पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के पीछे वोट प्रतिशत में आई भारी बढ़ोतरी को अहम कारण माना जा रहा है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी का वोट शेयर करीब 7.8 प्रतिशत बढ़कर 45.84 फीसदी पहुंच गया, जो 2021 में लगभग 38 फीसदी था. इस बढ़त ने पार्टी को 77 सीटों से सीधे 207 सीटों तक पहुंचा दिया.
वहीं तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है. उसका वोट शेयर 48.02 फीसदी से घटकर करीब 40.8 फीसदी रह गया, जिससे उसकी सीटें 215 से घटकर करीब 80 रह गईं.
विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की इस बड़ी छलांग के पीछे हिंदू वोटों का मजबूत ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यक वोटों में बंटवारा अहम रहा. उनका कहना है कि मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा टीएमसी से दूर होकर अन्य क्षेत्रीय दलों की ओर गया, जिससे बीजेपी को अप्रत्यक्ष फायदा मिला.
85 से 95 फीसदी मतदान, बीजेपी ने 172 सीटें
आंकड़े बताते हैं कि जिन सीटों पर 85 से 95 फीसदी मतदान हुआ, वहां बीजेपी ने 172 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को सिर्फ 45 सीटें मिलीं. वहीं 95 फीसदी से ज्यादा मतदान वाले क्षेत्रों में टीएमसी को 37 और बीजेपी को 28 सीटें मिलीं. इस बार राज्य में औसतन 92.47 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद सबसे ज्यादा बताया जा रहा है.
TMC की हार के पीछे ये भी वजह
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव विश्लेषक शुभमोय मैत्रा ने कहा, बहुसंख्यक वोटों का एकजुट होना और अल्पसंख्यक वोटों का विभाजन इस नतीजे की बड़ी वजह बना. उन्होंने कहा कि टीएमसी के खिलाफ नाराजगी के चलते कुछ अल्पसंख्यक मतदाताओं ने अन्य विकल्पों को चुना, जिससे बीजेपी को बढ़त मिली.
कुछ मुस्लिम बहुल सीटों जैसे करंदीघी और कालीगंज में भी दिलचस्प नतीजे देखने को मिले, जहां मुकाबले में तीसरे दलों को मिले वोटों ने समीकरण बदल दिए.
40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीटें जीतने का दावा
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि पार्टी ने 40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली 12 सीटें भी जीतीं, जिनमें से चार सीटों पर मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से अधिक थी. कुल मिलाकर, आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस बार का जनादेश सिर्फ एकतरफा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव का नतीजा है.