दिबियापुर उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों में से एक है और रेलवे संपर्क तथा बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के आसपास विकसित होकर एक व्यस्त व्यापारिक और आवासीय केंद्र बन गया है. यह औरैया तथा कन्नौज के बीच स्टेट हाईवे 21 पर स्थित है और यहां फफूंद रेलवे स्टेशन है, जो हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल लाइन के कानपुर-दिल्ली खंड का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है. एनटीपीसी और गेल के प्रतिष्ठानों की मौजूदगी ने दिबियापुर को एक औद्योगिक पहचान दी है, जो इसे आसपास के मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र से अलग करती है.
2008 के परिसीमन आदेश के तहत स्थापित दिबियापुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और इटावा लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इसमें दिबियापुर और फफूंद कस्बा क्षेत्र के साथ दिबियापुर तथा फफूंद कानूनगो सर्किल की 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जिससे इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है. 2007 तक इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा भरथना विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था, जबकि अविभाजित इटावा जिले की अजीतमल विधानसभा सीट को दिबियापुर के लिए समाप्त कर दिया गया. नए विधानसभा क्षेत्र में पहली बार 2012 में चुनाव हुआ.
नया विधानसभा क्षेत्र होने के कारण दिबियापुर का राजनीतिक इतिहास छोटा है और यहां अब तक केवल तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें समाजवादी पार्टी और बीजेपी ने बराबर जीत दर्ज की है. समाजवादी पार्टी के प्रदीप कुमार यादव ने 2012 का पहला चुनाव जीता और बहुजन समाज पार्टी के राम जी को 24,291 वोटों से हराया. पहले चुनाव में तीसरे स्थान पर रही बीजेपी ने 2017 में लक्ष्मण सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाकर सीट जीत ली. उन्होंने मौजूदा विधायक प्रदीप कुमार यादव को 12,094 वोटों से हराया. 2022 में परिणाम फिर बदल गया, जब समाजवादी पार्टी के प्रदीप कुमार यादव ने 80,865 वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी के मौजूदा विधायक लक्ष्मण सिंह राजपूत को 80,392 वोट मिले. इस तरह प्रदीप कुमार यादव ने केवल 473 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों के दौरान भी करीबी मुकाबले और बढ़त में बदलाव देखने को मिले हैं. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी पर 13,949 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि बीजेपी काफी पीछे तीसरे स्थान पर रही. 2014 में बीजेपी दोनों पार्टियों से आगे निकल गई और समाजवादी पार्टी पर 33,206 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में भी बीजेपी सबसे आगे रही, लेकिन उसकी बढ़त घटकर केवल 1,612 वोट रह गई. 2024 में समाजवादी पार्टी ने फिर बढ़त हासिल की, जब उसके इटावा लोकसभा उम्मीदवार जितेंद्र कुमार दोहरे को 91,648 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार राम शंकर कठेरिया को 74,808 वोट मिले. इस तरह विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को 16,840 वोटों की बढ़त मिली.
दिबियापुर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2026 के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद कमी आने से पहले लगातार बढ़ी थी. यह संख्या 2012 में 286,207 से बढ़कर 2017 में 309,502 हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 313,046 थी. 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 324,014 और 2024 में 327,146 हो गया. एसआईआर के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 294,118 मतदाता थे. यह 2024 के आंकड़े से 33,028 कम है और इसमें 10.10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.
मतदाता मतदान में अधिक और मध्यम स्तर के बीच उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें लोकसभा चुनावों में विधानसभा चुनावों की तुलना में कम मतदान हुआ है. 2012 में मतदान 61.92 प्रतिशत था और 2017 में लगभग समान 61.91 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह थोड़ा घटकर 59.40 प्रतिशत हुआ और 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 62.17 प्रतिशत हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 57.80 प्रतिशत रहा.
दिबियापुर एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, हालांकि यहां सामाजिक संरचना मिश्रित है. 2011 की जनगणना के अनुसार दिबियापुर कस्बे की मुस्लिम आबादी 7.77 प्रतिशत है, लेकिन यह केवल कस्बे का आंकड़ा है और इसे विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का सटीक हिस्सा नहीं माना जा सकता. विधानसभा क्षेत्र की आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 29.76 प्रतिशत है. सामाजिक संरचना के अनुमानों के अनुसार यादवों की आबादी करीब 24.09 प्रतिशत, जाटवों की 17.21 प्रतिशत, ब्राह्मणों की 10.32 प्रतिशत, कठेरिया की 9.72 प्रतिशत और लोधियों की 8.50 प्रतिशत है. शाक्य, कुशवाहा, पाल, राजपूत, वैश्य और अन्य ओबीसी समुदायों की भी यहां मौजूदगी है.
