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क्या OSM टेंडर में बदले गए नियम? 17 साल के सार्थक ने संसद में खोलीं कई परतें

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद के बीच 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसद की स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की समिति) के सामने प्रस्तुति दी. इस दौरान उन्होंने OSM सिस्टम के क्रियान्वयन और उससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अपना प्रेजेंटेशन रखा.

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जिस OSM सिस्टम पर लाखों कॉपियां जांची जाती हैं, उसमें 17 साल के छात्र ने खोज निकाले सवाल (Image:X@ANI)
जिस OSM सिस्टम पर लाखों कॉपियां जांची जाती हैं, उसमें 17 साल के छात्र ने खोज निकाले सवाल (Image:X@ANI)

क्या एक 12वीं का छात्र उन सवालों को पकड़ सकता है जो सिस्टम की नजर से छूट गए? यही सवाल इन दिनों CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर उठ रहा है. 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद की स्थायी समिति के सामने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देकर दावा किया कि उसने CBSE के टेंडर दस्तावेजों और OSM सिस्टम में कई ऐसी विसंगतियां खोजी हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए. आखिर सार्थक ने अपनी प्रस्तुति में क्या बताया, किन बदलावों पर सवाल उठाए और अब इस पूरे मामले पर संसद की समिति क्या देख रही है? समझते हैं पूरी कहानी.

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद के बीच 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने मंगलवार को संसद की स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की समिति) के सामने प्रस्तुति दी. इस दौरान उन्होंने OSM सिस्टम के क्रियान्वयन और उससे जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अपने निष्कर्ष रखे.

संसदीय समिति इस समय CBSE की कक्षा 12 की कॉपियों के मूल्यांकन में इस्तेमाल किए जा रहे OSM सिस्टम और छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं की समीक्षा कर रही है.

आखिर सार्थक ने अपनी प्रस्तुति में क्या कहा?

सार्थक का दावा है कि उन्होंने CBSE के कई टेंडर दस्तावेजों की तुलना की और उनमें कई ऐसे बदलाव पाए जो एक विशेष सेवा प्रदाता कंपनी को फायदा पहुंचाने वाले प्रतीत होते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी जांच में कम से कम 15 विसंगतियां सामने आईं, जिनमें से कुछ प्रमुख बिंदु उन्होंने समिति के सामने रखे.

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  1. पुराने टेंडर में खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े प्रावधान थे, जिन्हें बाद के दस्तावेजों में हटा दिया गया.
  2. ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में बदलाव किए गए.
  3. वित्तीय पात्रता और तकनीकी योग्यता से जुड़ी शर्तों में संशोधन हुआ.
  4. परियोजना अनुभव और CMMI स्तर जैसी तकनीकी आवश्यकताओं में भी बदलाव देखने को मिले.

एक कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

सार्थक ने संसदीय समिति के सामने यह भी दावा किया कि टेंडर की कुछ शर्तों में किए गए बदलावों से एक विशेष कंपनी को लाभ मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को इस तरह बदला गया जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई. हालांकि यह सार्थक का दावा है और इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है.

बता दें कि यह विवाद सिर्फ टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं है. OSM सिस्टम को लेकर इस साल कई छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठाए थे. इसी पृष्ठभूमि में सार्थक की रिसर्च और दस्तावेजों के विश्लेषण ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा.

अब आगे क्या होगा?

संसदीय समिति ने सार्थक की प्रस्तुति सुनी है. समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने मामले पर CBSE का पक्ष भी मांगा है. अब निगाह इस बात पर है कि CBSE इन आरोपों और सवालों पर क्या जवाब देता है तथा क्या समिति इस मामले में आगे कोई सिफारिश करती है.

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