बबीना उत्तर प्रदेश के झांसी जिले का एक छावनी नगर है, जो झांसी-सागर मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. यह बुंदेलखंड क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और भारतीय सेना की 31वीं आर्मर्ड डिवीजन से जुड़ा हुआ है. प्रशासनिक रूप से बबीना सामुदायिक विकास खंड का मुख्यालय है. यहां नगर पालिका है और यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में काम करता है. बबीना छावनी की स्थापना आजादी के बाद 1959 में हुई थी और यह आज भी एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान है.
बबीना के नाम पर एक विधानसभा क्षेत्र भी है, जिसका गठन 1967 के चुनावों से पहले किया गया था. यह झांसी लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 1967 और 1969 में यह सामान्य सीट थी, लेकिन पुराने परिसीमन के तहत 1974 से इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया और 2007 के विधानसभा चुनाव तक यह आरक्षित रही. 2008 के परिसीमन के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव से यह सामान्य यानी अनारक्षित सीट बन गई. वर्तमान में इसमें बबीना छावनी बोर्ड, झांसी छावनी बोर्ड, बरुआ सागर नगर पालिका बोर्ड, चिरगांव नगर पालिका बोर्ड, बरागांव नगर पंचायत, झांसी रेलवे सेटलमेंट के साथ बरागांव, झांसी, रक्सा, बबीना और चिरगांव के कानूनगो सर्किल, पांच ग्राम पंचायतें और आसपास के वन क्षेत्र शामिल हैं. इसके कारण बबीना का स्वरूप ग्रामीण और शहरी दोनों तरह का है, जहां मतदाताओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है, जबकि शहरी आबादी की भी अच्छी भागीदारी है.
बबीना में विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद से अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा और उसने पहले पांच चुनावों में से चार में जीत हासिल की. वहीं, भारतीय जनता पार्टी और उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ ने धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. कुल मिलाकर भाजपा ने यह सीट छह बार जीती है, जिसमें 1974 में भारतीय जनसंघ की जीत भी शामिल है. कांग्रेस ने चार बार और बहुजन समाज पार्टी ने तीन बार यह सीट जीती है, जबकि जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है.
2012 में बसपा ने 2007 में जीती गई सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. हालांकि, पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक रतन लाल अहिरवार का टिकट काटकर कृष्ण पाल सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया. राजपूत ने समाजवादी पार्टी के चंद्रपाल सिंह यादव को 6,955 मतों से हराया, जबकि भाजपा के श्याम सुंदर सिंह परिछा तीसरे स्थान पर रहे. 2017 में राजीव सिंह परिछा के उम्मीदवार बनने के बाद भाजपा ने यह सीट जीत ली. परिछा ने समाजवादी पार्टी के यशपाल सिंह यादव को 16,837 मतों से हराया. इस चुनाव में बसपा के मौजूदा विधायक कृष्ण पाल सिंह राजपूत तीसरे स्थान पर रहे. 2022 में भाजपा ने अपनी जीत बरकरार रखी और जीत का अंतर भी बढ़ाया. परिछा को 118,343 मत मिले, जबकि यशपाल सिंह यादव को 73,814 मत प्राप्त हुए. इस तरह भाजपा ने 44,529 मतों से जीत हासिल की. बसपा एक बार फिर तीसरे स्थान पर रही.
बबीना में भाजपा का दबदबा लोकसभा चुनावों में भी दिखाई दिया है. 2009 के बाद हुए चार लोकसभा चुनावों में से तीन में इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को बढ़त मिली. 2009 में कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्र में बसपा पर 9,559 मतों की बढ़त बनाई थी, जबकि समाजवादी पार्टी और भाजपा क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रही थीं. 2014 में स्थिति बदल गई, जब भाजपा उम्मीदवार उमा भारती ने समाजवादी पार्टी के चंद्रपाल सिंह यादव पर 4,196 मतों की बढ़त हासिल की. 2019 में भाजपा की बढ़त बढ़कर समाजवादी पार्टी के मुकाबले 52,216 मतों तक पहुंच गई. 2024 में भी भाजपा आगे रही, हालांकि जीत का अंतर काफी कम हो गया. अनुराग शर्मा को 110,780 मत मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप जैन आदित्य को 92,821 मत प्राप्त हुए. इस तरह बबीना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 17,959 मतों की बढ़त मिली. कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने 2024 में झांसी लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ा था.
बबीना में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 289,902 थी, जो 2017 में बढ़कर 323,440 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां 322,721 मतदाता थे. 2022 में यह संख्या 332,043 और 2024 में 343,315 हो गई. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में बबीना में 305,051 मतदाता दर्ज किए गए. यह 2024 के आंकड़े से 38,264 कम है, यानी मतदाताओं की संख्या में 11.14 प्रतिशत की कमी आई है. अंतिम एसआईआर मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की गई थी.
बबीना में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक रहा है. 2012 में यहां 68.78 प्रतिशत और 2017 में 71.20 प्रतिशत मतदान हुआ था. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 68.26 रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह बढ़कर 70.79 प्रतिशत हो गया, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर 64.10 प्रतिशत रह गया.
