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रायबरेली को राहुल के दो गिफ्ट, कांग्रेस का 'मिशन यूपी'... आत्मनिर्भर बनने का ये है प्लान

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दी है. राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर है तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इन दिनों संभावित उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है. इतना ही नहीं कांग्रेस का फोकस दलित-मुस्लिम और ब्राह्मण बहुल सीटों पर है.

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राहुल गांधी रायबरेली से उत्तर प्रदेश की नब्ज टटोलेंगे (Photo-INC)
राहुल गांधी रायबरेली से उत्तर प्रदेश की नब्ज टटोलेंगे (Photo-INC)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं. इस दौरान अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को साथ सिर्फ बैठक ही नहीं करेंगे बल्कि सूबे के सियासी नब्ज को टटोलने का भी काम करेंगे. राहुल गांधी के इस दौरे को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में है, लेकिन कांग्रेस ने अभी से सियासी एक्सरसाइज शुरू कर दी है. रायबरेली और अमेठी के दो दिवसीय दौरे पर राहुल गांधी जनता दर्शन और बैठकों से कांग्रेस की चुनावी रणनीति को भी धार देंगे.  इस दौरान वो पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात, महिलाओं से संवाद और संविधान पर चर्चा के साथ खीरो में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे.

वहीं, कांग्रेस ने बिहार चुनाव से सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश में काम देख रहे राष्ट्रीय सचिव को अभी से ही विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची बनाने का टास्क सौंपा है ताकि सपा से साथ सीटों की बार्निंग कर सके. इस तरह यूपी में कांग्रेस समय रहते हुए अपनी रणनीति को धार देने और आत्मनिर्भर बनने की कवायद में जुट गई है. 

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राहुल गांधी का यूपी दौरा कितना अहम? 
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस को छह सीटों पर मिली जीत ने दोबारा से पार्टी के उभरने की उम्मीद जागी है. कांग्रेस यूपी में साढ़े तीन दशक से भी ज्यादा समय से सत्ता का वनवास झेल रही है. 2019 में राहुल गांधी को अमेठी में  हार का मुंह तक देखना पड़ा था, जिसके चलते ही 2024 के चुनाव में राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की रायबरेली सीट को अपनी कर्मभूमि बनाया. 

राहुल ने वायनाड सीट को छोड़कर रायबरेली को अपने पास रखा है ताकि यूपी की सियासत में कांग्रेस को दोबारा से सियासी संजीवनी मिल सके. राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के जरिए यूपी को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. राहुल गांधी मंगलवार और बुधवार को रायबरेली में रहेंगे तो बुधवार दोपहर बाद अमेठी में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे. 

रायबरेली को राहुल देंगे दो सौगात
राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र से कार्यकर्ताओं से मुलाकात, महिलाओं से संवाद और संविधान पर चर्चा के साथ खीरो में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद लालगंज में 'महिला संवाद' कार्यक्रम में शिरकत करेंगे और सौगात देंगे. राहुल गांधी रायबरेली के बछरावां में बारातघर तो रायबरेली शहर में एक सड़क का उद्घाटन करेंगे.

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रायबरेली पहुंच कर राहुल गांधी बछरावां विधानसभा के मौहारी गांव में बारातघर की सौगात देंगे. बारातघर की मांग बीते कई सालों से क्षेत्र के लोग कर रहे थे जिसको लेकर लोगों ने अपने सांसद से भी गुहार लगाई थी. राहुल गांधी ने अपनी सांसद निधि से बारातघर बनवाया है.  इससे आसपास के गांव को लाभ मिलेगा. कसरावां, मल्लेपुर , गणेशपुर सहित आधे दर्जन गांवों के करीब 15000 परिवार फायदा उठा सकेंगे. 

रायबरेली शहर के वार्ड नंबर 14 के पहलवान पीर बाबा गोराबाजार पीएसी गेट के सामने से बनी डामर रोड का उद्घाटन करेंगे. नगर पालिका के ईओ स्वर्ण सिंह ने बताया की करीब 80 लाख की लागत से 500 मीटर डामर रोड का  उद्घाटन करेंगे.  अभी तक इस इलाके में रहने वाले लोगों को बारिश के मौसम में कच्ची सड़क होने के चलते  काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में मोहल्ले के लोगों ने राहुल गांधी के कैंप कार्यालय से सड़क बनवाने की मांग की थी , इस सड़क का निर्माण नगर पालिका रायबरेली ने किया है.

राहुल अपने दुर्ग को दुरुस्त करने में जुटे

रायबरेली में राहुल गांधी एक्टिव होकर 2027 के यूपी चुनाव के सियासी माहौल को कांग्रेस के पक्ष में बनाने की रणनीति है. ऐसे में राहुल गांधी अब अमेठी जैसी गलती रायबरेली क्षेत्र में नहीं दोहराना चाहते हैं. रायबरेली को वो अपने किसी मैनेजर के भरोसे पर नहीं छोड़ना चाहते हैं बल्कि खुद क्षेत्र का दौरा करके अपनी उपस्थिति को बनाए रखने की स्टैटेजी है.

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रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती है, जिसमें से एक भी सीट पर कांग्रेस के विधायक नहीं है. 2017 में रायबरेली में कांग्रेस के 2 विधायक जीते थे और दोनों ही बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. ऐसे ही बछरावां विधानसभा में कांग्रेस का आखिरी विधायक 2007 से 20012 तक राजाराम त्यागी थे, जो फिलहाल भाजपा में हैं. ऐसे में राहुल के बछरावां में विकास की सौगात देने से विधानसभा चुनावों में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा, जिसका लाभ मिल सकता है.

