
लाल आतंक और गोलियों की तड़तड़ाहट के लिए जाना जाने वाला बस्तर अब एक नई इबारत लिख रहा है. जिस अबूझमाड़ के जंगलों में कभी खौफ का सन्नाटा पसरा रहता था और जहां जवानों के बूटों की आवाजें गूंजती थीं, आज उसी जगह स्कूल यूनिफॉर्म पहने छोटे-छोटे बच्चों की हंसी गूंज रही है.
बस्तर संभाग के इतिहास में पहली बार एक ऐसा कमाल हुआ है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है. 15 सालों तक आईटीबीपी (ITBP) और सीआरपीएफ (CRPF) के जिस भाटपाल सुरक्षा कैंप से नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाए जाते थे, आज वही बंकर और बैरक आदिवासी बच्चों के सपनों का आशियाना बन चुका है. अबूझमाड़ का भाटपाल कैंप कभी नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलों का सबसे मजबूत ठिकाना हुआ करता था. लेकिन जैसे-जैसे इलाके में शांति लौटी, प्रशासन ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया.
11 अगस्त 2026 से इस पुराने सुरक्षा परिसर को पूरी तरह से एसटी (ST) बालक छात्रावास में बदल दिया गया. जहां कभी हथियार और सुरक्षा बल मुस्तैद रहते थे, वहां अब कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक के 150 से ज्यादा आदिवासी छात्र रह रहे हैं और पढ़ाई कर रहे हैं.
एक ही कैंपस में दो हॉस्टल, स्कूल भी सिर्फ 50 मीटर दूर!
प्रशासन ने इस भाटपाल कैंपस को दो हिस्सों में बांटकर दूर-दराज के गांवों से आने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई की पूरी राह आसान कर दी है. यहां प्री-मैट्रिक छात्रावास (कक्षा 6वीं से 10वीं) में 100 सीटें स्वीकृत थीं, लेकिन बच्चों का उत्साह ऐसा कि फिलहाल 114 छात्र यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास यानी कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए 50 सीटों की क्षमता है और फिलहाल 39 छात्र रह रहे हैं.

सबसे खास बात यह है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इस हॉस्टल परिसर से महज 50 मीटर की दूरी पर है. एजुकेशन सिटी कुतुल से जुड़े छात्रों को भी इस आवासीय सुविधा का सीधा फायदा मिल रहा है.

अब कुरुशनार में भी बनेगा नया हॉस्टल!
पहले घने जंगलों और दूर-दराज के गांवों से आने वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर में कमरा किराए पर लेना पड़ता था, जिससे गरीब आदिवासी परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था. लेकिन अब उन्हें सुरक्षित माहौल में रहने और खाने की मुफ्त सुविधा मिल रही है. भाटपाल के इस सफल प्रयोग के बाद अब प्रशासन का हौसला और बढ़ गया है. अब कुरुशनार में भी एक और सुरक्षा कैंप को खाली कराकर लड़कियों के लिए हॉस्टल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है.