तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बन रहे माहौल के बीच, 'इंडिया टुडे' ने बुधवार को चेन्नई में 'राउंड टेबल तमिलनाडु 'का आयोजन किया है. 'द लीला पैलेस'होटल में हो रहे 'इंडिया टुडे राउंड टेबल तमिलनाडु' के मंच पर राजनीतिक हस्तियां शामिल हो रही हैं. इस मौके पर तमिलनाडु के आईटी और डिजिटल सर्विसेज मंत्री पलनिवेल थियागा राजन ने भी शिरकत की. उन्होंने इस दौरान NEP को लेकर भी बात की.
राज्य की लैंग्वेज पॉलिसी का किया बचाव
पलनिवेल थियागा राजन ने राज्य की लैंग्वेज पॉलिसी का बचाव किया. इस तरह उन्होंने केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी और कहा कि अगर वह चाहती है कि तमिलनाडु राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले पर अपना रुख बदले, तो पहले वे 'हमसे बेहतर करके दिखाए.'
तीन-भाषा फॉर्मूले पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीएमके सरकार हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं है, बल्कि नीति के जरिए उसकी कथित थोपने की कोशिश के खिलाफ है. उन्होंने कहा, 'हम हिंदी थोपे जाने के खिलाफ हैं, हिंदी के खिलाफ नहीं. हम NEET के भी विरोधी हैं, और इस बात के भी कि कोई हमें बताए कि हमारे बच्चों को छांटने या चुनने के लिए कौन-सी परीक्षा होनी चाहिए. वे बच्चे जो हमारे कॉलेजों में पढ़ते हैं, जिन्हें हमारे पैसे से चलाया जाता है, और जो देश की सबसे बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था वाले राज्य का हिस्सा हैं.'
'हम क्यों बदलें अपने तरीके, अगर उनसे मिल रहा है लाभ'
उन्होंने आगे कहा, 'हमें यह पसंद नहीं कि कोई हमें कहे कि आप खुद को नीचे गिराइए या हमसे कमजोर मॉडल अपनाइए क्योंकि किसी ‘ईश्वर’ या ‘तानाशाह’ ने ऐसा कहा है. अगर हम अपने तरीके बदलने पर विचार भी करें, तो उन्हें हमसे बेहतर करके दिखाना होगा. उन्होंने ऐसा क्या बेहतर किया है कि हम उनकी बात सुनें?'
बता दें कि तमिलनाडु लगातार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले का विरोध करता रहा है. राज्य का तर्क है कि यह व्यवस्था गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर असमान बोझ डालती है. डीएमके का कहना है कि उसकी दो-भाषा नीति 'तमिल और अंग्रेजी' छात्रों के लिए फिट बैठती है. यह राज्य की शैक्षिक व सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के अनुसार ही है.
उन्होंने कहा, 'जो हिंदी बोलना चाहता है, वह बोले. लेकिन मैं यह नहीं मानूंगा कि आप मुझे निर्देश दें कि मैं अपने सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में तीन भाषाएं जोड़ूं और अपने लोगों के सीखने के अनुभव को कमजोर कर दूं, जबकि इससे मुझे कोई खास फायदा नहीं होने वाला है. हमें उनके मुताबिक क्यों ढलना चाहिए? हमारे लिए यह तीन भाषाएं हो जाएंगी, जबकि हिंदी पट्टी के लिए यह प्रभावी रूप से एक भाषा है और हमारे लिए दो.'
'द्रविड़ मॉडल 2.0' को बताया गुजरात मॉडल का विकल्प
मंत्री ने तथाकथित 'द्रविड़ मॉडल 2.0' का भी जोरदार बचाव किया और इसे 'गुजरात मॉडल' के विकल्प के रूप में पेश करते हुए कहा कि भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस विकास मॉडल को अपनाता है.
उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि डीएमके सरकार चुनाव से पहले केवल एंटी-इन्कंबेंसी से जूझ रही है. इसके बजाय उन्होंने पार्टी की शासन शैली को एक सदी पुराने सामाजिक न्याय ढांचे के विकास के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा, 'द्रविड़ मॉडल 2.0 के केंद्र में समावेशन की अवधारणा है.' उन्होंने सामाजिक समानता, शिक्षा तक पहुंच, आरक्षण नीतियां और समान अवसर जैसे स्तंभों का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमने सामाजिक संरचना न्याय, शिक्षा और अवसर पर 100 साल पहले काम शुरू किया. वही आधार आर्थिक विकास को आगे बढ़ाता है.'
आईटी मंत्री ने 'कथित गुजरात मॉडल' की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए और याद दिलाया कि उन्होंने 2018 में भी सार्वजनिक रूप से इसकी आलोचना की थी.
शासन के विभिन्न मॉडलों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि “मॉडल” को लेकर बहस दरअसल गहरे वैचारिक मतभेदों का संकेत है.
उन्होंने कहा, “दक्षिण का भविष्य उज्ज्वल है. देश के बाकी हिस्से का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि वे द्रविड़ मॉडल, दक्षिण मॉडल या तमिलनाडु मॉडल को किस हद तक अपनाते हैं. हमारा भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि हमारे पास एक अच्छा मॉडल है.'