बबीना एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी का अनुमान लगभग 6 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 24.61 प्रतिशत मानी जाती है. राजनीतिक और उपनाम आधारित अनुमानों के अनुसार, यहां यादव, लोधी और कुशवाहा समुदायों की अच्छी संख्या है. इनके अलावा ब्राह्मण, बनिया, कुर्मी, ठाकुर और अन्य पिछड़े वर्गों तथा दलित समुदायों की भी मौजूदगी है. जातिगत आबादी के एक हालिया अनुमान के अनुसार, लोधी समुदाय की आबादी लगभग 14.40 प्रतिशत, कुशवाहा की 11.78 प्रतिशत, यादव की 22.51 प्रतिशत, ब्राह्मण की 7.85 प्रतिशत और बनिया की 5.23 प्रतिशत है. दोनों छावनियों और रेलवे सेटलमेंट के कारण इस विधानसभा क्षेत्र में सैन्यकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की भी अच्छी संख्या है. अनुमान के अनुसार, यहां की लगभग 70.45 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में और 29.55 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
बबीना ऐतिहासिक बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित है. झांसी का व्यापक क्षेत्र बुंदेला शासकों और बाद में झांसी की रियासत से जुड़ा रहा है. 19वीं शताब्दी में यह क्षेत्र ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गया और 1857 के विद्रोह के दौरान, विशेषकर झांसी के आसपास, इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. हालांकि, बबीना ने अपनी वर्तमान सैन्य पहचान आजादी के बाद हासिल की, जब 1959 में यहां छावनी की स्थापना हुई. यह क्षेत्र बेतवा नदी पर बने सुकमा डुकमा बांध के लिए भी जाना जाता है. यह स्थानीय स्तर पर जल और सिंचाई की एक महत्वपूर्ण परियोजना है और एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल भी है.
विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में कृषि आजीविका का प्रमुख आधार है. खेती, पशुपालन और स्थानीय व्यापार के माध्यम से बड़ी आबादी को रोजगार मिलता है. बबीना, चिरगांव और बरुआ सागर जैसे शहरी केंद्र आसपास के गांवों के लिए बाजार और सेवाएं उपलब्ध कराते हैं. सैन्य प्रतिष्ठानों के कारण यहां की अर्थव्यवस्था में एक अलग आयाम जुड़ता है, क्योंकि इनसे रक्षा क्षेत्र में रोजगार, सेवाओं और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलता है. झांसी-सागर मार्ग पर स्थित होने और रेलवे संपर्क के कारण बबीना से कृषि उत्पादों तथा अन्य वस्तुओं की आवाजाही भी आसान होती है.
बबीना सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. बबीना रेलवे स्टेशन झांसी-बीना रेल मार्ग पर स्थित है और क्षेत्र के प्रमुख रेलवे केंद्र वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन से लगभग 25 किलोमीटर दूर है. झांसी शहर यहां से लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि ललितपुर करीब 80 से 90 किलोमीटर दूर है. निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा ग्वालियर में है, जो बबीना से लगभग 120 से 130 किलोमीटर दूर है. आगरा की दूरी करीब 260 किलोमीटर, लखनऊ की लगभग 320 किलोमीटर और कानपुर की लगभग 230 किलोमीटर है.
बबीना में भाजपा का चुनावी रिकॉर्ड विपक्षी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. 2014 के बाद हुए पांच प्रमुख चुनावों में पार्टी को लगभग लगातार मजबूत बढ़त मिली है. हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा से केवल 1.88 प्रतिशत अंकों से पीछे रही थी. इसके बाद पार्टी 2014 में मिले समर्थन को अगले विधानसभा चुनावों में बरकरार नहीं रख सकी. 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने समाजवादी पार्टी पर क्रमशः 7.32 और 18.98 प्रतिशत अंकों की बढ़त के साथ जीत हासिल की. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार के मुकाबले भाजपा की बढ़त घटकर 8.17 प्रतिशत अंक रह गई.
बबीना में भाजपा के मजबूत चुनावी रिकॉर्ड के बावजूद 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, इसके लिए विपक्ष को पहले अपने संगठन को मजबूत करना होगा. उसे ऐसा उम्मीदवार उतारना होगा, जो जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर बबीना के मतदाताओं को आकर्षित कर सके. इसके साथ ही विपक्ष को मतदाताओं के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें भाजपा के बजाय विपक्ष को वोट क्यों देना चाहिए. 2024 के लोकसभा चुनाव ने दिखाया कि विपक्षी मतों के एकजुट होने पर भाजपा की पहले की मजबूत बढ़त को काफी हद तक कम किया जा सकता है. हालांकि, 2027 के चुनाव में भाजपा को लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतने, मौजूदा विधायक और पिछले लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में मिली पर्याप्त बढ़त का फायदा मिल सकता है. फिलहाल बबीना में सत्ता विरोधी लहर का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता. ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे मजबूत दावेदार नजर आती है.
(अजय झा)
Yashpal Singh Yadav
SP
Dasharath Singh Rajpoot
BSP
Rani Devi
JANADIP
Chandra Shekher Tiwari
INC
Nota
NOTA
Keshav Singh
ASPKR
Jayram Pal
IND
Rajkumar
IND
Hareeom
IND
Ramsingh Pal
RSPS
Shiroman Singh Rajpoot
SHS
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
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समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
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