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अभयपुरी असम के बोंगाईगांव जिले में स्थित एक कस्बा है और उत्तरी सालमारा उप-मंडल का मुख्यालय है. यह एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है, जिसे 2023 में राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी को बराबर करने के लिए किए गए परिसीमन अभ्यास के बाद स्थापित किया गया था. यह बारपेटा लोकसभा क्षेत्र के 10 खंडों में से एक है.
परिसीमन आयोग ने बोंगाईगांव जिले के चुनावी नक्शे में भारी फेरबदल किया. पहले, ज़िले में तीन विधानसभा क्षेत्र थे: बोंगाईगांव, अभयपुरी उत्तर और अभयपुरी दक्षिण, इनमें से अभयपुरी दक्षिण अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी. जहां बोंगाईगांव क्षेत्र बना रहा, वहीं अभयपुरी उत्तर और दक्षिण को समाप्त कर दिया गया और उनकी जगह अभयपुरी और श्रीजंग्राम को लाया गया, जिनकी सीमाएं और मतदाताओं की बनावट बदल दी गई थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और चुनाव आयोग पर 'जेरीमैंडरिंग' (चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में हेरफेर) करने का आरोप लगाया. विपक्ष का कहना था कि आयोग ने जान-बूझकर मुसलमानों को श्रीजंग्राम में केंद्रित किया है, ताकि बाकी दो सीटों को 'मुक्त' करके सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाया जा सके.
अभयपुरी उत्तर में 59 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे, जबकि अभयपुरी दक्षिण में 55.50 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे, हालांकि यह एक SC-आरक्षित सीट थी, जहां अनुसूचित जातियों की आबादी कुल मतदाताओं का केवल 13.34 प्रतिशत थी. बोंगाईगांव में 16.90 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे. अब ये आंकड़े निश्चित रूप से बदल गए होंगे, क्योंकि मुस्लिम-बहुल गांवों और मतदान केंद्रों को श्रीजंग्राम से जोड़ दिया गया है, जबकि गैर-मुस्लिम बहुल गांवों और मतदान केंद्रों को अभयपुरी विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है.
ये दोनों विधानसभा क्षेत्र 1978 में स्थापित किए गए थे और इन दोनों में नौ-नौ विधानसभा चुनाव हुए थें अभयपुरी उत्तर में AGP ने चार बार जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस ने तीन बार, वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो बार इस सीट पर कब्जा जमाया. अभयपुरी दक्षिण में कांग्रेस ने चार बार, AGP ने दो बार, और जनता पार्टी, एक निर्दलीय उम्मीदवार तथा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने एक-एक बार जीत दर्ज की.
कांग्रेस पार्टी और AIUDF ने राज्य विधानसभा में क्रमशः अब समाप्त हो चुके उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया था.
एक नया विधानसभा क्षेत्र होने के कारण, अभयपुरी का अपना कोई चुनावी इतिहास नहीं है. जनता के मूड को भांपने का एक छोटा सा मौका 2024 के लोकसभा चुनावों में मिला. BJP के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा AGP, कांग्रेस से 55,109 वोटों से आगे रहा. AGP के फणी भूषण चौधरी को 98,791 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के दीप बायन को 43,682 वोट मिले. इससे एक मोटा-मोटा संकेत मिल गया कि परिसीमन से वास्तव में राज्य के सत्ताधारी गठबंधन को फायदा हुआ है.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए अभयपुरी की अंतिम मतदाता सूची में 182,376 योग्य मतदाता थे, जो 2024 के 179,820 मतदाताओं की तुलना में ज्यादा थे. 2024 में मतदाताओं की भागीदारी काफी अच्छी रही और यह 87.04 प्रतिशत दर्ज की गई.
उपलब्ध आंकड़ों (जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित हैं और जिन्हें क्षेत्र तथा 2023 के परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजित किया गया है) के आधार पर जनसांख्यिकी यह दर्शाती है कि पहले के अभयपुरी उत्तर और दक्षिण निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में यहां मुस्लिम आबादी का प्रभाव काफी कम हो गया है. अब इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया बोलने वाले हिंदुओं, बंगाली समूहों और छोटी अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों का अधिक संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसके मिश्रित ग्रामीण स्वरूप को और भी निखारता है.