बछरावां से राहुल गांधी के करीबी सुशील पासी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. रायबरेली के बहाने राहुल गांधी यूपी पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से सूबे में अपनी खोई जमीन तलाश रही है और 2024 के नतीजों ने 2027 के लिए उम्मीद की किरण जगा दी है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का मिशन-2027
कांग्रेस नेतृत्व उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सतर्क है, उसे लगता है कि 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभव उसके लिए महंगे साबित हुए थे. बिहार चुनावों में सीट-बंटवारे की बातचीत में हुई देरी और 'INDIA' गठबंधन के सहयोगियों के बीच हुई 'फ्रेंडली फाइट' से हार का मूंह देखना पड़ा है. इसीलिए यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने राज्य में पार्टी के सभी सचिव से उम्मीदवारों की सूचियां बनाने के लिए कहा है.

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यूपी में अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी देख रहे राष्ट्रीय सचिव पहले सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बनाएंगे. इसके बाद दूसरी सूची में 100-120 ऐसी सीटों की पहचान कर उम्मीदवार के नाम फाइनल किए जाएंगे ताकि सपा के साथ सीट बंटवारे के समय सीट के साथ संभावित उम्मीदवार के नाम भी रखे जा सकें. कांग्रेस की कोशिश है कि यूपी के हर जिले से एक से दो सीट पर चुनाव लड़ने की है. 

उत्तर प्रदेश में एक जोन की जिम्मेदारी देख रहे राष्ट्रीय सचिव ने बनाया है कि चुनाव लड़ने वाले नेताओं से बातचीत शुरू हो गई है. चुनाव लड़ने के इच्छुक जिन नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं, हम विधानसभा क्षेत्रों का उनके बारे में फीडबैक भी ले रहे हैं. विधानसभा वाइज मजबूत उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं ताकि 2027 में मजबूती से चुनाव लड़ सके. इसके अलावा सीट जिन सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ना चाहती है, उसके जातीय और सामाजिक समीकरण का भी आकलन कर रही है. 

सपा के साथ कांग्रेस की सीट बार्गेनिंग
2024 में सपा के साथ कांग्रेस की बनी केमिस्ट्री हिट रही है. कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 6 लोकसभा सीटें जीती थी और 5 सीटों पर उसे मामूली वोटों से हार का मूंह देखना पड़ा. ऐसे में कांग्रेस और सपा मिलकर 2027 के चुनाव लड़ने का मन बनाया है. अखिलेश यादव भी कह चुके हैं कि कांग्रेस के संग उनका गठबंधन फाइनल है और सीट बंटवारे की बात हो जाएगी. ऐसे में कांग्रेस ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है ताकि सपा के साथ सीट बंटवारे के समय अपनी बात को मजबूती से रख सके. 

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उत्तर प्रदेश की 100 से 120 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार तलाश रही है, उसकी कोशिश भी फिलहाल इन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ने की है. सपा के साथ टेबल पर 120 सीटों की मांग रखेगी, लेकिन उसका फाइनल लक्ष्य कम से कम 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का है. कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि 2024 में 17 लोकसभा सीटें हमें लड़ने के लिए मिली थी, उस लिहाज से 80 विधानसभा सीटें मिलनी तय है, लेकिन कोशिश 100 सीटों की है. 

मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित केमिस्ट्री बनाने का दांव
कांग्रेस चाहती है कि 2027 में उन सीटों पर वो चुनाव लड़े, जहां सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में न हों. यूपी कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि हमारा इरादा और रणनीति मुस्लिम-दलित-ब्राह्मण समीकरण वाली सीटों पर चुनाव लड़ने की है. इसीलिए हमारा पूरा फोकस मुसलमानों, दलितों और ब्राह्मणों पर विशेष रूप से है.

कांग्रेस ने मुस्लिमों के साथ ब्राह्मण वोटों को साधने में लगी है. यही वजह है कि सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज को लेकर टिप्पणी की तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सबसे पहले विरोध किया. अजय राय ने कहा कि राजकुमार भाटी को पार्टी से बाहर करना चाहिए. इसके अलावा कांग्रेस की रणनीति है कि ब्राह्मणों तक पहुंच बनाने की यह कवायद में आदित्यनाथ सरकार द्वारा कथित तौर पर ठाकुर समुदाय को दी जा रही तरजीह को लेकर इस समुदाय में पनप रही असंतोष की भावना को कैस कराया जाए. 

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कांग्रेस की रणनीति सामाजिक न्याय के मुद्दे पर दलित वोटों को जोड़ने की है. यूपी में मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित वोटर काफी महत्वपूर्ण हैं, जो कांग्रेस का लंबे समय तक वोटबैंक रहा है. उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदीहै, जबकि ब्राह्मणों की आबादी 8-10 फीसदी है. इसी तरह राज्य की कुल आबादी में दलित समुदाय 22 फीसदी है. 

2024 में दलितों के समर्थन से इस गठबंधन को काफी फायदा पहुंचाया था. इसके अलावा मुसलमान भी कांग्रेस के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग बने हुए . इस तरह दलित-मुस्लिम और ब्राह्मण केमिस्ट्री को बनाकर कांग्रेस 2027 में अहम रोल अदा करना चाहती है. सपा के साथ मिलकर बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का टारगेट बना रखा है, लेकिन देखना है कि ये फॉर्मूला हिट होता है कि नहीं? 

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