सालिगाव, गोवा के उत्तरी गोवा जिले में स्थित एक जनगणना शहर है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और उत्तरी गोवा लोकसभा क्षेत्र के 20 हिस्सों में से एक है.
1989 में स्थापित सालिगाव में अब तक आठ विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. खास बात यह है कि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री विल्फ्रेड डिसूजा ने 1989 से 2007 तक लगातार इस सीट पर कब्जा जमाए रखा. उन्होंने चार बार जीत हासिल की, 1989 और 1994 में कांग्रेस सदस्य के तौर पर, 1999 में गोवा राजीव कांग्रेस पार्टी (GRCP) के सदस्य के तौर पर (यह पार्टी उन्होंने 1998 में खुद बनाई थी), और आखिर में 2002 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सदस्य के तौर पर. 2007 में, BJP के दिलीप पारुलेकर ने विल्फ्रेड डिसूजा को 1,957 वोटों के अंतर से हराया. इसके बाद 2012 में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और निर्दलीय उम्मीदवार डिसूजा टुलियो को 5,808 वोटों के अंतर से हराया. इस चुनाव में NCP उम्मीदवार सुरेश पारुलेकर तीसरे स्थान पर रहे. 2017 में, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के जयेश सालगांवकर ने BJP के दिलीप पारुलेकर को 2,137 वोटों के अंतर से हराया. हालांकि, 2022 के चुनावों से पहले सालगांवकर BJP में शामिल हो गए और BJP उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के केदार नाइक ने उन्हें 1,899 वोटों के अंतर से हरा दिया. केदार नाइक को 10,045 वोट मिले, जबकि सालगांवकर को 8,146 वोट मिले.
उसी साल, यानी 2022 में, केदार नाइक ने कांग्रेस के सात अन्य मौजूदा विधायकों के साथ मिलकर BJP का दामन थाम लिया. हालांकि, उनके दल-बदल की वजह से उपचुनाव नहीं हुए. ऐसा दल-बदल विरोधी कानून के तहत 'वैध विलय' (valid merger) के नियम के कारण हुआ. इस नियम के अनुसार, किसी विधायक की सदस्यता तब तक रद्द नहीं होती, जब तक कि सदन में उनकी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई चुने हुए सदस्य किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय करने पर सहमत न हों. लोकसभा चुनावों के दौरान सालिगाव विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग का पैटर्न हाल के वर्षों में लगातार BJP के पक्ष में रहा है. 2009 में, BJP ने NCP के मुकाबले 1,917 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, BJP ने फिर से बढ़त बनाई, इस बार कांग्रेस के मुकाबले और भी ज्यादा 4,950 वोटों की बढ़त. 2019 में, BJP ने कांग्रेस के मुकाबले 2,484 वोटों की बढ़त बनाई. और सबसे हाल ही में, 2024 में, BJP ने फिर से कांग्रेस के मुकाबले 3,495 वोटों की बढ़त बनाई.
सालिगाव में 2026 के चुनाव के लिए वोटर लिस्ट में 24,388 वोटर दर्ज हैं. यह संख्या 2024 के 28,019 वोटरों की तुलना में कम है, जो पूरे राज्य में SIR (स्पेशल समरी रिवीजन) के बाद आई गिरावट को दिखाता है. 2022 में यह संख्या 27,560, 2019 में 27,049, 2017 में 26,036, 2014 में 24,597 और 2012 में 23,741 थी.
वोटर टर्नआउट (मतदान प्रतिशत) लगातार ऊंचा रहा है: 2024 में 74.87 प्रतिशत, 2022 में 81.04 प्रतिशत, 2019 में 73.51 प्रतिशत, 2017 में 80.77 प्रतिशत, 2014 में 76.04 प्रतिशत और 2012 में 81.9 प्रतिशत.
