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अमेठी विधानसभा चुनाव 2027 (Amethi Assembly Election 2027)

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अमेठी विधानसभा चुनाव 2027 (Amethi Assembly Election 2027)

अमेठी उत्तर प्रदेश का एक जिला है, जिसका मुख्यालय पास के गौरीगंज कस्बे में है. पहले इसे रायपुर-अमेठी के नाम से जाना जाता था, लेकिन 1898 में ब्रिटिश शासन के दौरान यहां रेलवे स्टेशन बनने के बाद इसका नाम केवल अमेठी रह गया. मुगल काल के अभिलेखों में भी अमेठी का उल्लेख मिलता है और आसपास के बड़ी संख्या में गांवों के लिए यह एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र के रूप में काम करता है.

रेलवे आने से पहले ब्रिटिश अभिलेखों में अमेठी को कम व्यावसायिक गतिविधियों वाली एक सामान्य बस्ती के रूप में बताया गया था. अवध और रोहिलखंड रेलवे के आने से इसकी स्थिति बदली और कस्बे का आकार तथा व्यावसायिक महत्व तेजी से बढ़ा. रेलवे स्टेशन खुलने के कुछ ही वर्षों के भीतर इसे एक विकसित और समृद्ध कस्बे के रूप में दर्ज किया गया. हालांकि, यह क्षेत्र से बाहर अपेक्षाकृत कम चर्चित रहा, जब तक कि इसका संबंध गांधी परिवार से नहीं जुड़ा. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने 1977 में अमेठी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, जबकि उनकी मां इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव मैदान में थीं. 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों हार गए. संजय गांधी 1980 में अमेठी लौटे और चुनाव जीते, लेकिन उसी वर्ष एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई.

उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े भाई राजीव गांधी सक्रिय राजनीति में आए. राजीव गांधी ने 1981 में अमेठी लोकसभा उपचुनाव जीता और इसके बाद 1984, 1989 और 1991 के आम चुनावों में भी अमेठी से जीत दर्ज की. 1984 में अपनी मां की हत्या के बाद वह प्रधानमंत्री बने. 1991 का उनका चुनाव उनकी हत्या के बाद हुआ और उनकी मृत्यु के बाद भी उन्हें निर्वाचित घोषित किया गया. इसके बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सतीश शर्मा ने जीत दर्ज की.

अमेठी का गांधी परिवार से जुड़ाव आगे भी जारी रहा. राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने 1999 में अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. बाद में उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ना शुरू किया और अपने बेटे राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी. राहुल गांधी ने 2004 में अमेठी से अपना चुनावी पदार्पण किया. उन्होंने 2004, 2009 और 2014 में सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन 2019 में भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी से हार गए. 2024 में राहुल गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा ने अमेठी में स्मृति ईरानी को हराया. राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित होने के बावजूद अमेठी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है और यहां रोजगार के अवसर, पलायन तथा आर्थिक विकास की गति जैसे स्थानीय मुद्दे प्रमुख हैं.

अमेठी 1951 में उत्तर प्रदेश में हुए पहले विधानसभा चुनावों से ही राज्य के चुनावी नक्शे पर मौजूद है. यह एक सामान्य और अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है तथा अमेठी लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसमें अमेठी तहसील का पूरा क्षेत्र शामिल है, जिसमें अमेठी का शहरी क्षेत्र भी आता है. इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है और इसमें शहरी क्षेत्र की हिस्सेदारी कम है.

अमेठी में 1951 से राज्य में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में मतदान हुआ है. यह क्षेत्र लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत आधार रहा और भारतीय जनसंघ तथा बाद में भारतीय जनता पार्टी से उसे समय-समय पर चुनौती मिली. हाल के वर्षों में समाजवादी पार्टी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है और उसने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में से दो में जीत दर्ज की है.

कुल मिलाकर कांग्रेस ने अमेठी विधानसभा सीट पर नौ बार जीत दर्ज की है. इसके बाद भाजपा को पांच जीत का श्रेय दिया जाता है, जिसमें 1967 और 1969 में उसकी पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं. समाजवादी पार्टी ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में से दो में जीत दर्ज की है, जबकि एक बार निर्दलीय और एक बार जनता पार्टी के उम्मीदवार ने यह सीट जीती है.

