ऑफिस का डेस्क केवल एक फर्नीचर नहीं होता है. यह एक छोटा सा कोना है जिसे हम चुपचाप अपना बना लेते हैं, एक ऐसी जगह जिसे हम धीरे-धीरे अपनेपन का एहसास कराते हैं. समय के साथ वह डेस्क केवल काम करनी ही जगह नहीं बल्कि एक कहानी कहने लगती है. ज़ोर-शोर से नहीं बल्कि उन छोटी-छोटी चीजों के ज़रिए जिन्हें हम इनपर रखने के लिए चुनते हैं.
अपने ऑफिस में चारों ओर नजर डालें तो पाएंगे कि कोई भी दो डेस्क एक जैसी नहीं है. कुछ डेस्क हरे-भरे पौधों से भरे होते हैं, जो आपके लंबे काम के दिनों में ताजगी का एहसास कराते हैं. कुछ डेस्क जगमगाती रोशनी से भरी होती है. वहीं, कुछ डेस्क पर किताबें, तस्वीरों, नोट्स और यादों से भरी होती है, जबकि कुछ पर सिर्फ लैपटॉप और जरूरी सामान ही होते हैं. कुछ डेस्क बहुत व्यवस्थित होती हैं, तो कुछ में हल्की-सी अव्यवस्था भी अपनी अलग पहचान दिखाती है.
हर डेस्क बैठे व्यक्ति के बारे में कुछ न कुछ जरूर बताती है
लेकिन इन डेस्क की जो बात सबसे अच्छी होती है वह ये है कि यह वहां पर बैठे लोगों के बारे में कई बातें बताती है. मुझे अपना ऑफिस मिनिमलिस्ट रखना पसंद हैं लेकिन खाली नहीं. यहां किताबें है, कुछ पत्रिकाएं भी है. साथ ही कुछ ऐसी तस्वीरें हैं, जिन्हें देखकर मुझे खुशी मिली है और मेरे बैग के लिए अलग से जगह है. लेकिन कुछ भी दिखावटी नहीं है. कुछ भी जरूरत से ज्यादा नहीं. बस इतना काफी है कि यह ऑफिस का मेरा अपना कोना लगे.
कई बार जब मैं अपना डेस्क देखता हूं...
कभी-कभी जब मैं काम के बीच रुककर आसपास देखता हूं, तो हर डेस्क पर एक अलग कहानी नजर आती है. किसी के पास छोटा-सा पौधा है, किसी ने दीवार पर कोई खास बात लिख रखी है, तो किसी की मेज पर पुरानी तस्वीरें, किताबें या पसंदीदा कॉफी मग रखा है. ये छोटी-छोटी चीजें बताती हैं कि हर व्यक्ति अपने काम की जगह में अपनी एक अलग दुनिया बसाता है. ये केवल सामान नहीं हैं ये उन लोगों के छोटे-छोटे प्रतिबिंब हैं जो हर दिन वहां बैठते हैं.
हम अपने काम की जगह कोो जितना समझते हैं, उससे कहीं अधिक उसके बारे में सोचते हैं. हम उसे व्यवस्थित रखते हैं, उसे अपने हिसाब से सजाते हैं और व्यस्त दिनों के बाद उसे फिर से साफ-सुथरा कर देते हैं, मानो वह हमारा छोटा सा घर बन गया हो. हमारे आस-पास की चीजें चुपचाप हमारे मन को आकार देती हैं, हमारी एकाग्रता बढ़ाती हैं और यह दर्शाती हैं कि हमें हर दिन क्या प्रेरित करता है, क्या सुकून देता है और क्या स्थिरता प्रदान करता है.
मेरे वर्क डेस्क पर आपका स्वागत है
तो, ये रहा मेरे जीवन की एक झलक.
मैंने सादगी भरा लेआउट चुना क्योंकि अव्यवस्था मुझे बेचैन करती है. मेरी डेस्क सजावट से भरी नहीं है, लेकिन उस पर रखी हर चीज का कोई न कोई उद्देश्य या कहानी है. मेरे लैपटॉप के बगल में, मेरे कॉफी मग और गिलास के लिए एक अलग जगह है. मेरे बैग के लिए एक निश्चित स्थान है और एक छोटा सा कोना मेरी रोजमर्रा की जरूरी चीजों, परफ्यूम, पेन स्टैंड और उन छोटी-छोटी चीजों के लिए आरक्षित है जिन्हें मैं बिना सोचे समझे ही इस्तेमाल करती हूं. मेरी डेस्क पर कुछ ऐसी निजी चीजें भी हैं, जो मुझे खास महसूस कराती हैं. परिवार की एक तस्वीर, किसी यादगार जगह का पोस्टकार्ड और एक हाथ से लिखा नोट मुझे मुश्किल समय में प्रेरणा देते हैं. ये छोटी-छोटी चीजें मेरी वर्क डेस्क को सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि अपनी-सी जगह बना देती हैं.
