अयाह शाह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का एक पूरी तरह ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. इसका नाम बहुआ ब्लॉक के अयाह और शाह गांवों के नाम पर रखा गया है. यह क्षेत्र उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब में स्थित है. यहां के निवासी प्रशासनिक सेवाओं, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रमुख बाजारों की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से पास के जिला मुख्यालय फतेहपुर पर निर्भर रहते हैं.
2008 के परिसीमन आदेश के तहत स्थापित अयाह शाह एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और फतेहपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा खंडों में से एक है. इसमें फतेहपुर तहसील के असोथर, अयाह शाह, मुत्तौर और गाजीपुर के कानूनगो सर्किल शामिल हैं. यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है और इसकी मतदाता सूची में कोई शहरी क्षेत्र शामिल नहीं है. 2008 से पहले इसका अधिकांश हिस्सा तत्कालीन हसवा विधानसभा क्षेत्र का भाग था.
नए विधानसभा क्षेत्र के रूप में अयाह शाह का चुनावी इतिहास सीमित है और यहां अब तक केवल तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं. 2012 में बहुजन समाज पार्टी के अयोध्या प्रसाद पाल ने पहला चुनाव जीता था. उन्होंने समाजवादी पार्टी के आनंद प्रकाश लोधी को 11,097 वोटों से हराया था. कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही, जबकि भाजपा अपनी जमानत जब्त कराकर काफी अंतर से चौथे स्थान पर रही.
2017 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब भाजपा ने हीरा लाल निषाद की जगह नए उम्मीदवार विकास गुप्ता को मैदान में उतारा और अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गई. गुप्ता ने अयोध्या प्रसाद पाल को 51,965 वोटों से हराया. पाल बसपा सरकार में मंत्री रह चुके थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और इसके बाद वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे. 2022 में समाजवादी पार्टी ने विश्वंभर प्रसाद निषाद को उम्मीदवार बनाया. इस फैसले से पार्टी की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन गुप्ता ने 71,231 वोट हासिल करके भाजपा के लिए सीट बरकरार रखी. निषाद को 58,225 वोट मिले और जीत का अंतर घटकर 13,006 रह गया.
शुरुआती संघर्ष के बाद अयाह शाह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा लोकसभा चुनावों में भी दिखाई देता है. 2009 में इस विधानसभा क्षेत्र में बसपा ने समाजवादी पार्टी पर 1,742 वोटों की बढ़त बनाई थी. उस चुनाव में तीसरे स्थान पर रही भाजपा 2014 में आगे निकल गई और बसपा पर 30,367 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में उसकी बढ़त बढ़कर 34,504 वोट हो गई, जब बसपा ने समाजवादी पार्टी के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा था. 2024 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपना सहयोगी बदलकर कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया. हालांकि, पार्टी ने अंतर कम किया, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को पहले स्थान से हटाने में सफल नहीं हुई. फतेहपुर से भाजपा की उम्मीदवार निरंजन ज्योति, जिन्हें लोकप्रिय रूप से साध्वी निरंजन ज्योति के नाम से जाना जाता है, को 67,820 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के नरेश चंद्र उत्तम पटेल को 63,290 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 4,530 वोटों की बढ़त हासिल की.
अयाह शाह में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 247,607 से बढ़कर 2017 में 260,518 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 267,963 हो गई. 2022 में यह संख्या 274,947 थी, जबकि 2024 में बढ़कर 280,787 हो गई. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में कथित तौर पर 251,626 मतदाता थे. यह 2024 के आंकड़े से 29,161 मतदाताओं की कमी दर्शाता है, जो 10.39 प्रतिशत है.
यहां मतदान प्रतिशत आम तौर पर सीमित रहा है, हालांकि विधानसभा चुनावों में लोकसभा चुनावों की तुलना में अधिक भागीदारी देखने को मिली है. 2012 में मतदान प्रतिशत 58.95 रहा, जबकि 2017 में यह 57.94 प्रतिशत था. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 54.68 प्रतिशत रह गया, जिसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 58.47 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत फिर घटकर 54.96 रह गया.
अयाह शाह हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है. यहां मुस्लिम आबादी लगभग 10.40 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी अनुमानित 24.59 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में क्षत्रिय, निषाद, ब्राह्मण, पाल, लोधी, प्रजापति और यादव शामिल हैं. इनके साथ अन्य पिछड़ी जातियों के समूह भी यहां रहते हैं. यह विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है और इसकी मतदाता सूची में कोई शहरी मतदाता शामिल नहीं है.