2011 में विधानसभा क्षेत्र की करीब 85.87 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती थी, जबकि 14.13 प्रतिशत आबादी दिबियापुर और फफूंद के शहरी क्षेत्रों में रहती थी. इससे उद्योग के लिए शहर की प्रमुखता के बावजूद यह एक मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र बनता है. ग्रामीण हिस्सों में कृषि अब भी महत्वपूर्ण है, जबकि दिबियापुर और फफूंद बाजार, सेवाएं, रोजगार और अन्य शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं. 2011 के बाद औद्योगिक और आवासीय बस्तियों के विस्तार से क्षेत्र का शहरी दायरा बढ़ा है.
दिबियापुर का आधुनिक इतिहास रेलवे और उसके बाद हुए औद्योगिक विकास से गहराई से जुड़ा है. दिबियापुर की सेवा करने वाला फफूंद रेलवे स्टेशन, जिसे अब आमतौर पर शहर से जोड़ा जाता है, 19वीं सदी के अंतिम दौर का है और महत्वपूर्ण कानपुर-दिल्ली रेल मार्ग पर स्थित है. प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की स्थापना के बाद शहर का औद्योगिक स्वरूप और अधिक स्पष्ट हुआ. दिबियापुर में एनटीपीसी के गैस आधारित बिजली संयंत्र की इकाइयों का संचालन 1989 और 1990 के बीच शुरू हुआ, जबकि गेल का उत्तर प्रदेश पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पास के पाता में स्थित है. इन दोनों प्रतिष्ठानों ने एक ऐसे क्षेत्र को जिले के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में बदलने में मदद की, जो पहले मुख्य रूप से ग्रामीण था.
दिबियापुर की स्थिति इसे सड़क और रेल मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी प्रदान करती है. यह औरैया तथा कन्नौज के बीच स्टेट हाईवे 21 पर स्थित है, जबकि फफूंद रेलवे स्टेशन दिबियापुर में ही स्थित है. औरैया करीब 20 किलोमीटर, कन्नौज करीब 60 से 65 किलोमीटर, इटावा करीब 70 किलोमीटर, कानपुर करीब 100 से 110 किलोमीटर और मैनपुरी करीब 95 किलोमीटर दूर है. लखनऊ लगभग 200 किलोमीटर और आगरा करीब 185 किलोमीटर दूर है. अयोध्या करीब 300 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 300 किलोमीटर और वाराणसी करीब 380 किलोमीटर दूर है.
2009 के बाद के सात चुनावों का स्कोरकार्ड समाजवादी पार्टी को बीजेपी पर 4-3 की मामूली बढ़त देता है, लेकिन कुल आंकड़े से अधिक चुनावों का क्रम महत्वपूर्ण है. 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी आगे रही, 2012 में उसने नई विधानसभा सीट जीती, बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाई और 2017 में विधानसभा सीट जीती तथा 2019 में भी लोकसभा क्षेत्र में अपनी बढ़त बरकरार रखी. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 2022 में केवल 473 वोटों से विधानसभा सीट जीती और 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र में अपनी बढ़त बढ़ा ली. बीजेपी पहले ही यह दिखा चुकी है कि वह यहां समाजवादी पार्टी की बढ़त को पलट सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी सीट गंवाने के बाद उसे वापस हासिल करने की क्षमता दिखाई है.
एसआईआर ने पहले से करीबी मुकाबले वाली इस विधानसभा सीट में एक और तत्व जोड़ दिया है. 2024 के आंकड़े की तुलना में मतदाताओं की संख्या करीब 10 प्रतिशत कम हो गई है, लेकिन यह स्थापित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है कि इस कमी से किसी एक पार्टी के समर्थन आधार पर दूसरी पार्टी की तुलना में अधिक असर पड़ा है. विधानसभा चुनाव अपने आप में खास तौर पर दिलचस्प है, क्योंकि पिछला चुनाव केवल 473 वोटों से तय हुआ था. दिबियापुर में बड़े पैमाने पर चुनावी संतुलन बदले बिना भी सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है और न तो समाजवादी पार्टी और न ही बीजेपी 2027 में इस सीट को तय मानकर चल सकती है.
(अजय झा)
Lakhan Singh Rajput
BJP
Arun Kumar Dubey (lal Dubey)
BSP
Om Prakash Rajput
JANADIP
Manoj Kumar
INC
Nota
NOTA
Lakhan Singh
IND
Ankita Yadav
AAAP
Ashrit Prakash Darshan
IND
Dhirendra Singh Gautam
ASPKR
Sadhana
SDU
Gopal Swaroop Gandhi
KMBS
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने अपना रुख साफ किया है. इटावा के सैफई में मतदान के बाद उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों को पता है कि कितनी सीटों पर बंटवारा होना है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा. हालांकि, अखिलेश ने सीटों की संख्या का खुलासा नहीं किया.
पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
इटावा में अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर सवालों का जवाब दिया. इस दौरान सपा नेता राजकुमार भाटी पर कार्रवाई और आजम खान से जुड़े मुद्दों पर भी उनसे सवाल पूछे गए.