अभयपुरी निर्वाचन क्षेत्र लोअर असम के बोंगाईगांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जिसमें ब्रह्मपुत्र घाटी के समतल जलोढ़ मैदान और कुछ निचले आर्द्रभूमि क्षेत्र शामिल हैं. यहां की जमीन धान की खेती, जूट की खेती और सब्जियां उगाने के लिए उपयुक्त है, लेकिन ब्रह्मपुत्र, आई और मानस जैसी नदियों की सहायक धाराओं से आने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा यहां हमेशा बना रहता है. अभयपुरी में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती-बाड़ी, छोटे-मोटे व्यापार, आर्द्रभूमि में मछली पकड़ने और कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर निर्भर है. यहां के बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के माध्यम से सड़क संपर्क शामिल है, जो इसे गुवाहाटी और उससे आगे के क्षेत्रों से जोड़ता है. साथ ही पास के अभयपुरी या बोंगाईगांव स्टेशनों पर रेल सुविधा भी उपलब्ध है. इसके अलावा, यहां बुनियादी नागरिक सुविधाएं भी मौजूद हैं और ग्रामीण सड़कों तथा बाढ़ सुरक्षा उपायों के क्षेत्र में लगातार विकास कार्य चल रहे हैं. इस क्षेत्र में आरक्षित वनों के कुछ हिस्से भी हैं, जहां सीमित संख्या में वन्यजीव पाए जाते हैं, इनमें हिरण, जंगली सूअर और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं.
यहां से सबसे नजदीकी बड़ा शहर बोंगाईगांव है, जो इस जिले का मुख्यालय भी है और यहां से लगभग 20-25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आस-पास के अन्य शहरों में पश्चिम की ओर लगभग 40-45 km दूर गोलपारा और उससे भी पश्चिम में बिलासपारा शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 160-180 km पूर्व में स्थित है.
अभयपुरी एक पुरानी बोतल में नई शराब की तरह है – जाना-पहचाना नाम, फिर भी जिसका स्वाद अभी तक नहीं चखा गया है. अगर 2024 के लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में वोटिंग के रुझान को कोई संकेत माना जाए, तो मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा काफी कम हो गया है, जिससे यह सीट सभी के लिए खुल गई है, क्योंकि AGP ने यहां बड़े अंतर से बढ़त बनाई है. चुनावी जंग की बिसात बिछ चुकी है, और इस सीट के लिए मुख्य दावेदार NDA की ओर से BJP के भूपेन राय और विपक्षी गठबंधन की ओर से कांग्रेस के प्रदीप कुमार सरकार हैं. 2026 के विधानसभा चुनावों में वोटिंग के रुझान और नतीजों से ही यह तय होगा कि क्या परिसीमन से सचमुच सत्ताधारी गठबंधन को फायदा हुआ है और क्या इसने भविष्य के चुनावों के लिए माहौल तैयार किया है.
(अजय झा)
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हो रहे चुनावों में हर मुख्यमंत्री सत्ता में वापसी चाहता है. चुनौती तो केरलम में पी. विजयन के सामने भी है, लेकिन ममता बनर्जी की चुनौती सबसे बड़ी नजर आ रही है - हिमंता बिस्वा सरमा हों या एमके स्टालिन वे दोनों भी मुख्यमंत्री आगे भी बने रहना चाहते हैं.
असम के करीमगंज (नॉर्थ) विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर झड़प के बाद चुनाव आयोग ने शनिवार को दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. यह फैसला चुनावी गड़बड़ी के चलते लिया गया है. हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
असम के सियासी इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई है. असम में इस बार 85.89 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा है. असम में सत्ता का खेल सात से 8 फीसदी वोट बढ़ने या फिर घटने पर होता रहा है. इस बार का वोटिंग पैटर्न क्या संकेत दे रहा है?
असम, केरलम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया. पुडुचेरी में 89.87 फीसदी, असम में 85.91 फीसदी और केरलम में 78.27 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. तीनों जगह बंपर वोटिंग हुई.
दक्षिण से लेकर पूरब तक 3 राज्यों में आज जनादेश का दिन है...और तीनों राज्यों में जबरदस्त वोटिंग हो रही है..असम में दोपहर 3 बजे तक 75.91 फीसदी मतदान हो चुका है..आप समझ सकते हैं कि यही ट्रेंड रहा तो वहां पोलिंग कितनी फीसदी तक हो सकती है..पुडुचेरी में भी 72.40 फीसदी मतदान दोपहर 3 बजे तक हुआ..केरल में दोपहर 3 बजे तक 62.71 फीसदी वोटिंग हुई है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assam Assembly Election Voting: असम में आज विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. इस बीच मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी के मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं और दोनों ने मंदिर में विधिवत पूजा की.
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए वोट डाला जा रहा है. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. बीजेपी तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस फिर से सत्ता में वापसी करना चाह रही है - लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती से बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF जूझ रही है.
असम, केरल और पुडुचेरी में आज विधानसभा चुनाव के तहत एक चरण में मतदान जारी है, जो सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. असम में 126 सीटों पर 722 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है, जिसके लिए 31,940 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और 1.5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. वहीं केरल की 140 सीटों पर 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, जहां 2.71 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे और मुख्य मुकाबला एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच है.