scorecardresearch
 

तमिलनाडु में चुनावी मैदान से बाहर रख अन्नामलाई को बीजेपी ने बनाया 'फ्लोटिंग एसेट'

तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.

Advertisement
X
अन्नामलाई ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि उनका नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं होगा (File Photo- ITG)
अन्नामलाई ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि उनका नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं होगा (File Photo- ITG)

तमिलनाडु के लिए BJP उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने से ठीक 24 घंटे पहले पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बड़ा संकेत दिया था कि इस लिस्ट में उनका नाम नहीं होगा. उन्होंने AIADMK के कुछ नेताओं के एक गुट से कहा था, '23 अप्रैल को मैं कोयंबटूर के कवंडमपालयम में AIADMK उम्मीदवार अरुण कुमार के लिए बूथ लेवल एजेंट के तौर पर काम करूंगा.'

अन्नामलाई ने पहले भी कई बार यह संकेत दिया था कि वह चुनाव मैदान से बाहर रहना चाहते हैं. उन्होंने इसकी वजह पिता की खराब तबीयत बताई, लेकिन उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व उनके नेता को दूसरी बार निराश नहीं करेगा.

ठीक एक साल पहले, अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी. ऐसा एडप्पादी पलानीस्वामी और AIADMK नेतृत्व को मनाने की कोशिश में किया गया था. ये लोग 2023 में अन्नामलाई द्वारा सी.एन. अन्नादुरई पर की गई टिप्पणियों से नाराज होकर NDA गठबंधन छोड़ चुके थे. 

अन्नामलाई ने, जो राज्य की BJP इकाई पहले लगभग निष्क्रिय पड़ी थी, उसमें नई जान फूंक दी थी. उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के 3.6 प्रतिशत वोट शेयर को बढ़ाकर 2024 में 11.2 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था. इसके बावजूद, AIADMK के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए उनकी 'बलि' दे दी गई. 

Advertisement

उस समय यह तर्क दिया गया था कि भले ही उनके नेतृत्व में पार्टी के वोट शेयर में शानदार उछाल आया हो, लेकिन वह एक भी सीट में तब्दील नहीं हो पाया. इसलिए, पलानीस्वामी के साथ तालमेल बिठाकर काम करने के लिए नागेंद्रन जैसे अधिक मिलनसार नेतृत्व की ज़रूरत थी.

उनके समर्थकों की उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब 3 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख से ठीक तीन दिन पहले BJP की जो लिस्ट जारी हुई,
उसमें अन्नामलाई का नाम शामिल नहीं था. बात यहीं खत्म नहीं हुई. जिन चार नेताओं पर अन्नामलाई के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं को रोकने का आरोप लगाया था, पार्टी ने उन्हीं चारों को चुनाव मैदान में उतारा है. ये नेता हैं- पार्टी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, कोयंबटूर (दक्षिण) से विधायक वनथी श्रीनिवासन, केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन. 

लिस्ट जारी होने के बाद अन्नामलाई ने BJP उम्मीदवारों को समर्थन देने का वादा किया था, इसके बावजूद उनके समर्थक अपनी निराशा ज़ाहिर करने में पीछे नहीं हट रहे हैं. इससे बीजेपी की उस छवि को भी झटका लग रहा है, जिसमें वह खुद को एक अनुशासित पार्टी के तौर पर पेश करती है.

Advertisement

बीजेपी में उम्मीदवारों के नामों की घोषणा में हुई इस भारी देरी की मुख्य वजह कोयंबटूर को लेकर हो रही अड़चन को माना जा रहा है. 23 मार्च की बात है, जब एडप्पादी पलानीस्वामी और पीयूष गोयल ने संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि BJP विधानसभा की 27 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन असली विवाद सीटों के बंटवारे में सामने आया.

अन्नामलाई के समर्थकों को जल्द ही एहसास हो गया कि कोयंबटूर जिले में BJP को सिर्फ एक सीट ही दी गई है. AIADMK का यह फैसला एकमात्र ऐसी बात नहीं थी जिसने उन्हें नाराज किया. कोयंबटूर (दक्षिण), जो वनाथी श्रीनिवासन का निर्वाचन क्षेत्र था, उसे AIADMK ने अपने पास रख लिया और भगवा पार्टी को कोयंबटूर (उत्तर) सीट दे दी.

तमिलनाडु के औद्योगिक शहर कोयंबटूर में जब बीजेपी को सिर्फ एक ही सीट मिली, तो मामला और उलझ गया. वनाथी श्रीनिवासन के समर्थक चाहते थे वे अब नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ें. वहीं अन्नामलाई के समर्थक यह दलील दे रहे थे कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर से अच्छा प्रदर्शन किया था और दूसरे नंबर पर रहे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई DMK उम्मीदवार से 1.18 लाख वोटों से हार गए थे, लेकिन इससे भी ज़्यादा अहम बात यह थी कि उन्होंने AIADMK उम्मीदवार को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था. 

