अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक फैले पुडुचेरी के सियासी मिजाज को समझने में बड़े से बड़े राजनीतिक पंडित चकरा गए हैं. पुडुचेरी भले ही एक छोटा और केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन सियासी अहमियत किसी भी अन्य राज्य से कम नहीं है. पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए 30 सीटों पर एक साथ गुरुवार को मतदान है.
दक्षिण के पुडुचेरी विधानसभा की 30 सीटों के लिए 294 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए सत्ता में वापसी की आस लगाए हैं तो विपक्षी गठबंधन एक बार फिर से अपनी वापसी के लिए बेताब है.
पुडुचेरी के पापा कहे जाने वाले मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी के लिए अस्तित्व की लड़ाई तो कांग्रेस अपनी वापसी के लिए हर दांव चला है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी रंगास्वामी के साथ मिलकर सत्ता बचाए रख पाती है या फिर कांग्रेस फिर करेगा वापसी?
पुडुचेरी में कौन कितने सीट पर लड़ रहा चुनाव
पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर एनडीए में रंगास्वामी की ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस 16 सीट पर उम्मीदवार उतार रखी है तो बीजेपी 10 सीट पर चुनाव लड़ रही. इसके अलावा AIADMK दो और दो सीट पर एलजेके चुनाव लड़ रही है.
वहीं, विपक्ष की तरफ से देखें तो कांग्रेस 21 सीट पर किस्मत आजमा रही है तो उसकी सहयोगी डीएमके 13 सीट पर उम्मीदवार उतार रखा है. तकरीबन छह सीटों पर दोनों के बीच फ्रेंडली फाइट है. इसके अलावा 117 उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में है, जिसकी भी दल का खेल बना और बिगाड़ सकते हैं. एक्टर विजय की पार्टी टीवीके 28 सीट पर चुनाव लड़ रही है.
पुडुचेरी की 30 सीट पर 294 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 9.44 लाख मतदाता तय करेंगे. राज्य में करीब पांच लाख महिला और 4 लाख 43 हजार से अधिक पुरुष वोटर्स हैं.
रंगास्वामी के भरोसे बीजेपी तो कांग्रेस को आस
प्रदेश में बीजेपी पुडुचेरी का चुनाव मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी के नाम पर लड़ रही है. रंगास्वामी को 'पुडुचेरी के पापा' कहा जाता है. यह चुनाव उनकी सियासी साख का सवाल बनी हुई. 16 सीटों पर लड़ रही उनकी पार्टी AINRC और 10 सीटों पर लड़ रही बीजेपी के सामने सत्ता विरोधी लहर को मात देने की चुनौती है. रंगास्वामी के लिए यह चुनाव साबित करेगा कि क्या उनका 'मददगार' वाला अंदाज़ आज भी जनता के सिर चढ़कर बोलता है.
2021 में सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस (16 सीटें) और DMK (13 सीटें) इस बार एकजुट होकर सत्ता में वापसी की राह देख रहे हैं. पूर्व सीएम वी. वैथिलिंगम की साख दांव पर है. कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है, क्योंकि एक और हार संगठन को पूरी तरह हाशिए पर धकेल सकती है. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी भी किंगमेकर बनने की उम्मीद से उथरी है. पुडुचेरी के चुनाव को विजय त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं.
पुडुचेरी में सबसे बड़ी सियासी जंग थट्टानचावडी सीट पर है, जहां मौजूदा सीएम एन रंगास्वामी का सीधा मुकाबला कांग्रेस के कद्दावर नेता वी वैथिलिंगम से है. यह केवल एक सीट नहीं, बल्कि पुडुचेरी की सत्ता का केंद्र है.
छोटे राज्य क्या करेगा बड़ा सियासी धमाल
पुडुचेरी को 1962 में केंद्र शासित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद कई दशकों तक उसकी राजनीति को उसके पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की राजनीति की नकल माना जाता रहा. विधानसभा सीट के लिहाज से देश का सबसे छोटा राज्य भले ही पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में चर्चा का विषय न हो, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद अहम है। इसके परिणाम बड़े राजनीतिक संकेत देने वाले होंगे.
पुडुचेरी का यह चुनाव तय करेगा कि क्या सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी पकड़ बनाए रखता है या विपक्ष एकजुट होकर सत्ता में वापसी कर पाता है, जहां यह चुनाव कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है, वहीं राजग के लिए दक्षिण में विस्तार का अवसर भी है. यहां के इतिहास इसे देश के अन्य राज्यों से अलग बनाता है.
पुडुचेरी के चारों जिले अलग-अलग मिजाज
पुडुचेरी की एक अनोखी विशेषता यह भी है कि इसके चार जिले पुडुचेरी और कराईकल (तमिलनाडु), यानम (आंध्र प्रदेश) और माहे (केरल) भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं. इसकी बिखरी हुई भौगोलिक संरचना प्रशासन और राजनीति दोनों को विशिष्ट बनाती है.
पुडुचेरी की राजनीतिक परिदृश्य की बात करें, तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने यहां की एक मात्र सीट जीतकर अपनी मौजूदगी मजबूत दिखाई,जहां वी वैथिलिंगम सांसद बने. वहीं, बीजेपी के ए नमस्सिवयम दूसरे स्थान पर रहे. 2021 के विधानसभा चुनाव में आल इंडिया एनआर कांग्रेस के नेतृत्व में एनडीए ने 30 में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, इस गठबंधन के नेता एन रंगासामी चौथी बार मुख्यमंत्री बने.
वहीं, एन रंगासामी पुडुचेरी की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं, उन्होंने वर्ष 2011 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और तब से स्थिर नेतृत्व का विकल्प बने हुए हैं. वे पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग भी लगातार उठाते रहे हैं. विपक्ष की ओर से वी नारायणसामी के नेतृत्व में इंडिया ब्लाक चुनौती पेश कर रहा है, जिसमें कांग्रेस,डीएमके, सीपीआइ, सीपीआइ (एम) और वीसीके जैसे दल शामिल हैं.