उत्तर प्रदेश में 32,679 पदों के लिए आयोजित हो रही सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर इस समय पूरे देश की नजरें सूबे की कानून व्यवस्था पर टिकी हैं. हाल के दिनों में देश भर में पेपर लीक और सॉल्वर गैंग को लेकर फैले आक्रोश के बीच, यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के सामने इस परीक्षा को पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ कराना इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है.
इस महा-परीक्षा की जमीनी हकीकत, सुरक्षा इंतजामों और नए कड़े नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड के डीआईजी व सचिव सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने 'aajtak.in' से खास बातचीत की. उन्होंने साफ संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे.
30 हजार लाइव कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर
75 जनपदों के 1,183 परीक्षा केंद्रों की निगरानी करना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन भर्ती बोर्ड ने इसके लिए एक अभेद्य सुरक्षा ढांचा तैयार किया है. सचिव सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि परीक्षा की मॉनिटरिंग के लिए तीन स्तरों पर कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं. पहला परीक्षा केंद्र पर, दूसरा जिला स्तर पर और तीसरा सीधे भर्ती बोर्ड के मुख्य कार्यालय में.
सभी परीक्षा केंद्रों और उनके एक-एक कक्ष (क्लासरूम) में कुल मिलाकर 30 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. ये सभी कैमरे लाइव हैं और परमानेंट चालू हैं. यही नहीं, चूंकि यह तकनीक का युग है, इसलिए साधारण कैमरों के बजाय एआई (AI) बेस्ड कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है. इसके जरिए इनविजिलेटर (कक्ष निरीक्षक) से लेकर छात्रों की संदिग्ध गतिविधियों और उनके मूवमेंट पैटर्न पर कंट्रोल रूम से त्वरित नजर रखी जा रही है.
कर्मचारियों का भी होगा बायोमेट्रिक टेस्ट
अक्सर देखा गया है कि परीक्षा केंद्रों के अंदर मौजूद कर्मचारियों की मिलीभगत से सॉल्वर गैंग सक्रिय होते हैं. इस बार इस लूपहोल को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज (सचिव, भर्ती बोर्ड) ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात हर एक कार्मिक के लिए भर्ती बोर्ड ने स्पेशल ऑथराइज्ड एंट्री कार्ड (आई-कार्ड) जारी किया है. केंद्र में प्रवेश से पहले इन कर्मचारियों की न सिर्फ प्रॉपर चेकिंग और फ्रिस्किंग होगी, बल्कि उनका बायोमेट्रिक टेस्ट भी कराया जाएगा.
इस कड़े कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अनाधिकृत बाहरी व्यक्ति कर्मचारी के भेष में सॉल्वर गैंग का मददगार बनकर अंदर न घुस सके.
1 करोड़ जुर्माना और आजीवन कारावास
उत्तर प्रदेश सरकार के नए सख्त नकल विरोधी कानून के तहत इस परीक्षा में कार्रवाई की जाएगी. अगर कोई भी सॉल्वर गैंग या पेपर लीक माफिया पकड़ा जाता है, तो कानून का शिकंजा बेरहम होगा.
पहली बार पकड़े जाने पर: 7 साल की सजा और ₹25 लाख का भारी जुर्माना.
दोबारा अपराध करने पर: आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा और ₹1 करोड़ तक का आर्थिक दंड.
गैंगस्टर एक्ट: दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी.
धार्मिक चिन्हों को नहीं छुआ जाएगा
अक्सर परीक्षाओं में चेकिंग के नाम पर कलावा काटने या महिलाओं के मंगलसूत्र उतरवाने को लेकर विवाद और आक्रोश की स्थिति बन जाती है. इस पर भर्ती बोर्ड का रुख पूरी तरह संवेदनशील और स्पष्ट है.
सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि परीक्षार्थियों के लिए कलावा धागा, मंगलसूत्र या किसी भी अन्य धार्मिक चिन्ह को उतारने की कोई आवश्यकता नहीं है. चेकिंग स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है कि वे धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं. हालांकि, यदि किसी छात्र पर कोई संदेह होता है कि उसमें ब्लूटूथ या कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा है, तो उसकी अलग से सघन चेकिंग जरूर की जाएगी.