अयाह और शाह गांव, फतेहपुर जिले के इस हिस्से की अधिकांश बस्तियों की तरह, दोआब के पारंपरिक कृषि क्षेत्र का हिस्सा हैं. स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है, जिसमें गेहूं, धान और दलहन प्रमुख फसलें हैं. इस विधानसभा क्षेत्र के अपने ऐतिहासिक स्थलों के बारे में व्यापक रूप से दर्ज जानकारी सीमित है. यहां का सामाजिक और आर्थिक जीवन आसपास के गांवों तथा फतेहपुर जिला मुख्यालय से निकटता से जुड़ा हुआ है.
अयाह शाह की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और ग्रामीण आबादी की जरूरतें पूरी करने वाले बाजारों पर निर्भर करती है. फतेहपुर शहर व्यापार, सार्वजनिक सेवाओं और परिवहन संपर्कों के लिए निकटतम प्रमुख केंद्र है. फतेहपुर रेलवे स्टेशन व्यापक रेल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करता है, जबकि सड़क संपर्क इस विधानसभा क्षेत्र को फतेहपुर और अन्य क्षेत्रीय केंद्रों से जोड़ते हैं. विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से फतेहपुर शहर की दूरी लगभग 15 से 25 किलोमीटर है, जबकि कानपुर करीब 80 किलोमीटर और प्रयागराज लगभग 110 से 120 किलोमीटर दूर है. सड़क मार्ग से लखनऊ की दूरी लगभग 125 से 135 किलोमीटर है. अयोध्या और वाराणसी इससे अधिक दूर स्थित हैं, जिनकी दूरी मार्ग और विधानसभा क्षेत्र में शुरुआती स्थान के आधार पर क्रमशः लगभग 200 से 220 किलोमीटर और 220 से 240 किलोमीटर है.
अयाह शाह का चुनावी इतिहास अब तक भाजपा को प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में दर्शाता है. पार्टी ने दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और 2014 के बाद हुए तीनों लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में बढ़त हासिल की है. हालांकि, आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच का अंतर कितनी तेजी से कम हुआ है. भाजपा का वोट प्रतिशत 2017 में 53.80 से घटकर 2022 में 44.40 प्रतिशत रह गया, जबकि समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत 19.37 से बढ़कर 36.30 प्रतिशत हो गया. परिणामस्वरूप, दोनों पार्टियों के बीच का अंतर 34.43 प्रतिशत अंक से घटकर 8.10 प्रतिशत अंक रह गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की समाजवादी पार्टी पर बढ़त और कम होकर 2.93 प्रतिशत अंक रह गई.
यदि बसपा कोई बड़ी वापसी नहीं करती है, तो पिछले दो चुनावों में हाशिए पर पहुंच चुकी यह पार्टी अकेले दोनों प्रमुख दलों को चुनौती देने की स्थिति में नहीं दिखती. हालांकि, उसकी वापसी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वह किसी भी पक्ष के वोट काट सकती है. इससे जुड़ी अधिक तात्कालिक अनिश्चितता विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 2024 की मतदाता सूची से 29,161 मतदाताओं की कमी है, जो 10.39 प्रतिशत है. इसका राजनीतिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि इससे किन दलों या समुदायों पर सबसे अधिक असर पड़ा है.
समाजवादी पार्टी ने 2017 के बाद से उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है, लेकिन वह अभी तक विधानसभा सीट जीतने में सफल नहीं हुई है. दूसरी ओर, भाजपा ने अयाह शाह सीट पर लगातार दो बार जीत दर्ज की है, हालांकि उसके जीत के अंतर में काफी कमी आई है. चुनावी इतिहास ऐसे मुकाबले की ओर संकेत करता है, जिसमें समाजवादी पार्टी अपनी बढ़त को विधानसभा चुनाव की जीत में बदलने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा 2014 के बाद से स्थापित अपनी बढ़त को बनाए रखने का प्रयास करेगी.
(अजय झा)
Vishambhar Prasad Nishad
SP
Chandan Singh
BSP
Nota
NOTA
Hemlata
INC
Sushil Singh Patel
CPI
Anurag Singh
IND
Shyamrani
IND
Lal Singh
PPID
Sheelam Devi
BSCP
Vinod Kumar
RKSP
Narendara Kumar
LJP
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.