किताबों के लिए अलग से सेक्शन
आपको एक तरफ आठ किताबें भी रखी मिलेंगी. इनमें मेरी पसंदीदा कॉफी टेबल बुक है जिसे मैं आज भी प्रेरणा की जरूरत पड़ने पर पलटकर देखता हूं और एक पत्रिका है जिसे मैंने शायद आठ बार पढ़ा है लेकिन हर बार मुझे पढ़ने में मजा आता है. मेरी सबसे प्यारी यादगार चीजों में से एक वह तस्वीर है जो मेरी संस्था ने मुझे मेरे शामिल होने पर उपहार में दी थी, जो इस पेशेवर जर्नी की शुरुआत की एक छोटी सी याद दिलाती है. लेकिन अगर कोई एक चीज है जो आपको हमेशा मेरी वर्क डेस्क पर मिलेगी, तो वो हैं किताबें.
मैंने हमेशा किताबें अपने पास ही रखी हैं चाहे मैंने कहीं भी काम किया हो. लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि मैं उन्हें घर पर ही क्यों नहीं छोड़ देता. इसका जवाब सीधा है.
सबसे पहले तो ये मुझे पढ़ने की याद दिलाती हैं. काम में व्यस्तता बढ़ जाती है, डेडलाइन बढ़ती जाती हैं, मीटिंग उम्मीद से ज्यादा लंबी हो जाती हैं तो ऐसे में खुद से ये कहना कितना आसान हो जाता है कि कल पढ़ लेंगे. डेस्क पर किताब देखना एक तरह से याद दिलाता है कि काम के व्यस्त होने पर भी पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए. लंच के दौरान या घर जाने से पहले कुछ पन्ने पढ़ना भी खुद से किए गए वादे को निभाने जैसा लगता है. दूसरा, और शायद इससे भी अधिक अहम कि वे मुझे सुकून देते हैं.
ये कहानियां, सोच और अलग-अलग दुनियाएं बस कुछ ही दूरी पर मौजूद हैं, यह जानकर मन को एक अजीब सी शांति मिलती है. जब भी काम का बोझ बहुत बढ़ जाता है, मुझे पता है कि मैं एक किताब खोल सकता हूं और भले ही सिर्फ दस मिनट के लिए ही सही, एक दूसरी दुनिया में खो सकता हूं. यह मेरे लिए एक तरह से रीसेट बटन है. ईमेल, मीटिंग और डेडलाइन पर लौटने से पहले यह मेरा शांत पलायन है.
कुछ लोगों को यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है. मेरे लिए, किताबें सिर्फ मेरी डेस्क पर जगह नहीं घेरतीं बल्कि वे एक नई डेस्क बनाती हैं.
क्या कहती हैं आपकी वर्क डेस्क?
आपकी वर्क डेस्क आपके बारे में जितना आप सोचते हैं उससे कहीं अधिक बता सकती हैं. अगर आपकी डेस्क पर पढ़ने के लिए किताबों का ढेर लगा है, तो शायद आप स्वभाव से जिज्ञासु हैं और काम के बारे में सीखना पसंद करते हैं. अगर आप हमेशा अपने पास एक नोटबुक रखते हैं, तो शायद आप उस तरह के व्यक्ति हैं जो अपने विचारों को कागज पर उतारना पसंद करते हैं, इससे पहले कि वे गायब हो जाएं.
आपका पसंदीदा कॉफी मग किसी सुकून देने वाली दैनिक दिनचर्या का संकेत दे सकता है, जबकि एक पारिवारिक तस्वीर या पोस्टकार्ड आपको उन लोगों और स्थानों की याद दिला सकता है जो व्यस्त कामकाजी दिन के दौरान आपको जमीन से जोड़े रखते हैं.
या शायद आप एक मिनिमलिस्ट हैं. अगर आपकी डेस्क पर सिर्फ जरूरी चीजें हैं, जैसे लैपटॉप, नोटबुक और कुछ ही चीजें तो शायद आप एक ऐसे शांत वातावरण में सबसे अच्छा काम करते हैं जहां हर चीज का कोई न कोई मकसद हो. दूसरी तरफ, अगर आपकी डेस्क कागजों, चार्जर, स्टिकी नोट्स और अधूरी टू-डू लिस्ट से भरी पड़ी है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अव्यवस्थित हैं. इसका मतलब सिर्फ़ यह हो सकता है कि आपका दिमाग अलग तरह से काम करता है.
कई लोगों के लिए, जो दूसरों को अराजकता जैसा दिखता है, लेकिन वाकई में वह एक ऐसी प्रणाली है जो उन्हें पूरी तरह से समझ में आती है.
बेशक, कोई भी साइंस किसी व्यक्ति को उसके वर्क प्लेस से परिभाषित नहीं कर सकता. लेकिन हमारी डेस्क पर वे छोटी-छोटी चीजें जमा हो जाती हैं जिन्हें हम हर दिन इस्तेमाल करते हैं, वे वस्तुएं जो हमें प्रेरित करती हैं. हमें सुकून देती हैं और काम के लंबे घंटों को आसानी से गुजारने में हमारी मदद करती हैं. यही बात हर डेस्क को अनोखा बनाती है. यह सिर्फ़ हमारी कार्यस्थल नहीं है, यह हमारे काम करने के तरीके का एक छोटा सा प्रतिबिंब है और शायद हमारे व्यक्तित्व का भी थोड़ा सा हिस्सा है.
तो अगली बार जब आप अपनी डेस्क पर बैठें या किसी और की डेस्क पर नजर डालें, तो कुछ पल रुककर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें. आपको शायद पता चले कि हर वर्कस्टेशन की अपनी एक कहानी होती है.