2012 में समाजवादी पार्टी ने अमेठी में अपना खाता खोला. उसके उम्मीदवार गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कांग्रेस की मौजूदा विधायक अमिता सिंह को 8,760 मतों से हराया. 2002 में अमिता सिंह के उम्मीदवार रहते हुए भाजपा ने यह सीट जीती थी. 2007 में चौथे स्थान पर रहने के बाद भाजपा ने 2017 में सीट पर वापसी की. भाजपा की गरिमा सिंह ने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक गायत्री प्रसाद प्रजापति को 5,065 मतों से हराया. 2022 में समाजवादी पार्टी ने महाराजी प्रजापति को उम्मीदवार बनाकर सीट पर फिर जीत हासिल की. 2021 में बलात्कार के एक मामले में गायत्री प्रसाद प्रजापति को दोषी ठहराए जाने के बाद पार्टी ने उनकी जगह उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया. महाराजी प्रजापति को 88,217 वोट मिले, जबकि भाजपा की प्रतिद्वंद्वी संजया सिंह को 70,121 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 18,096 मतों से जीत दर्ज की.

संजया सिंह अमेठी के पूर्व शासक परिवार से संबंध रखते हैं. उन्होंने पहले 1980 और 1985 में कांग्रेस के टिकट पर यह सीट जीती थी. उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह ने बाद में 2017 में भाजपा के टिकट पर यह सीट जीती, जबकि उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह ने दो बार अमेठी का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने 2002 में भाजपा और 2007 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था. खास बात यह है कि 2017 के चुनाव में गरिमा सिंह और अमिता सिंह आमने-सामने थीं. गरिमा सिंह दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि अमिता सिंह चौथे स्थान पर रहीं.

अमेठी विधानसभा की राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव कम होने के बावजूद लोकसभा चुनावों में अमेठी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति मजबूत रही है. 2009 के बाद हुए चारों लोकसभा चुनावों में कांग्रेस इस विधानसभा क्षेत्र में आगे रही. 2009 में कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी के मुकाबले 54,201 मतों की बढ़त बनाई. 2014 में भाजपा ने बसपा की जगह कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी का स्थान लिया और कांग्रेस की बढ़त घटकर भाजपा के मुकाबले 26,952 वोट रह गई. 2019 में कांग्रेस ने अमेठी विधानसभा क्षेत्र में केवल 230 वोटों की बढ़त बनाए रखी, जबकि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए. यह अमेठी में गांधी परिवार के किसी सदस्य की दूसरी हार थी, इससे पहले 1977 में संजय गांधी चुनाव हार चुके थे. 2024 में राहुल गांधी रायबरेली चले गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा ने अमेठी में स्मृति ईरानी को हराया. शर्मा को 105,983 वोट मिले, जबकि ईरानी को 59,294 वोट मिले. इस तरह विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 46,689 वोटों की बढ़त मिली.

अमेठी में समय के साथ मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 296,160 से बढ़कर 2017 में 334,587 और 2019 के लोकसभा चुनाव में 341,357 हो गई. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या 350,626 थी और 2024 में 352,012 हो गई. 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 304,358 मतदाता थे. यह संख्या 2024 में दर्ज 352,012 मतदाताओं से 47,654 कम थी, यानी 13.54 प्रतिशत की कमी हुई. एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची के आकार में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे 2027 का विधानसभा चुनाव इस क्षेत्र में काफी छोटे मतदाता आधार पर होने वाला पहला विधानसभा चुनाव होगा.

मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव रहा है और विधानसभा चुनावों में यह मध्यम स्तर पर रहा, जबकि लोकसभा चुनावों में यह अपेक्षाकृत कम रहा. 2012 में मतदान प्रतिशत 55.06 था और 2017 में 56.14 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 49.81 प्रतिशत हो गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 54.31 प्रतिशत हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 51.48 प्रतिशत रहा.

अमेठी एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी का अनुमान करीब 7.10 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 18.91 प्रतिशत है. प्रमुख समुदायों में यादव शामिल हैं, जिनकी आबादी करीब 11.70 प्रतिशत बताई जाती है. इसके अलावा ब्राह्मण, ठाकुर, कुर्मी, मौर्य, पासी, कोरी, लोधी और अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अनुसूचित जाति समुदाय भी यहां मौजूद हैं. यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह ग्रामीण है, जहां करीब 95.45 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और शेष 4.55 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है. ये आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं और अमेठी कस्बे के विस्तार तथा व्यावसायिक और प्रशासनिक गतिविधियों के बढ़ने से हुए बाद के बदलावों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

अमेठी का इतिहास कई सदियों पुराना है. मुगल प्रशासन के दौरान यह क्षेत्र अमेठी परगना का हिस्सा था और इसका उल्लेख आईन-ए-अकबरी में मिलता है. बंधलगोटी राजपूतों का संबंध अमेठी रियासत से रहा है. बाद में इस रियासत के शासकों ने रामनगर को अपना प्रमुख केंद्र बनाया, क्योंकि पहले का रायपुर क्षेत्र अपना महत्व खो चुका था. 19वीं शताब्दी में 1857 के विद्रोह के दौरान अमेठी रियासत की भी भूमिका रही. राजा लाल माधो सिंह ने शुरुआत में अंग्रेजों के साथ संबंध बनाए रखे, लेकिन बाद में विद्रोह का समर्थन किया और 1858 में उन्हें अपने किले में आत्मसमर्पण करना पड़ा. 19वीं और 20वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में अमेठी रियासत इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्थानीय शक्तियों में शामिल रही.

