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दिल्ली से एक फोन और बंट गया पेपर... जानिए सीकर कैसे बना NEET पेपर लीक माफियाओं का हब

NEET पेपर लीक मामले में राजस्थान का सीकर जांच एजेंसियों के रडार पर सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. सूत्रों के मुताबिक बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सवाल परीक्षा से पहले “गेस पेपर” के नाम पर छात्रों तक पहुंचाए गए. जांच में कोचिंग संस्थानों, MBBS काउंसलिंग नेटवर्क, हॉस्टल और दिल्ली-सीकर-नागौर-केरल कनेक्शन सामने आए हैं.

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एग्जाम से पहले नीट पेपर के लिए दिल्ली से किया गया था फोन. (Photo: PTI)
एग्जाम से पहले नीट पेपर के लिए दिल्ली से किया गया था फोन. (Photo: PTI)

नीट पेपर लीक मामले में राजस्थान का सीकर अब जांच एजेंसियों के रडार पर सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. सूत्रों के मुताबिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि सवाल सीधे प्रिंटिंग प्रेस या मूल पेपर सोर्स से लीक हुए थे. दावा है कि बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल परीक्षा से पहले ही चुनिंदा लोगों तक पहुंच चुके थे.

जांच एजेंसियों को शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि इन सवालों को “गेस पेपर” का नाम देकर सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया गया. मेधावी छात्रों को यह कहकर पेपर पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया कि “इसी में से आएगा.” सूत्रों के मुताबिक SOG ने सीकर के एक कोचिंग संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की है. जांच में एक नाम राकेश का सामने आया है, जो कथित तौर पर बड़े कोचिंग संस्थानों के सामने MBBS काउंसलिंग का काम करता था.

आरोप है कि उसने ₹30 हजार में पेपर अपने एक साथी को बेचा, जो केरल में MBBS का छात्र बताया जा रहा है. जांच में राजस्थान, केरल और दिल्ली कनेक्शन भी सामने आया है. आरोप है कि राजस्थान के एक हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों तक भी यही पेपर पहुंचाया गया. छात्रों के बीच “यही आएगा” कहकर इसे फैलाया गया. सूत्रों का दावा है कि लालच और आपसी बिक्री के कारण ही पूरा नेटवर्क खुला.

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“पेपर आ गया है...”: दिल्ली से एक फोन, सीकर में सर्कुलेशन
बताया जा रहा है कि आखिरी समय में छात्रों ने यही पेपर ₹5 हजार से ₹30 हजार तक में बेचना शुरू कर दिया था. जांच में नागौर कनेक्शन भी सामने आया है. जहां एक छात्र को कथित तौर पर ₹28 लाख में पेपर बेचे जाने की बात सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक नागौर का एक छात्र परीक्षा से चार दिन पहले सीकर पहुंचा था. पूछताछ में यह दावा भी सामने आया कि “दिल्ली से फोन आया था कि पेपर आ गया है.”

अब जांच एजेंसियों को शक है कि यह सिर्फ छात्रों या छोटे स्तर के कोचिंग नेटवर्क का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित और मल्टी-स्टेट रैकेट हो सकता है. जांच का फोकस प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारियों, पेपर ट्रांसपोर्ट चैन, कोचिंग संचालकों, MBBS काउंसलिंग नेटवर्क, हॉस्टल और छात्र नेटवर्क के साथ-साथ दिल्ली–सीकर–नागौर–केरल लिंक पर है. एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है और असली सोर्स कहां है.

कोटा के बाद सीकर क्यों बना कोचिंग और पेपर लीक का नया हब?
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों का सबसे ज्यादा फोकस अब सीकर और जयपुर पर है. सीकर को पेपर लीक नेटवर्क का नया “अड्डा” बनने की आशंका जताई जा रही है. कोटा के बाद सीकर तेजी से देश के बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा है. कोटा में एडमिशन घटने के बाद राजस्थान में बड़ी संख्या में छात्र सीकर की ओर आए, जिससे यहां कोचिंग कारोबार तेजी से बढ़ा.

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राजस्थान बोर्ड परीक्षाओं में पहले भी सीकर विवादों में रहा है. जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क कोचिंग संस्थानों और करियर काउंसलरों से जुड़ा हो सकता है. MBBS एडमिशन और काउंसलिंग कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. आरोप यह भी हैं कि इस बार कोई पारंपरिक “गैंग” नहीं, बल्कि कोचिंग और काउंसलिंग नेटवर्क ही पेपर बेचने का माध्यम बना. सूत्रों के मुताबिक पेपर जयपुर से बाहर निकला और उसका सबसे बड़ा सर्कुलेशन सीकर में हुआ.

सोच-समझकर रद्द की गई परीक्षा
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने “सोच-समझकर” परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है. क्योंकि मामला करीब 22 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है. राजस्थान ATS/SOG और DGP अभिषेक सिंह लगातार संपर्क में हैं. बताया जा रहा है कि DGP जयपुर जाकर पूरे नेटवर्क की समीक्षा भी कर चुके हैं. जांच एजेंसियां अब उस “पॉइंट ऑफ लीक” तक पहुंचने का दावा कर रही हैं, जहां से पेपर बाहर आया था.  

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