नीट परीक्षा शुरू होने से पहले मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कैसे होते थे यह जानना जरूरी है. उस समय प्राइवेट कॉलेजों में कोई एंट्रेंस टेस्ट नहीं होता था और सीटें सीधे डोनेशन पर बिकती थीं. कई लाखों रुपये तक फीस डोनेशन के तौर पर ली जाती थी, जो एक बड़े भ्रष्टाचार का रूप था. यह सिस्टम छात्रों और उनके परिवारों के लिए बहुत कठिनाई भरा था.