| Gender | M |
| Age | 45 |
| State | BIHAR |
| Constituency | DEHRI |
राजीव रंजन सिंह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एलजेपीआरवी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. उनकी उम्र 45 साल है और उनकी शैक्षिक योग्यता 12th Pass है. उन पर दर्ज केसों की संख्या (0) है. उनकी कुल संपत्ति 30.7Crore रुपये है, जबकि उन पर 14.6Crore रुपये की देनदारी है.
Serious IPC Counts
Education
Cases
self profession
| Property details | 2025 |
|---|---|
| Total Assets | 30.7Crore |
| Movable Assets | 5.2Crore |
| Immovable Assets | 25.5Crore |
| Liabilities | 14.6Crore |
| Self Income | 3.6Crore |
| Total Income | 4.4Crore |
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
इंडिया टुडे ने चुनाव आयोग के डेटा की गहराई से जांच की और पाया कि SIR और चुनाव नतीजों के बीच कोई सीधा या समझ में आने वाला पैटर्न दिखता ही नहीं. हर बार जब एक ट्रेंड बनता लगता है, तुरंत ही एक दूसरा आंकड़ा उसे तोड़ देता है. बिहार चुनाव में NDA ने 83% सीटें जीतीं, पर SIR से जुड़े नतीजे अलग कहानी कहते हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आया है. जहां सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीती गई पांचों सीटें NDA के खाते में गईं, वहीं बेहद कम मार्जिन वाली सीटों पर अलग-अलग दलों की जीत दर्ज हुई. चुनावी आंकड़े बताते हैं कि भारी अंतर वाली सीटों पर NDA का दबदबा स्पष्ट दिखा जबकि कम अंतर वाली सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा.
jamui result shreyasi singh: जमुई विधानसभा सीट से दूसरी बार श्रेयसी ने राजद के मोहम्मद शमसाद आलम को 54 हजार वोटों से हराकर जीत हासिल की हैं.
बिहार चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन बुरी तरह फ्लॉप रहा और RJD-कांग्रेस गठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया. इसकी बड़ी वजहें थीं- साथी दलों के बीच लगातार झगड़ा और भरोसे की कमी, तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने का विवादास्पद फैसला, राहुल-तेजस्वी की कमजोर ट्यूनिंग और गांधी परिवार का फीका कैंपेन.
बिहार चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया और आरजेडी अपने इतिहास की बड़ी हारों में से एक झेल रही है. इससे तेजस्वी यादव के नेतृत्व, रणनीति और संगठन पर गंभीर सवाल उठे हैं.
पटना से 40 किलोमीटर दूर डेहरी गांव आज भी मूलभूत चीजों के लिए जूझ रहा है. 2007 में नीतीश कुमार ने महादलितों को सशक्त करने का वादा किया था, पर 18 साल बाद गांव में पानी, नाली, मनरेगा भुगतान और राशन सब अधूरा है. लोग भ्रष्टाचार, बदइंतज़ामी और टूटे भरोसे से जूझ रहे हैं.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के डेहरी में एक रैली को संबोधित किया. उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की 'वोटर अधिकार यात्रा' पर निशाना साधा और इसे 'घुसपैठिया बचाओ यात्रा' बताया. अमित शाह ने कहा कि बिहार में विकास केवल नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ही कर सकती है. उन्होंने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर बिहार को समृद्ध न कर पाने का आरोप लगाया.
बिहार में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. तेजस्वी वोट यात्रा पर हैं और लोगों की परेशानियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बिहार के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जिसमें देहरी और बेगूसराय में उनकी बैठकें होंगी. दोनों तरफ से प्रचार दमदार है और एक-दूसरे पर जमकर प्रहार किया जा रहा है. एक तरफ मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार और अपराध को बढ़ावा देने का आरोप है, जिससे लोग बदलाव चाहते हैं. दूसरी ओर, उप मुख्यमंत्री संजय सिन्हा तेजस्वी के पिछले कार्यकाल पर सवाल उठा रहे हैं.