उपलब्ध डेटा (ज्यादातर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित) के अनुसार, जनसांख्यिकी से पता चलता है कि यह एक हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जिसमें लगभग 21.20 प्रतिशत ईसाई, लगभग 6.60 प्रतिशत मुस्लिम, 1.46 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 0.72 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं. सालिगाव मुख्य रूप से एक शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 82.49 प्रतिशत वोटर शहरी इलाकों में रहते हैं, जबकि 17.51 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं.
पुर्तगाली शासन के दौरान, सालिगाव 'वेलहास कॉन्क्विस्टास' (Velhas Conquistas) या 'पुराने जीते हुए इलाकों' (Old Conquests) के तहत बारदेज क्षेत्र का हिस्सा था. पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा पर कब्जा कर लिया और 16वीं सदी के मध्य में बारदेज पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया. बाद के 'नोवास कॉन्क्विस्टास' (नए जीते गए इलाकों) की तुलना में, यह क्षेत्र सीधे तौर पर पुर्तगाली प्रशासन के अधीन आ गया. औपनिवेशिक काल के दौरान, यह कस्बा बारदेज तालुका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जहां स्थानीय बाज़ार और ग्राम परिषदें कुछ हद तक स्वायत्तता के साथ जमीनों और संसाधनों का प्रबंधन करती थीं.
सालिगाव की भौगोलिक बनावट में समतल जलोढ़ मैदान और बारदेज की खासियत माने जाने वाले हल्के उतार-चढ़ाव शामिल हैं, जिसकी औसत ऊंचाई लगभग नौ मीटर है. यह तटीय पट्टी के पास स्थित है और मांडवी नदी के मुहाने तथा स्थानीय नदी प्रणालियों से प्रभावित है, जो आसपास की कृषि भूमि को सहारा देती हैं. यहां के भूभाग में अर्ध-शहरी क्षेत्रों और निचले इलाकों का मिश्रण देखने को मिलता है.
स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों, कृषि , मछली पकड़ने, छोटे-मोटे व्यापार और खुदरा बिक्री के इर्द-गिर्द घूमती है. उत्तरी गोवा के समुद्र तटों से निकटता पर्यटन को बढ़ावा देती है, जबकि बाहरी इलाकों में कृषि कार्य जारी रहता है.
पर्यटकों के आकर्षण के केंद्रों में पास के समुद्र तट (जैसे कलंगुट) और यहां के जीवंत स्थानीय बाजार शामिल हैं. धार्मिक स्थल और औपनिवेशिक काल के प्रभाव यहां के सांस्कृतिक आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं. इस कस्बे की भौगोलिक स्थिति इसे बारदेज के दर्शनीय स्थलों को घूमने के लिए एक सुविधाजनक केंद्र बनाती है.
यहां की कनेक्टिविटी काफी अच्छी है. राज्य राजमार्गों के माध्यम से सड़क मार्ग सालिगाव को सीधे पणजी से जोड़ते हैं. राज्य की राजधानी पणजी से इसकी दूरी लगभग 10 किलोमीटर है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन 'कोंकण रेलवे' मार्ग पर स्थित 'थिविम' है, जो यहां से लगभग 9 से 12 किलोमीटर की दूरी पर है. मोपा (MOPA) स्थित 'मनोहर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा' यहां से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर है. इस कस्बे में बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं, जो स्थानीय और अंतर-राज्यीय (दूसरे राज्यों तक जाने वाले) मार्गों पर अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं.
सालिगाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक प्रमुख राजनीतिक दल रही है. जब कभी स्थानीय लोगों की भावनाएं भड़कीं, तो उन्होंने BJP के खिलाफ मतदान किया. विडंबना यह है कि जब BJP को हार का सामना करना पड़ता है, तब भी वह अपने आप ही विजेता बनकर उभरती है. क्योंकि हाल के वर्षों में BJP के अलावा जो भी उम्मीदवार चुनाव जीता है, वह अंततः BJP में ही शामिल हो गया है. इसलिए, जब तक कोई फिर से BJP के खिलाफ मजबूत स्थानीय भावनाएं पैदा नहीं करता, तब तक BJP 2027 के विधानसभा चुनावों में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त के साथ उतरने के लिए तैयार है.
