्षेत्रों से जुड़ा है. लखीमपुर खीरी जिला सड़क मार्ग से लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली और दिल्ली से जुड़ा है. शाहजहांपुर से लखीमपुर मार्ग पर गोला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
नगर में रेलवे स्टेशन भी है और यह उस रेल मार्ग पर स्थित है, जो लखीमपुर क्षेत्र को पीलीभीत, बरेली और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है. रेल संपर्क ने गोला के नजदीकी व्यावसायिक केंद्रों से संबंध मजबूत किए हैं और यात्रियों तथा माल ढुलाई के लिए सड़क परिवहन का एक विकल्प उपलब्ध कराया है.
लखीमपुर यहां से करीब 35 किमी दूर है, जबकि मैलानी की दूरी लगभग 25 किमी है. पलिया कलां करीब 70 किमी और मोहम्मदी लगभग 45 किमी दूर है. शाहजहांपुर की दूरी करीब 65 किमी, पीलीभीत लगभग 100 किमी और बरेली की दूरी सड़क मार्ग से करीब 150 से 165 किमी है. सीतापुर लगभग 115 किमी दूर है. लखनऊ गोला गोकर्णनाथ से करीब 165 से 170 किमी की दूरी पर स्थित है.
क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों के मुकाबले, जहां भाजपा ने लंबे समय तक चुनावी दबदबा बनाए रखा है, गोला गोकर्णनाथ में मुकाबला अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी रहा है. विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से यहां हुए आठ प्रमुख चुनावों में भाजपा चार बार शीर्ष पर रही है. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन में आई बड़ी गिरावट पार्टी के लिए चिंता का विषय है.
भाजपा इसे अजय कुमार मिश्रा टेनी के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी के रूप में देखना पसंद करेगी, न कि सीधे पार्टी के खिलाफ मतदान के रूप में. यह संभव भी हो सकता है. वहीं समाजवादी पार्टी 2024 के अपने प्रदर्शन से उत्साहित होकर विधानसभा चुनाव में इसी सफलता को दोहराने की कोशिश करेगी.
कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अलग-अलग आधार पर फैसला लेते हैं. गोला गोकर्णनाथ में भी यह बात कुछ हद तक सही साबित हुई है. अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी हिंसा की घटना हुई थी, जिसमें टेनी के बेटे आशीष मिश्रा से जुड़ा मामला सामने आया था. सड़क पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को लेकर हुए घटनाक्रम में आठ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें चार प्रदर्शनकारी किसान भी शामिल थे. इसके बावजूद भाजपा ने 2022 का विधानसभा चुनाव और उसी साल का उपचुनाव दोनों जीत लिए.
भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी लगातार तीन जीत के रिकॉर्ड से उत्साहित होकर एक और जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी. वहीं समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली निर्णायक बढ़त से हौसला लेकर मैदान में उतरेगी और यह साबित करने का प्रयास करेगी कि उसका प्रदर्शन केवल टेनी के खिलाफ नाराजगी का नतीजा नहीं था. गोला गोकर्णनाथ में 2027 का विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने की पूरी संभावना है, चाहे जीत किसी भी पार्टी की हो.
(अजय सर)
Vinay Tiwari
SP
Patel Shikha Ashok Kanaujiya
BSP
Prahlad Patel
INC
Nota
NOTA
Ram Niwas Verma
AAAP
Abhishekh Kumari
NKP
Siddharth Shukla
IND
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
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