Advertisement

ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि मुरुगन, श्रीनिवासन और अन्नामलाई के बीच 'म्यूजिकल चेयर्स' (सीटों की अदला-बदली) जैसा कोई समझौता हो सकता है. इस फॉर्मूले के तहत, अन्नामलाई कोयंबटूर (उत्तर) से चुनाव लड़ते, मुरुगन अविनाशी से लड़ते और श्रीनिवासन को मुरुगन की जगह राज्यसभा भेज दिया जाता. लेकिन आखिरकार, इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया और अन्नामलाई को चुनाव प्रक्रिया से बाहर ही रखा गया.

संयोग से, अभी कुछ ही दिन पहले नागेंद्रन ने पत्रकारों को बताया था कि दिल्ली भेजी गई लिस्ट में अन्नामलाई का नाम भी शामिल था. अब इससे यह भी बात निकलकर सामने आ रही है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व ने जान-बूझकर उनकी उम्मीदवारी को रोक दिया है, ताकि वे एक 'फ्लोटिंग एसेट' (आजाद प्रचारक) के तौर पर पूरे तमिलनाडु में सभी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने को आजाद रहें?

विधानसभा चुनावों में BJP की संभावनाओं के लिए इस देरी और असमंजस का क्या मतलब है?

इस देरी की वजह से बीजेपी को कीमती समय बर्बाद हुआ है, क्योंकि उसके सहयोगी पार्टी के नेता पलानीस्वामी और विरोधी नेता एम.के. स्टालिन व विजय पिछले एक हफ़्ते से भी ज़्यादा समय से लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं. हालांकि अन्नामलाई एक स्टार प्रचारक के तौर पर अब कोयंबटूर की किसी एक सीट तक सीमित नहीं रहेंगे, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि चुनाव में उनके न होने से युवाओं में वोट डालने का उत्साह कम हो सकता है. 

Advertisement

ये वही युवा हैं जो उन्हें तमिलनाडु में BJP की नई तरह की राजनीति का चेहरा मानते थे. इससे DMK को इस IPS अधिकारी से नेता बने अन्नामलाई पर निशाना साधने का मौका मिल जाएगा कि 2024 में हार के बाद वह कोयंबटूर का सामना करने से डर गए. NDA के एक और बड़े नेता TTV दिनाकरन के भी चुनाव न लड़ने के फैसले से भी पार्टी की छवि कुछ खास अच्छी नहीं दिख रही है.

दूसरी ओर, BJP ज़्यादातर सीटों पर कोयंबटूर को छोड़कर, मुख्य जिम्मेदारी AIADMK पर ही छोड़ेगी. मुरुगन (अवानाशी) और सौंदराजन (मयिलापुर) जैसे अनुभवी नेताओं के मैदान में उतरने से यह संकेत मिलता है कि तमिलनाडु में BJP एक बार फिर अपनी पारंपरिक नेतृत्व शैली की ओर लौट रही है. इससे अन्नामलाई के नेतृत्व में बनी आक्रामक और उग्र छवि कुछ हद तक कमज़ोर पड़ सकती है. इस बदलाव से AIADMK के साथ BJP का तालमेल और भी बेहतर हो सकता है.

अन्नामलाई को चुनावी दौड़ से बाहर रखने के इस फ़ैसले का उनके राजनीतिक भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?

अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को ज्यादा बड़ा झटका नहीं, बल्कि एक अस्थायी उतार-चढ़ाव माना जा सकता है. इस बात से कि कोयंबटूर में AIADMK के उम्मीदवार और नेता अन्नामलाई से समर्थन मांग रहे हैं, यह साफ जाहिर होता है कि अतीत में मतभेद होने के बावजूद, वे मतदाताओं से जुड़ने की अन्नामलाई की क्षमता को स्वीकार करते हैं. वे अच्छी तरह जानते हैं कि कोयंबटूर और अन्य शहरी इलाकों में अन्नामलाई की लोकप्रियता और साख बहुत ज़्यादा है. ऐसे चुनाव में, जहां विजय की युवा छवि एक 'X-factor' साबित हो रही है, NDA को 'थलापति' की स्टार अपील का मुकाबला करने के लिए अन्नामलाई की सख़्त जरूरत है.

Advertisement

चुनावों में अब तीन हफ़्ते से भी कम समय बचा है, ऐसे में BJP के पास अभी भी आशावादी होने की गुंजाइश है. इसकी पहली वजह यह है कि दूसरी राष्ट्रीय पार्टी, कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने में लगभग उतना ही समय लिया, और अंत में उसने अपने ज़्यादातर मौजूदा विधायकों को ही दोबारा टिकट दे दिया. दूसरी वजह यह है कि 'कमल' हमेशा साफ-सुथरे पानी में ही नहीं खिलता. अब जब असमंजस और देरी के कारण चुनावी माहौल थोड़ा अस्पष्ट हो गया है, तो BJP 2021 के चुनावों के मुक़ाबले बेहतर नतीजों की उम्मीद कर सकती है. याद रहे कि 2021 में BJP ने तमिलनाडु विधानसभा में चार सीटें जीती थीं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement