कंबारजुआ, गोवा के उत्तरी गोवा जिले की तिसवाड़ी तालुका में स्थित एक जनगणना नगर है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) निर्वाचन क्षेत्र है और उत्तरी गोवा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के 20 खंडों में से एक है.
1963 में 'सेंट एस्टेवम' के रूप में स्थापित और 1977 में 'कंबारजुआ' नाम दिया गया, कंबारजुआ में अब तक 15 विधानसभा चुनावों में मुकाबले हुए हैं, जिसमें 2005 का एक उपचुनाव भी शामिल है. गोवा की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टियों में से एक, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) ने इन चुनावों में से सात में जीत हासिल की. मुक्ति के बाद के दौर में इस पार्टी का दबदबा रहा और इसने 1963 से 1989 के बीच हुए हर चुनाव में जीत दर्ज की. हालांकि, 1994 में कांग्रेस ने जीत हासिल की और फिर 1999 में भी उसे सफलता मिली. 2002 में, MGP का प्रतिनिधित्व करते हुए पांडुरंग मडकाईकर ने चुनाव जीता, लेकिन 2005 में उन्होंने अपनी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. इस कदम से एक उपचुनाव की स्थिति बनी, जिसे उन्होंने कांग्रेस के सदस्य के तौर पर लड़ते हुए फिर से जीत लिया. मडकाईकर ने इसके बाद हुए दो चुनावों, 2007 और 2012 में भी जीत हासिल की, लेकिन 2017 के चुनाव से ठीक पहले वे BJP में शामिल हो गए और इस बार BJP के सदस्य के रूप में चुनाव जीतकर फिर से विधानसभा पहुंचे.
2012 में, मडकाईकर ने 1,575 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, और 2017 में उनकी जीत का अंतर बढ़कर 8,434 वोट हो गया. 2022 के चुनाव में, कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश फलदेसाई ने BJP की प्रत्याशी जनिता पांडुरंग मडकाईकर (जो पांडुरंग मडकाईकर की पत्नी हैं) को 2,827 वोटों के अंतर से हरा दिया. इस चुनाव में फलदेसाई को 6,776 वोट मिले, जबकि मडकाईकर के खाते में 3,949 वोट आए. हालांकि, 2022 में ही फलदेसाई उन आठ कांग्रेस विधायकों में शामिल हो गए, जिन्होंने अपनी पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया था. इस घटना को 'दल-बदल' (defection) के बजाय 'विलय' (merger) के रूप में मान्यता दी गई. परिणामस्वरूप, फलदेसाई की विधानसभा सदस्यता बरकरार रही और वे इस निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान विधायक बने हुए हैं।. लोकसभा चुनावों के दौरान कंबारजुआ विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग का पैटर्न हाल के सालों में BJP के पक्ष में रहा है. 2009 में, NCP ने BJP को 152 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. 2014 में, BJP ने कांग्रेस को 1,695 वोटों के अंतर से हराया.2019 में, BJP ने कांग्रेस को 1,587 वोटों के अंतर से हराया और सबसे हाल ही में, 2024 में, BJP ने कांग्रेस को 1,323 वोटों के अंतर से हराया.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए कंबारजुआ की मतदाता सूची में 24,472 योग्य मतदाता दर्ज हैं. पूरे राज्य में SIR लागू होने के बाद पिछले चुनाव की तुलना में यह संख्या कम हुई है. इससे पहले के आंकड़े इस प्रकार थे- 2024 में 27,170, 2022 में 26,601, 2019 में 25,606, 2017 में 25,052, 2014 में 23,805 और 2012 में 23,755.
मतदान प्रतिशत लगातार उच्च बना रहा है- 2012 में 83.54 प्रतिशत, 2014 में 76.13 प्रतिशत, 2017 में 82.21 प्रतिशत, 2019 में 73.6 प्रतिशत, 2022 में 81.38 प्रतिशत और 2024 में 74.1 प्रतिशत.
उपलब्ध डेटा, जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है, के अनुसार यह एक हिंदू-बहुल क्षेत्र है, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत ईसाई, लगभग 4 प्रतिशत मुस्लिम, 2.95 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 0.92 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं.
पुर्तगाली शासन के दौरान, कंबारजुआ 'वेलहास कॉन्क्विस्टास' (Velhas Conquistas) या 'पुराने जीते हुए इलाकों' (Old Conquests) का हिस्सा था. पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा पर कब्जा किया और 16वीं सदी की शुरुआत में तिसवाड़ी पर अपना नियंत्रण मज़बूत कर लिया. बाद में जीते गए 'नोवास कॉन्क्विस्टास' (Novas Conquistas) की तुलना में यह इलाका सीधे तौर पर पुर्तगाली प्रशासन के अधीन था. औपनिवेशिक काल के दौरान, यह कस्बा तिसवाड़ी तालुका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जहां स्थानीय बाजार और गांव की पंचायतें कुछ हद तक स्वायत्तता के साथ जमीन और संसाधनों का प्रबंधन करती थीं.
कंबारजुआ की भौगोलिक बनावट में समतल जलोढ़ मैदान और हल्की ऊंची-नीची जमीनें हैं, जो तिसवाड़ी की खासियत हैं. इसकी औसत ऊंचाई लगभग 10 मीटर है. यह मांडवी नदी और कुंभारजुआ नहर के किनारे स्थित है. यह नहर मांडवी और जुआरी नदियों को जोड़ती है, जिससे यहां के जल-निकास पर असर पड़ता है और आस-पास की खेती की जमीन को मदद मिलती है. यहां की जमीन में कुछ अर्ध-ग्रामीण इलाके और कुछ निचले इलाके शामिल हैं.
यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर टिकी है, जिसमें धान और नारियल की खेती, मछली पकड़ना, छोटे-मोटे व्यापार और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं. उत्तरी गोवा के समुद्र तटों के पास होने के कारण यहां पर्यटन का कुछ लाभ भी मिलता है, जबकि इस इलाके में पारंपरिक पेशे भी जारी हैं.
पर्यटकों के लिए यहां मांडवी नदी के सुंदर नजारे, स्थानीय बाजार और औपनिवेशिक काल की छाप वाले धार्मिक स्थल आकर्षण का केंद्र हैं. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण यह इलाका आस-पास के बारदेज के दर्शनीय स्थलों और नदी के किनारे की जगहों को घूमने के लिए एक सुविधाजनक केंद्र का काम करता है.
यहां आवागमन की सुविधाएं काफी अच्छी हैं. राज्य राजमार्गों के जरिए सड़क मार्ग से कंबारजुआ सीधे पणजी से जुड़ा हुआ है. राज्य की राजधानी पणजी यहां से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित थिविम है, जो यहां से लगभग 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर है. मोपा में स्थित मनोहर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहां से लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर है. इस कस्बे में स्थानीय और अंतर-राज्यीय मार्गों के लिए बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं.
कंबारजुआ का चुनावी इतिहास इस बात की ओर इशारा करता है कि यहां उम्मीदवार का व्यक्तित्व ही सबसे ज्यादा मायने रखता है. यहां के मतदाता लगातार ऐसे नेताओं का समर्थन करते आए हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी बदल ली हो, जैसे कि पहले पांडुरंग मडकईकर और अब राजेश फलदेसाई. यहां पार्टी के नाम से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्कों और स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों को महत्व दिया जाता है. इसका उदाहरण मडकईकर की लगातार जीत में देखा जा सकता है, जिन्होंने MGP से कांग्रेस और फिर कांग्रेस से BJP में जाने के बाद भी जीत हासिल की. इसी तरह, फलदेसाई ने भी कांग्रेस से BJP में जाने के बावजूद अपने चुनावी क्षेत्र में किसी भी तरह के विरोध या नुकसान का सामना किए बिना आसानी से अपनी जगह बनाए रखी. अब जबकि राज्य सरकार पर BJP का पूरी तरह से नियंत्रण है और मौजूदा विधायक भी इसी पार्टी से जुड़े हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनावों में कंबारजुआ में BJP की जीत की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है, बशर्ते कि पार्टी अपने भीतर के असंतोष को नियंत्रित कर ले और BJP-विरोधी वोटों के बंटवारे को रोक सके.
(अजय झा)
Janita Pandurang Madkaikar
BJP
Rohan Ranganath Harmalkar
IND
Samil Audumber Volvaiker
AITC
Chhagan Narayan Naik
RVLTGONP
Gorakhanath Suresh Kerkar
AAP
Nota
NOTA
Maria Christina Varela
GSB
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