पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आसनसोल उत्तर सीट पर एक अनोखा राजनीतिक मामला सामने आया है. यहां एक ही नाम के तीन-तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर गए हैं, जिसने जनता को भी कंफ्यूज कर दिया है.
आसनसोल एसडीएम कार्यालय में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान एक के बाद एक ‘कृष्णेंदु’ नाम पुकारा जाने लगा.पहले कृष्णेंदु मुखोपाध्याय, फिर कृष्णेंदु चटर्जी और आखिर में बीजेपी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी. एक ही सीट पर एक नाम वाले तीन के उम्मीदवारों ने वहां मौजूद सभी लोगों को कुछ देर के लिए उलझन में डाल दिया.
मंगलवार को शीतला इलाके स्थित बीजेपी जिला कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस थी. इस दौरान यही मुद्दा छाया रहा. जिला बीजेपी अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य की मौजूदगी में आसनसोल उत्तर, दक्षिण, जामुड़िया, रानीगंज, कुल्टी और बाराबनी के बीजेपी प्रत्याशी मंच पर मौजूद थे.
बीजेपी प्रत्याशी का तंज- 'डर अच्छा लगा'
बीजेपी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने इस मामले पर चुटकी ली. उन्होंने बताया कि नामांकन के वक्त हम खुद कन्फ्यूज हो गए थे कि असली उम्मीदवार कौन है. लेकिन अच्छा हुआ- मुकाबला होना चाहिए. उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, 'लगता है ‘कृष्णेंदु’ नाम इतना फेमस हो गया है कि लोगों को यही नाम लेना पड़ रहा है. विरोधियों का डर साफ दिख रहा है, ये डर अच्छा लगा.'
'वोटर को कन्फ्यूज करने की साजिश'
कृष्णेंदु मुखर्जी ने इस पूरे मामले को साजिश करार देते हुए कहा कि ये विपक्ष की सोची-समझी साजिश है, ताकि मतदाताओं को गुमराह करके वोटों का बंटवारा किया जा सके. हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि आसनसोल उत्तर के मतदाता पूरी तरह जागरूक हैं. वो नाम नहीं, बल्कि पार्टी और चुनाव चिन्ह देखकर वोट देंगे.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की चुनावी राजनीति में ये कोई नई बात नहीं है. पहले भी कई जगहों पर प्रमुख उम्मीदवारों के नाम से मिलते-जुलते उम्मीदवार खड़े किए गए हैं, ताकि वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके.
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फिलहाल ‘तीन कृष्णेंदु’ का ये मामला आसनसोल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि ये सियासी दांव किस पर भारी पड़ता है और 4 तारीख को जनता किस ‘कृष्णेंदु’ पर भरोसा जताती है.