मिडिल-ईस्ट की जंग अब किताबों और क्लासरूम की दहलीज तक पहुंच गई है. ईरान की प्रमुख टेक्निकल यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IUST) यानी अमीरकबीर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर हुए इजरायली हमले ने न केवल इमारतों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. जिसे इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के गढ़ के रूप में जाना जाता है, आज उसकी इंजीनियरिंग और फिजिक्स लैब मलबे के ढेर में तब्दील हो गई हैं.
97 साल की है इंजीनियरिंग विरासत
IUST की स्थापना 1929 में हुई थी. यह ईरान का पहला आधुनिक टेक्निकल संस्थान था जिसने इंजीनियरिंग शिक्षा की नींव रखी. आज यहां करीब 15,000-19,000 छात्र पढ़ते हैं और यह देश की सबसे मजबूत इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी मानी जाती है.
QS वर्ल्ड रैंकिंग में इंजीनियरिंग में सिविल, मैकेनिकल और मैटेरियल साइंस के विभाग दुनिया के टॉप-100 में गिने जाते हैं. इजरायल का दावा है कि इन्हीं लैब्स का इस्तेमाल डिफेंस और न्यूक्लियर रिसर्च के लिए किया जा रहा था.
दुनिया की सबसे कठिन 'अग्निपरीक्षा' से मिलता है एडमिशन
IUST में दाखिला पाना IIT या UPSC जितना कठिन है. कोनकूर (नेशनल एंट्रेस एग्जाम ) यहां हर साल लाखों छात्र देते हैं. इनमें Top 1% (शीर्ष 500-1000 रैंक) वाले मेधावी छात्रों को ही मुख्य कैंपस में जगह मिलती है. यहां की एक-एक सीट के लिए हजारों छात्रों का मुकाबला होता है.
ये दिग्गज यहां से पढ़ चुके हैं
यह यूनिवर्सिटी ईरान के कई प्रमुख इंजीनियर, वैज्ञानिक और टेक्नोक्रेट्स की मातृसंस्था रही है. यहां के अधिकांश कोर्सेज फारसी में होते हैं. AZFA प्रोग्राम पास करना जरूरी. ईरान सरकार और यूनिवर्सिटी मेधावी विदेशी छात्रों (भारतीय सहित) को स्कॉलरशिप देती है.
28 मार्च 2026 को इजरायली हमले में ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IUST) की इंजीनियरिंग विंग मलबे में तब्दील हो गई. 1929 में स्थापित इस टेक्निकल पावरहाउस में Konkur की सबसे कठिन परीक्षा पास करनी पड़ती है. अब ईरान ने अमेरिका को अल्टीमेटम देते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. देखिए, क्या खतरे में है मिडिल-ईस्ट का प्रमुख ज्ञान-विज्ञान केंद्र?