scorecardresearch
 

बाबुल, राजीव, मेनका... राज्यसभा के लिए ये 4 नाम फाइनल, बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्यों लगा रहीं इन पर दांव?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार नाम घोषित किए हैं. इन नामों के जरिए TMC अपनी संख्या बढ़ाकर 17 करने की तैयारी में है. सूची में बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गोस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक शामिल हैं. इसे सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

Advertisement
X
बंगाल से दिल्ली तक संदेश - TMC ने वर्ग, लिंग और पहचान का समीकरण साधा (Photo: PTI)
बंगाल से दिल्ली तक संदेश - TMC ने वर्ग, लिंग और पहचान का समीकरण साधा (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता ममता बनर्जी ने राज्यसभा चुनावों के लिए चार प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं: डॉ. बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गोस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक. TMC राज्यसभा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने जा रही है. लेकिन सवाल यह उठता है कि ममता दीदी ने इन्हें क्यों चुना? क्या ये केवल राज्यसभा सदस्य बनकर पार्टी के लिए वोट बढ़ाने का साधन हैं, या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति है?

राजनीति में राज्यसभा की सीटें बहुत मायने रखती हैं क्योंकि ये छह साल के लंबे कार्यकाल के साथ आती हैं और केंद्र में अधिक प्रभाव जमाने का जरिया बनती हैं. वर्तमान में TMC के पास राज्यसभा में 13 सीटें हैं, और इन चार नई सीटों के मिलने से उनकी संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी, जिससे पार्टी की राजनीतिक ताकत और बढ़ेगी.

ममता बनर्जी ने चुनावी रणनीति के तहत सभी नामों को अलग-अलग क्षेत्र, वर्ग और पहचान से जोड़ा है. डॉ. बाबुल सुप्रियो, जोकि पूर्व भाजपा नेता रह चुके हैं, को शामिल कर ममता ने न केवल विधानसभा सीटें मजबूत की हैं, बल्कि भाजपा के कुछ कट्टरकारों को भी अपनी पार्टी में लाकर उन्हें बांधने की कोशिश की है. राजीव कुमार और मेनका गोस्वामी जैसे नाम पार्टी के अनुभवी और संतुलित चेहरों को दर्शाते हैं, जबकि कोयल मल्लिक जैसे युवा और लोकप्रिय चेहरे से पार्टी को नयी ऊर्जा और पहचान मिलेगी.

Advertisement

बाबुल सुप्रियो: हिंदू वोटरों का ब्रिज?

सबसे चर्चित नाम है बाबुल सुप्रियो का. पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के जाने-माने कलाकार बाबुल सुप्रियो ने 2021 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थामा. इससे पहले वे भाजपा के वे प्रमुख चेहरों में से एक थे, लेकिन 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आसीमांदिनी से चुनाव हार गए. इसके बाद भी ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा में भेजने का फैसला किया, जो एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया.

बाबुल सुप्रियो की जड़ें गहरा हिंदू चेहरे से जुड़ी हैं. वे मशहूर भोजपुरी गायक और राम भक्त के तौर पर जाने जाते हैं. भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के खिलाफ TMC को एक ऐसा मजबूत हिंदू चेहरा चाहिए था जो बंगाल की लगभग 70 फीसदी हिंदू आबादी को आकर्षित कर सके. 2021 के चुनाव में TMC ने हिंदू वोटों का बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में लिया था, और बाबुल जैसे चेहरों की मौजूदगी से पार्टी को 'हिंदू-विरोधी' टैग से निजात पाने में मदद मिलेगी.

यह भी पढ़ें: ग्लैमर से संसद तक, कौन हैं कोयल मल्लिक... ममता ने दिया राज्यसभा का टिकट

बाबुल सुप्रियो का केंद्र में मोदी सरकार के दौरान मंत्री रहना उनकी राजनीतिक पकड़ का बड़ा फायदा है. दिल्ली के संसदीय गलियारों में उनके कनेक्शन बंगाल के महत्वपूर्ण मुद्दों - जैसे बाढ़ नियंत्रण, औद्योगिक विकास और रोजगार को प्रभावी ढंग से उठाने में सहायक होंगे. हालांकि, बाबुल के खिलाफ TMC कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोप भी लग चुके हैं, जिससे कुछ विवाद भी पैदा हुए हैं.

Advertisement

ममता बनर्जी इस जोखिम को इसलिए उठा रही हैं क्योंकि बाबुल की लोकप्रियता युवा वर्ग और बॉलीवुड जगत में उनकी कनेक्शन TMC के विस्तार में मदद करेंगे. 

राजीव कुमार: बंगाली बुद्धिजीवी का प्रतीक

राजीव कुमार एक पूर्व IPS अधिकारी हैं, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं. वे TMC के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हैं और पार्टी के संगठनात्मक कामों को संभालने में अहम भूमिका निभाते हैं. ममता बनर्जी द्वारा उन्हें राज्यसभा भेजना एक तरह का ‘लॉयलिस्ट रिवार्ड’ माना जाता है, लेकिन इससे भी ज्यादा राजीव बंगाली बुद्धिजीवियों और पढ़े-लिखे वर्ग के बीच लोकप्रिय हैं. उनकी सॉफ्ट इमेज और समझदारी उन्हें समाज में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाती है.

