बिहार के रहने वाले शरद सागर ने जब अमेरिका छोड़ा था, तो उनके दोस्तों ने उनके खूब मजाक उड़ाया था. दरअसल, शरद सागर ने अमेरिका में पढ़ाई, शानदार नौकरी और आलीशान जिंदगी छोड़कर भारत आने का फैसला किया. उन्हें भरोसा था कि वह वापस अब तब ही अमेरिका जाएंगे जब, वहां के राष्ट्रपति उन्हें बुलाएंगे. दोस्तों से मजाक में कही ये बात सच साबित हो जाएगी किसी ने नहीं सोचा था. उस समय अमेरिका के बराक ओबामा ने उन्हें व्हाइट हाउस में आयोजित एक खास कार्यक्रम के लिए न्योता दिया.
क्या है पूरी कहानी?
जब अमेरिका में शरद अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने की तैयारी कर रहे थे, तब वहां पर उनके दोस्त उनके इस फैसले को समझ नहीं पा रहे थे और उनका मजाक उड़ा रहे थे. उनका कहना था कि भला शानदार शानदार कॉरपोरेट नौकरी और लग्जरी लाइफस्टाइल छोड़कर आखिर कोई अपने देश क्यों वापस जाना चाहेगा? लेकिन दोस्तों के इन सवालों पर शरद ने कुछ ऐसा कहा कि वह हैरान रह गए. पहले तो उन्हें ये बात मजाक लगी लेकिन बाद में यही बात सही साबित हो गई.
10 साल होने पर शेयर किया वीडियो
उन्होंने अपने दोस्तों को कहा था कि वह अब तब ही अमेरिका वापस आएंगे, जब उन्हें राष्ट्रपति बुलाएंगे. आखिरकार सितंबर 2016 में उनके पास एक कॉल आई, जिसने उनकी कही बात को सच कर दिया. उस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें व्हाइट हाउस में निमंत्रित किया था. अब करीब 10 साल बाद उन्होंने उन पलों को याद करते हुए वीडियो शेयर किया है. इस दौरान उन्होंने बताया कि 3 अक्टूबर 2016 को व्हाइट हाउस में हुए खास कार्यक्रम में दुनियाभर के चुनिंदा क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और सोशल चेंज लाने वाले लीडर्स शामिल हुए थे.
9 घंटे का समय
इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस में करीब 9 घंटे का समय बिताया. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बिताए गए अमूल्य 90 मिनट भी शामिल थे. उनकी यह सफलता केवल व्हाइट हाउस में जाने तक सीमित नहीं थी बल्कि 16 साल की उम्र में डेक्सटेरिटी ग्लोबल’ की नींव रखी थी. इसका उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के छात्रों को लीडरशिप और हायर एजुकेशन के बेहतरीन मौके दिलाना था.
कहां से की पढ़ाई ?
2016 में उन्होंने मैसाचुसेट्स की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया, जहां उन्होंने इंटरनेशनल रिलेशंस और डिप्लोमेसी की पढ़ाई की थी. उस समय 'द टेलीग्राफ' ने रिपोर्ट किया था कि डेक्सटेरिटी ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप, लीडरशिप, स्किल्स और यूनिवर्सिटीज तक पहुंच जैसे प्रोग्राम्स के जरिए छात्रों के लिए मौके बनाने का काम करती थी.