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बंगाल में बीजेपी की महाजीत का मेसी कनेक्शन! GOAT टूर ने ऐसे बदला सियासी समीकरण

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. भारतीय जनता पार्टी ने लंबे संघर्ष के बाद राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता हासिल कर ली. पार्टी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की. जबकि सत्तारूढ़ दल दोहरे अंकों में सिमट कर रह गया.

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बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बीच छाए मेसी (Photo: ITG)
बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बीच छाए मेसी (Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत बेहद खास है. हो भी क्यों ना... सालों के संघर्ष के बाद यह पार्टी राज्य में कमल खिलाने में कामयाब रही है. बीजेपी ने उस पार्टी को परास्त किया, जिसने 34 साल तक चली वाम मोर्चे की सरकरार को उखाड़कर सत्ता हासिल की थी और 15 सालों तक पश्चिम बंगाल पर राज किया. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पूरे आत्मविश्वास के साथ जीत का चौका लगाने के उद्देश्य से चुनावी मैदान में उतरी थी, लेकिन बीजेपी की रणनीति का तोड़ वो खोज नहीं सकी. ममता बनर्जी को सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ा, जिसके कारण वो 100 का आंकड़ा भी नहीं टच पाई. दूसरी ओर बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर 2 तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर लिया.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव के बीच एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया. राज्य की बदली सियासी तस्वीर को महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे से जोड़कर भी देखा जा रहा है. पिछले साल 13 दिसंबर को अर्जेंटीना के कप्तान मेसी 'GOAT Tour to India' के तहत सबसे पहले कोलकाता पहुंचे थे. फुटबॉल फैन्स के लिए ये ऐतिहासिक मौका था, लेकिन यह आयोजन तब भारी कुप्रबंधन के कारण विवादों में घिर गया.

कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में तब हजारों दर्शक अपने चहेते फुटबॉलर लियोनेल मेसी की एक झलक पाने पहुंचे, लेकिन उन्हें गहरी निराशा हाथ लगी थी. फैन्स की भारी भीड़ और अव्यवस्था के बीच मेसी स्टेडियम में महज 10 मिनट ही मौजूद रहे. कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें तुरंत बाहर ले जाया गया. सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर रही कि मेसी ने स्टेडियम का चक्कर भी नहीं लगाया, जबकि फैन्स ने महंगे टिकट खरीदकर उनका इंतजार किया था.

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कार्यक्रम के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कमी देखने को मिली. इसी कारण आयोजन को जल्दी समाप्त करना पड़ा. घटना के बाद गुस्साए फैन्स ने स्टेडियम में हंगामा किया, बोतलें फेंकीं और होर्डिंग्स को नुकसान पहुंचाया. इस पूरे मामले के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया. विपक्ष ने राज्य सरकार पर कुप्रबंधन के आरोप लगाए. वहीं, मामले में आयोजक सताद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया. यह आयोजन फुटबॉल फैन्स के लिए खास माना जा रहा था, मगर अव्यवस्था के कारण निराशाजनक बन गया.

इस आयोजन की अव्यवस्था ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि को प्रभावित किया. इस अव्यवस्था को राज्य की राजनीति में बदलाव के संकेत के रूप में तभी से देखा जाने लगा. विपक्षी पार्टियों और आम जनमानस में ये धारणा बनी कि जब सरकार एक फुटबॉलर को सुरक्षा मुहैया नहीं कर सकती है, तो राज्य के करोड़ों लोगों की बात ही छोड़िए... इस घटना के बाद ममता बनर्जी के बाद सत्ता विरोधी लहर और ज्यादा बढ़ी और कुछ महीने बाद ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो गया.

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लियोनेल मेसी 2011 में भी कोलकाता आए थे. (Photo: ITG)

दिलचस्प बात यह है कि लियोनेल मेसी का इससे पिछला दौरा सितंबर 2011 में हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय से सत्ता में रही वाम मोर्चा सरकार को हटाकर सत्ता संभाली थी. तब इसी सॉल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना और वेनेजुएला के बीच एक अंतरराष्ट्रीय मैच खेला गया था, जिसमें मेसी भी मैदान पर उतरे थे. उस मुकाबले में मेसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निकोलस ओटामेंडी के गोल में अहम भूमिका निभाते हुए असिस्ट दिया था. यह मैच आज भी कोलकाता के फुटबॉल फैन्स के लिए यादगार पलों में गिना जाता है क्योंकि उन्होंने मेसी को लाइव खेलते हुए देखा था. 

कुल मिलाकर लियोनेल मेसी के दोनों दौरों को एक संयोग के रूप में देखा जा रहा है. जब 2011 में मेसी भारत आए थे, तो तृणमूल कांग्रेस का स्वर्णिम दौड़ शुरू हो चुका था, वहीं वाम दलों के हाशिए पर आने का आगाज हुआ था. अब मेसी के हालिया दौरे ने कहानी को फिर पलट दिया. जहां टीएमएसी सरकार के पतन की पटकथा लिखी गई, वहीं बंगाल में बीजेपी का युग शुरू हुआ. अब जब बंगाल की सत्ता बदल गई है, तो 'मेसी इफेक्ट' ट्रेंड करने लगा. भले ही यह महज संयोग हो, लेकिन इसने सियासी तस्वीर को एक नया और दिलचस्प आयाम जरूर दे दिया.

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