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CBSE बोर्ड ने दो जून की सुबह 4:42 बजे एक्ट‍िव क‍िया री-इवैल्यूएशन पोर्टल, ये होना कल था!

CBSE ने 2 जून को सुबह 4:42 बजे री-इवैल्यूएशन पोर्टल को लाइव कर दिया है, जो पहले तकनीकी खामियों और तारीखों में बदलाव के कारण बाधित था. छात्रों को आवेदन से पहले निर्देशों को ध्यान से देखने की सलाह दी गई है. बोर्ड की लचर योजना और तकनीकी समस्याओं ने छात्रों को मानसिक तनाव में डाल दिया है. अधिकारियों की खामोशी ने डिजिटल व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है.

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CBSE का री-इवैल्यूएशन पोर्टल सुबह 4:42 बजे लाइव (Photo : Pexels)
CBSE का री-इवैल्यूएशन पोर्टल सुबह 4:42 बजे लाइव (Photo : Pexels)

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के उन लाखों छात्रों के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया, जो अपने बोर्ड रिजल्ट के नंबरों से असंतुष्ट हैं और री-चेकिंग का इंतजार कर रहे थे. कल, यानी 1 जून को दिनभर चले भारी तकनीकी ग्लिच और वेबसाइट ठप रहने के बाद, सीबीएसई बोर्ड ने आखिरकार देर रात अपनी कमियों को दुरुस्त किया. आज, 2 जून की अलसुबह 4:42 बजे आधिकारिक तौर पर मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) का पोर्टल पूरी तरह लाइव कर दिया गया है.

सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे आवेदन करने से पहले स्टेप-बाय-स्टेप निर्देशों वाले वीडियो को बहुत ध्यान से देखें ताकि कोई गलती न हो. छात्र अब बोर्ड द्वारा जारी नए डायरेक्ट लिंक पर जाकर लॉगिन कर सकते हैं.

दावों और हकीकत में बड़ा फासला, बार-बार बदली तारीखें
भले ही पोर्टल को लाइव कर दिया गया हो, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सीबीएसई की लचर प्लानिंग और तकनीकी खामियों ने छात्रों को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया. बोर्ड ने पहले इस पोर्टल को 29 मई को ही खोलने का फैसला किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 1 जून किया गया था. तब बोर्ड की तरफ से यह दलील दी गई थी कि वे छात्रों को एक बेहद 'पारदर्शी और ग्लिच-फ्री' (तकनीकी खामियों से मुक्त) सिस्टम देना चाहते हैं, ताकि किसी को परेशानी न हो.

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लेकिन कल घोषित तारीख पर सुबह से ही वेबसाइट पूरी तरह इनएक्सेसिबल (Inaccessible) बनी रही और छात्र लॉगिन के लिए भटकते रहे. सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि री-इवैल्यूएशन के लिए बेहद सीमित समय मिलता है, और ऐसे में बोर्ड की यह तकनीकी लापरवाही छात्रों का कीमती वक्त बर्बाद कर रही थी. इस पूरे ग्लिच को लेकर जब 'इंडिया टुडे' ने सीबीएसई के अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की, तो बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. अधिकारियों की इस खामोशी और सिस्टम की इस नाकामी ने साबित कर दिया कि बोर्ड डिजिटल व्यवस्था को लेकर कितना लापरवाह है.

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