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ससुराल या मायके के पास होगी महिला शिक्षामित्रों की पोस्टिंग, नहीं करनी होगी लंबी दूरी की यात्रा, मिलेगा फायदा

महिला शिक्षामित्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अब उन्हें घर से दूर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि अब उनकी तैनाती घर के पास ही होगी. लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला शिक्षामित्रों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. 

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महिला शिक्षामित्रों को नहीं करनी होगी लंबी दूरी की यात्रा.  (Photo: Representational)
महिला शिक्षामित्रों को नहीं करनी होगी लंबी दूरी की यात्रा. (Photo: Representational)

परिषदीय विद्यालय में तैनात महिला शिक्षामित्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने महिला शिक्षामित्रों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब विवाहित महिला शिक्षामित्रों की तैनाती उनके मायके या ससुराल के पास ही की जाएगी. सरकार ने म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा भी देने का फैसला किया है, जिससे शिक्षामित्र अपने पारिवारिक दायित्वों के साथ बेहतर तरीके से नौकरी कर सकें. 

सीएम ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिक्षामित्रों के बैंक खाते खुलवाए जाएं ताकि उनका मानदेय सीधे खाते में ट्रांसफर हो सके. 

कई शिक्षामित्र हुई सम्मानित 

समारोह में चयनित शिक्षामित्रों को सीएम योगी ने सम्मानित किया और बढ़े हुए मानदेय के चेक भी सौंपे. इस कदम को शिक्षामित्रों के हित में बड़ा सुधार माना जा रहा है. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नियमों के खिलाफ शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने की कोशिश की गई थी, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सेवाएं समाप्त हो गई थीं. उस समय लाखों परिवार प्रभावित हुए थे, लेकिन राज्य सरकार ने निर्णय लेकर उनकी सेवाएं जारी रखीं और उन्हें सहयोग देने का रास्ता चुना. 

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ऑपरेशन कायाकल्प का भी किया जिक्र 

इसके साथ ही सीएम ने ऑपरेशन कायाकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के स्कूलों की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है. बुनियादी सुविधाएं जहां पहले 30-36 प्रतिशत तक सीमित थीं, अब 96-99 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं. वहीं ड्रॉपआउट दर भी 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत है. 

इसमें बड़ी संख्या में ऐसी महिला शिक्षामित्रों को शामिल किया गया जिनकी भर्ती के दौरान शादी नहीं हुई थी लेकिन कुछ सालों बाद जब उनकी शादी किसी अन्य जिले में या क्षेत्र में हो गई. इससे कई लोगों ने नौकरी छोड़ दी तो कुछ को बच्चों को पढ़ाने के लिए लंबी दूरी की यात्रा तय करनी होती थी या ससुराल से मायका आना पड़ता था.    

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