हाल ही में, ईडी के सर्च एंड सीज ऑपरेशन्स की वजह से राजीव कुमार फिर से सुर्खियों में आए. जनवरी 2026 में कोलकाता में I-PAC (TMC की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म) के कथित अवैध कोयला घोटाले की जांच के दौरान ईडी टीम पर हमले हुए. आरोप लगा कि राजीव कुमार ने TMC कार्यकर्ताओं को भेजकर ईडी अधिकारियों को घेरा. कोलकाता के लॉरेंस रोड समेत कई जगह पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई, जो केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की मिसाल बनी. भाजपा ने इस घटना को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ बताया, जबकि TMC ने इसे ‘केंद्रीय दादागिरी’ करार दिया.

Advertisement

कौन हैं बंगाल के नए DGP राजीव कुमार? जिनके लिए ममता बनर्जी धरने तक पर बैठ  गई थीं - Who is ips rajiv kumar new dgp of west bengal mamta banerjee tmc -

राजीव कुमार का पुलिस बैकग्राउंड इस विवाद में और भी अहम हो जाता है, क्योंकि वे CBI और अन्य केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों के खिलाफ TMC की सुनियोजित पैरवी करते हैं. राज्यसभा सदस्य के रूप में वे बंगाल के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की बेहतरी पर जोर देंगे और केंद्र की एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाएंगे. बंगाल की राजनीति में बुद्धिजीवी वोट बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण है, और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले TMC को इस खेमे को मजबूत करना है. राजीव कुमार जैसे चेहरे से पार्टी को ‘बंगाली प्राइड’ का संदेश भी मिलेगा.

मेनका गोस्वामी: महिला सशक्तिकरण का चेहरा

मेनका गोस्वामी TMC की जादवपुर से विधायक हैं, जो सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ महिला अधिकारों की कट्टर समर्थक भी हैं. ममता बनर्जी की ‘महिला पावर’ रणनीति के तहत मेनका को राज्यसभा भेजा जाना पार्टी की महिलाओं को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. 

2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 40 से अधिक महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो यह दर्शाता है कि पार्टी महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा दे रही है. मेनका जैसे चेहरे TMC को नारीवादी इमेज दिलाने में मददगार साबित होंगे.

पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं का वोट बैंक काफी बड़ा है. मेनका गोस्वामी इन समुदायों से जुड़ी हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव और भी बढ़ता है. राज्यसभा पहुंचकर वे महिला आरक्षण बिल, घरेलू हिंसा, और महिलाओं के खिलाफ अन्य सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाने वाली हैं. उनका यह लड़ाईबाजी महिलाओं की आवाज को संसद में मजबूती से पेश करेगी.

Advertisement

कोयल मल्लिक: सिल्वर स्क्रीन से सियासत की एंट्री

बॉलीवुड और बंगाल फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने ‘हंसी तो फंसी’ जैसी फिल्मों से अपनी खास पहचान बनाई है. बंगाल की बंगाली सिनेमा इंडस्ट्री से उनका गहरा कनेक्शन है, जो उन्हें टॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों इंडस्ट्री में एक खास जगह देता है. उनकी ग्लैमरस लेकिन सादगी भरी छवि उन्हें दर्शकों के बीच और भी लोकप्रिय बनाती है.

यह भी पढ़ें: बंगाल: भवानीपुर में CM ममता ने किया जैन मान स्तंभ और संत कुटिया गेट का किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोयल मल्लिक को राज्यसभा भेजकर एक स्मार्ट राजनीतिक चाल चलने की कोशिश की है. यह दांव युवा और सिनेमा प्रेमी वोटर्स को खासतौर से टारगेट करने के उद्देश्य से है. बंगाल में टॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों की मजबूत फैन बेस मौजूद है, जो कोयल की स्टार पावर का पूरा फायदा उठा सकता है. वे न केवल राजनीतिक रैलियों में बड़ी भीड़ जुटा सकेंगी, बल्कि सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी आवाज भी प्रभावी ढंग से उठा सकेंगी.

ग्लैमर से संसद तक, कौन हैं कोयल मल्लिक... ममता ने दिया राज्यसभा का टिकट -  News AajTak

हालांकि, इस कदम पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या एक्ट्रेस को राज्यसभा के लिए पर्याप्त योग्यता प्राप्त है या नहीं. ममता बनर्जी को पहले भी ऐसे आरोपों का सामना करना पड़ा है, जैसे कि सोवन चटर्जी को राज्यसभा भेजने पर चर्चा हुई थी. बावजूद इसके, यह रणनीति युवा वोटर वर्ग को लुभाने का एक अहम जरिया सिद्ध हो सकती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement