विदेशों में नौकरी करने का सपना कई भारतीय युवाओं का होता है. केवल इसलिए नहीं क्योंकि वहां पर अच्छी सैलरी मिलती है बल्कि इसलिए भी क्योंकि वहां का काम करने का तरीका बहुत अलग होता है. सोशल मीडिया पर आपको कई तरह के वीडियो और पोस्ट मिल जाएंगे, जो विदेशों में ऑफिस कल्चर के बारे में बताते हैं. ऐसा ही एक पोस्ट भारतीय प्रोफेशनल सिमरन खोखा ने शेयर की है. उन्होंने जर्मनी के ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों के बारे में ऐसी बातें बताई हैं जिसके बारे में जानकर भारतीय कर्मचारी को अक्सर हैरान कर देती है.
कैप्शन में किया इन बातों का जिक्र
सिमरन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया. उस वीडियो के कैप्शन में उन्होंने जर्मनी के ऑफिस में काम करने के तरीकों को शेयर किया है. उन्होंने लिखा कि किसी मीटिंग में आपका मैनेजर आपके आइडिया को रिजेक्ट कर सकता है लेकिन कुछ समय बाद वह आपके साथ कॉफी पीते हुए सामान्य बातचीत करता नजर आएगा. मतलब साफ है कि काम से जुड़ी असहमति पर्सनल रिश्तों पर असर नहीं डालती है.
देर रात तक काम करना है बुरी आदत
सिमरन ने आगे लिखा कि भारत में देर तक काम करने को ही मेहनत माना जाता है लेकिन जर्मनी में ऐसा नहीं है. यहां पर अगर कोई कर्मचारी बार-बार इस बात पर फोकस करता है कि उसने देर रात तक काम किया है, तो वह सोचते हैं कि आपकी प्लानिंग या काम करने की क्षमता में कमी है.
ईमेल के जरिए सॉल्व होते हैं प्रॉब्लम
उन्होंने आगे पोस्ट में लिखा कि जर्मनी के कई ऑफिस में अगर किसी मुद्दे को ईमेल के जरिए सुलझाया जा सकता है, तो लोग वहां पर पूछ सकते हैं कि आखिर मीटिंग की क्या आवश्यकता है?
सीनियर आधिकारियों पर उठा सकते हैं सवाल
उन्होंने इस बात पर भी फोकस किया कि जर्मनी के ऑफिस में जूनियर कर्मचारी भी सीनियर अधिकारियों की बातों पर सवाल उठा सकते हैं अगर वह गलत हैं तो.
नो कहने की आदत
जर्मनी के ऑफिसेस में लोग हमेशा सीधे बात करते हैं. अगर उन्हें किसी काम के लिए मना करना है, तो वे बातों को घूमाते नहीं हैं सीधे नो कह देते हैं.
पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को बैलेंस करने पर जोर
जर्मनी में लोग अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग रखना पसंद करते हैं. यही वजह है कि कई सालों तक एक -दूसरे के साथ काम करने के बाद भी एक-दूसरे को पर्सनल सोशल मीडिया अकाउंट पर नहीं जोड़ते.
ऐसे होता है इंटरव्यू
जर्मनी में नौकरी पाने के लिए केवल इंटरव्यू से नहीं गुजरना होता है बल्कि कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वो कंपनी की स्ट्रैटेजी, वर्किंग स्टाइल और चुनौतियों से जुड़े अच्छे सवाल पूछें. इसे अलावा भी उन्होंने कई तरह की बातें बताई हैं जो भारतीय वर्क कल्चर से काफी अलग है.