(अजय झा)
Jayesh Salgaonkar
BJP
Rohan Kalangutkar
RVLTGONP
Mario Venancio Cordeiro
AAP
Rupesh Damodar Naik
IND
Bholanath Ghadi Sakhalkar
AITC
Nota
NOTA
आरक्षण और जातिगत राजनीति के मुद्दे ने उत्तर प्रदेश समेत चुनावी राज्यों में सियासी हलचल तेज कर दी है. सवर्णों के प्रदर्शन और विपक्ष के हमलों के बीच फंसी बीजेपी के लिए यह स्थिति 'एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई' जैसी बन गई है. बीजेपी के सामने डबल चैलेंज खड़ा हो गया है?
गोवा टेक कॉन्सेप्ट को लेकर एक स्पेशल इवेंट आयोजित किया है, जिसका नाम गोवा शैकथॉन है. इस दौरान गोवा मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया है कि गोवा में टूरिज्म मिनिस्ट्री और आईटी मिनिस्टर ने मिलकर एक यूनिक कॉन्सेप्ट बनाया है. इसकी मदद से लोग गोवा आकर बीच पर बैठकर अपने ऑफिस का काम कर सकेंगे. इससे उन लोगों को सुकून मिलेगा और वे अपनी क्रिएटिविटी भी दिखा सकेंगे.
संत रविदास की जयंती यानि गुरु पुर्णिमा के दिन बीजेपी समरसता संकल्प अभियान यात्रा की शुरुआत कर रही है. बीजेपी ने इस यात्रा के जरिए उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तराखंड सहित इस साल होने वाले सात राज्यों में दलित समुदाय को साधने का दांव चला है.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के झूठ और अफवाहों के कारण एनडीए (NDA) को जो भी आंशिक नुकसान हुआ था, आगामी चुनाव में उसकी धमाकेदार जीत के साथ पूरी भरपाई हो जाएगी.
गोवा सरकार ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जहां सरकार लोगों को गोवा से काम करने की सुविधा देगी. इसके लिए सरकार बीच किनारे शैक बनाए हैं, जहां लोग समंदर किनारे बैठकर अपने दफ्तर का काम कर सकेंगे. इसकी मदद से कंपनी नए कंपनियों और स्टार्टअप को गोवा में आकर्षित करना चाहती हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
गोवा में हुए स्थानीय चुनावों में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. परिणाम आने के बाद अब पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है. प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर को पद से हटा दिया गया है. श्रीकृष्ण परब को अंतरिम चार्ज दिया गया है.
अरविंद केजरीवाल गोवा के कारापुर-श्रवण गांव में धरने पर बैठे ग्रामीणों का समर्थन करने पहुंचे. उन्होंने कहा कि गोवा में बीजेपी सरकार बिल्डरों के लिए काम कर रही है और जनता अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रही है. केजरीवाल ने आश्वासन दिया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर धारा 39(ए) और इसके तहत दी गई सभी अनुमतियां रद्द कर दी जाएंगी.
गोवा में आम आदमी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अमित पालकर ने कांग्रेस जॉइन कर ली है. पिछले गोवा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अमित पालकर को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया था.
गोवा की पोंडा सीट पर उपचुनाव को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मतदान से एक दिन पहले रद्द कर दिया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग की अधिसूचना को कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचा है. फैसले के बाद कांग्रेस और सत्ताधारी बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.
अरविंद केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने एक डॉक्यूमेंट्री देखी. इसमें पार्टी नेताओं को मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की साजिश दिखाई गई. पार्टी इस संदेश को गोवा की स्थानीय भाषा कोंकणी में हर कस्बे और मोहल्ले तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है.