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Beat Report: कॉन्फिडेंट ममता बनर्जी, 'बंगाल की बेटी' का बदला लेने को आतुर जनता... नामांकन रैली से आंखों देखा हाल

कोलकाता के भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नामांकन के दौरान जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में समर्थक, खासकर महिलाएं, सड़कों पर उतरीं. दीदी ने पैदल चलकर जनता से जुड़ाव दिखाया. चुनाव इस बार व्यक्तिगत भी माना जा रहा है, जहां उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से है.

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ममता बनर्जी के नामांकन में भारी भीड़ नजर आई (Photo- ITG)
ममता बनर्जी के नामांकन में भारी भीड़ नजर आई (Photo- ITG)

दक्षिण कोलकाता की हरिश चटर्जी स्ट्रीट आज बुधवार को पूरी तरह हरे-सफेद रंग में रंग गई. मौका था पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भवानीपुर सीट से नामांकन का. 'दीदी' का नामांकन पहले भी देखा है, लेकिन इस बार माहौल थोड़ा अलग और ज्यादा जोशीला लगा. खासतौर पर महिलाओं की भारी भीड़ ने सबका ध्यान खींचा.

मैं सुबह 10:00 बजे मुख्यमंत्री के आवास के बाहर पहुंचा. शुरुआत में भीड़ बिखरी हुई लग रही थी और सुरक्षा बलों की संख्या ज्यादा थी. लेकिन जैसे-जैसे 10:30 बजे ममता बनर्जी के निकलने का समय करीब आया, भीड़ का स्वरूप तेजी से बदल गया. कुछ ही देर में हजारों लोग हाजरा रोड पर जमा हो गए. चारों ओर तृणमूल कांग्रेस के 2026 के नारे गूंज रहे थे- 'जितना भी करो हमला, फिर जीतेगा बंगाल'.

10:44 बजे ममता बनर्जी अपने आवास से बाहर निकलीं. करीब 200 मीटर की दूरी के लिए उन्होंने गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि पैदल चलकर जनता के बीच पहुंचीं. कड़ी सुरक्षा के बावजूद मुख्यमंत्री ने चिलचिलाती धूप में खड़े समर्थकों के लिए बार-बार सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर लोगों से मिलने के लिए आगे बढ़ती रहीं.

पिछले करीब एक दशक से उनके नामांकन को कवर करते हुए मुझे इस बार की ऊर्जा अलग महसूस हुई. यह सिर्फ एक सामान्य नामांकन प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक मजबूत संदेश था. सीएम ममता सुबह 10:55 बजे नामांकन केंद्र पहुंचीं और औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद सुबह 11:16 बजे बाहर निकलीं, जहां इंतजार कर रही भीड़ ने जोरदार नारों के साथ उनका स्वागत किया.

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इस चुनाव की पृष्ठभूमि बेहद व्यक्तिगत मानी जा रही है. उनके सामने हैं बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी मैदान में हैं, जो कभी उनके करीबी सहयोगी थे और अब सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. 2021 में नंदीग्राम में मिली करीबी हार के बाद 2026 की यह लड़ाई अब उनके गढ़ भवानीपुर में लड़ी जा रही है. भीड़ में मौजूद तमाम समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है, यह उस आदमी से बदला लेने की मुहिम है जिसने 'बंगाल की बेटी' को चुनौती दी थी.

आजतक से बातचीत में मुख्यमंत्री के छोटे भाई स्वपन (बाबुन) बनर्जी ने इस चुनौती को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, 'हर चुनाव की तरह, इस साल का नतीजा भी अलग नहीं होगा. यह बस समय की बात है. शुभेंदु का भवानीपुर में जीतने का कोई चांस नहीं है.'

इस रोड शो की भव्यता के पीछे एक विवाद भी सुलग रहा है. वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है, जिसमें टीएमसी ने वोटर्स को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी ने खुले तौर पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि उनके वोटरों के नाम हटाने की साजिश रची गई है. वहीं विपक्षी पार्टी यानी बीजेपी का मानना ​​है कि SIR से जो राजनीतिक गणित बनेगा, वह इस ऐतिहासिक रूप से कड़े शहरी मुकाबले का पासा पलट सकता है.

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आसान नहीं है राह

हालांकि आज की भारी भीड़ भले ही मजबूती का संकेत दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है. भवानीपुर का माहौल पूरी तरह एकतरफा नहीं है. पिछले कुछ हफ्तों में मैंने कई बार भवानीपुर का दौरा किया. इससे यह मालूम चला कि बंगाल की राजनीति का केंद्र अब बंटा हुआ है.

जिन महिला समर्थकों से मैंने बात की, वे न सिर्फ जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थीं, बल्कि जीत के अंतर पर भी बहस कर रही थीं. वहीं, BJP का घर-घर जाकर चलाया जा रहा आक्रामक अभियान, जो उन वोटरों को निशाना बना रहा है जिनके नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

आज के शक्ति प्रदर्शन से एक बात तो साफ हो गई है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराना अब भी एक बहुत मुश्किल काम है, लेकिन नंदीग्राम की यादों के साए में इस बार कोई भी पक्ष जोखिम लेने को तैयार नहीं है.

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