1898 में रेलवे आने के बाद आधुनिक अमेठी कस्बे का तेजी से विकास हुआ. अवध और रोहिलखंड रेलवे ने अमेठी को बड़े बाजारों और प्रशासनिक केंद्रों से जोड़ा. इससे एक छोटी बस्ती का तेजी से विकास हुआ और वह व्यावसायिक गतिविधियों वाला कस्बा बन गया. अमेठी के राजघराने के संरक्षण में यहां शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों का भी विकास हुआ.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है. विधानसभा क्षेत्र में धान, गेहूं, दलहन और अन्य खाद्य फसलों की खेती होती है. पशुपालन, स्थानीय व्यापार और छोटे व्यवसाय भी आय के अतिरिक्त स्रोत हैं. अमेठी कस्बा आसपास के गांवों के लिए बाजार और सेवा केंद्र के रूप में काम करता है. व्यापक जिले में औद्योगिक विकास भी हुआ है, खासकर जगदीशपुर के आसपास, हालांकि अमेठी विधानसभा क्षेत्र की आर्थिक संरचना अब भी मुख्य रूप से कृषि आधारित है.

अमेठी सड़क और रेल मार्ग से लखनऊ, रायबरेली, सुलतानपुर, प्रतापगढ़ और अवध तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों से जुड़ा है. अमेठी रेलवे स्टेशन उस रेल नेटवर्क पर स्थित है, जो इस क्षेत्र को लखनऊ और वाराणसी से जोड़ता है. अमेठी जिला मुख्यालय गौरीगंज से करीब 13 किलोमीटर और रायबरेली से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. सुलतानपुर करीब 65 किलोमीटर और प्रतापगढ़ लगभग 70 किलोमीटर दूर है. लखनऊ सड़क मार्ग से करीब 100 किलोमीटर दूर है. अयोध्या लगभग 90 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 130 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 190 किलोमीटर दूर है.

अमेठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस के लंबे राजनीतिक प्रभाव के कमजोर होने और पूर्व राजघराने के प्रभाव में कमी आने के बाद मुकाबला अधिक प्रतिस्पर्धी हुआ है. 2012 के बाद समाजवादी पार्टी ने खुद को एक महत्वपूर्ण विधानसभा राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है. भाजपा ने भी यह दिखाया है कि वह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों को हराकर उस क्षेत्र में जीत दर्ज कर सकती है, जिसका लंबे समय तक कांग्रेस से संबंध रहा है. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान के रुझान अलग-अलग दिखाई देने लगे हैं. लोकसभा चुनावों में अमेठी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा है, जबकि हाल के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और भाजपा का प्रभाव अधिक रहा है.

2022 के विधानसभा चुनाव परिणाम में समाजवादी पार्टी को 46.47 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 36.94 प्रतिशत वोट मिले. दोनों दलों के बीच अंतर 9.53 प्रतिशत अंक का था. कांग्रेस 7.42 प्रतिशत वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही. इसके विपरीत 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 46,689 वोटों की बढ़त मिली. अलग-अलग चुनावों के परिणाम बताते हैं कि अमेठी के विधानसभा और लोकसभा चुनावों को एक-दूसरे का सीधा विस्तार नहीं माना जा सकता. उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय गठबंधन, समाजवादी पार्टी के संगठन की स्थिति और एसआईआर के बाद बनी मतदाता सूची 2027 के चुनाव में महत्वपूर्ण कारक होंगे. इससे 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए सीट पर मुकाबले की स्थिति बनी हुई है.

(अजय झा)

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अमेठी विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Maharaji Prajapati

img
SP
वोट88,217
विजेता पार्टी का वोट %46.5 %
जीत अंतर %9.6 %

अमेठी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Dr.sanjay Sinh

    BJP

    70,121
  • Ashish Shukla

    INC

    14,080
  • Ragini

    BSP

    10,202
  • Nota

    NOTA

    1,206
  • Sanjay Singh

    IND

    978
  • Anurag

    AAAP

    935
  • Anju Pal

    RSUP

    793
  • Ramraj

    MADP

    670
  • Ashok Kumar

    IND

    574
  • Pawan

    IND

    522
  • Krishna Kumar

    JANADIP

    494
  • Shatrunjay Pratap Singh

    LGP

    378
  • Pradeep Kumar

    RDEMFR

    361
  • Raju

    VSIP

    333
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