छपरौली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित एक ब्लॉक-लेवल का कस्बा है, जिसकी अपनी नगर पंचायत है. छपरौली का नाम सुनते ही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की याद आ जाती है, क्योंकि वे, उनके परिवार के सदस्य या उनके प्रतिनिधि दशकों तक इस निर्वाचन क्षेत्र में कभी नहीं हारे.
छपरौली, यमुना नदी के किनारे बसी जाट-बहुल ग्रामीण सीट है, जिसके दूसरी तरफ हरियाणा का पानीपत जिला है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और बागपत लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इस निर्वाचन क्षेत्र में छपरौली, डोगत और टिकरी नगर पंचायतें; छपरौली और बिनौली कानूनगो सर्कल के कुछ हिस्से और मुकर्रबपुर कंडेरा, किशनपुर, असारा, भुदपुर और कासिमपुर खेड़ी में फैले कई मतदान केंद्र शामिल हैं.
1967 के विधानसभा चुनावों से पहले परिसीमन आयोग के आदेश से बनी छपरौली सीट पर अब तक 16 विधानसभा चुनाव (1988 के उपचुनाव सहित) हो चुके हैं. चौधरी चरण सिंह ने यहां हुए पहले तीन चुनाव जीते थे - पहला 1967 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर और अगले दो भारतीय क्रांति दल के चुनाव चिह्न पर.
हालांकि चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार के भारी प्रभाव के कारण पार्टी-वार जीत का हिसाब-किताब कुछ हद तक बेमानी हो जाता है, फिर भी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने 2002 के बाद से लगातार पांचों चुनाव जीते हैं. जनता पार्टी और जनता दल ने तीन-तीन बार, भारतीय क्रांति दल ने दो बार, जबकि लोक दल, भारतीय किसान कामगार पार्टी और कांग्रेस ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में, RLD के वीरपाल राठी ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के देव पाल सिंह को 21,571 वोटों से हराकर यह सीट जीती थी. 2017 में, RLD के सहेंद्र सिंह रमाला ने BJP के सतेंद्र सिंह को 3,842 वोटों के कम अंतर से हराया था. बाद में रमाला को RLD से निकाल दिया गया और वे BJP में शामिल हो गए, जिसने 2022 में उन्हें उम्मीदवार बनाया. हालांकि, RLD के अजय कुमार ने 29,508 वोटों के अंतर से यह सीट जीती. अजय कुमार को 111,880 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सहेन्द्र सिंह रमाला को 82,372 वोट मिले.
छपरौली क्षेत्र में RLD का मजबूत प्रदर्शन लोकसभा चुनावों में भी दिखता है, हालांकि एक बार BJP ने उसे पीछे छोड़ दिया था. 2009 में, RLD ने BSP पर 35,606 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, BJP ने इतिहास रचते हुए RLD पर 14,714 वोटों की बढ़त बनाई. इस दौरान चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह अपने पारिवारिक गढ़ में पीछे रह गए. 2019 में RLD ने 13,142 वोटों की बढ़त के साथ फिर से शीर्ष स्थान हासिल किया. इस बार अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी उम्मीदवार थे. 2024 में RLD ने अपनी स्थिति और मजबूत की और समाजवादी पार्टी पर 47,225 वोटों की बढ़त बनाई. RLD के राजकुमार सांगवान को 102,195 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरपाल शर्मा को 54,970 वोट मिले.
छपरौली विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 279,600 थी, जो 2017 में बढ़कर 317,978 और 2019 में 325,942 हो गई. 2022 में यह संख्या और बढ़कर 337,033 हो गई और 2024 के लोकसभा चुनावों में 336,740 रही.
सालों के दौरान मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव होता रहा है. यह 2012 में 52.07 प्रतिशत, 2017 में 62.96 प्रतिशत, 2019 में 61.25 प्रतिशत, 2022 में 62.71 प्रतिशत था और 2024 में गिरकर 51.45 प्रतिशत हो गया.
छपरौली हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है जहां जाट समुदाय का दबदबा है. यहां मुसलमानों की भी अच्छी-खासी आबादी है, जबकि अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल मतदाताओं में 10.82 प्रतिशत है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 89.34 प्रतिशत मतदाता गांवों में और 10.66 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों की तरह, छपरौली क्षेत्र का भी लंबा इतिहास रहा है. यह गंगा-यमुना दोआब की प्राचीन बस्तियों का हिस्सा था और बाद में मुग़लों और अंग्रेजों सहित कई शासकों के प्रभाव में आया. यह इलाका मुख्य रूप से खेती-बाड़ी वाला रहा और 20वीं सदी में जाटों के एक मजबूत गढ़ के तौर पर उभरा. किसानों के हितों की वकालत करने वाले चौधरी चरण सिंह की वजह से इसे राष्ट्रीय राजनीति में अहमियत मिली.
छपरौली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में यमुना नदी के किनारे बसा है. यहां जिला और राज्य राजमार्गों के जरिए सड़क संपर्क की ठीक-ठाक सुविधा है. यहां कोई सीधा रेल संपर्क नहीं है. सबसे नजदीकी बड़े रेलवे स्टेशन मेरठ और पानीपत में हैं. हरियाणा का पानीपत यमुना के ठीक उस पार है, जो सड़क मार्ग से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर है. सोनीपत लगभग 35-40 किलोमीटर दूर है. बागपत लगभग 25-30 किलोमीटर, मेरठ लगभग 45-50 किलोमीटर, दिल्ली लगभग 70-80 किलोमीटर और राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 500 किलोमीटर दूर है.
यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है, जिसमें गन्ना, अनाज और बागवानी मुख्य फसलें हैं. डेयरी फार्मिंग भी बड़े पैमाने पर होती है. मतदाताओं के मुख्य मुद्दों में गन्ने की कीमतें, सिंचाई की सुविधाएं, बिजली की आपूर्ति, यमुना के किनारे बाढ़ से सुरक्षा और बेहतर सड़क संपर्क शामिल हैं. RLD ने अपने गढ़ माने जाने वाले इलाके में शानदार प्रदर्शन किया है और अब वह BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है, इसलिए 2027 के चुनावों में RLD बढ़त और गर्व के साथ उतरेगी.
RLD ने अपने गढ़ माने जाने वाले इलाके में शानदार प्रदर्शन किया है और अब वह BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है. ऐसे में, RLD 2027 के चुनावों में बढ़त और पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरेगी, क्योंकि उसके दबदबे को चुनौती देने वाला कोई खास नहीं दिख रहा. छपरौली में RLD को हराने के लिए समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को कोई बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दांव चलना पड़ सकता है.
(अजय झा)
Sahender Singh Ramala
BJP
Sahik
BSP
Anees
AIMIM
Mohd. Yunus
INC
Nota
NOTA
Satveer Kashyap
VSIP
Dr. Rajendra Khokhar
AAAP
Ajay Kumar
IND
Naresh
BHATARSP
Chandrapal
INAPI
Kaptan
ABLP
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