एक दौर था जब दुनिया के हर इंजीनियरिंग और टेक स्टूडेंट का सबसे बड़ा सपना होता था, 'Google' में नौकरी पाना. शानदार ऑफिस, मुफ्त का खाना, आलीशान सुविधाएं और करोड़ों का पैकेज. लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस बूम ने ग्लोबल जॉब मार्केट की पूरी तस्वीर बदल दी है. हालात यह हैं कि अब सालाना करीब ₹8 करोड़ ($986,000) कमाने वाले कर्मचारी भी गूगल की नौकरी को 'बाय-बाय' कह रहे हैं.
आखिर क्यों टेकर्स के बीच गूगल जैसी ड्रीम कंपनी को छोड़ने की होड़ मची है? मशहूर अमेरिकी बिजनेस वेबसाइट 'बिजनेस इनसाइडर' की एक हालिया रिपोर्ट में गूगल के इस अंदरूनी बदलाव और कर्मचारियों के बदलते मूड को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं.
भारी पड़ रहा 'लाइफ चेंजिंग मनी' का लालच
इस रिपोर्ट के मुताबिक गूगल में बतौर अकाउंट एग्जीक्यूटिव काम करने वाले यूसुफ इमरान (41 वर्ष) ने हाल ही में कंपनी छोड़ दी. साल 2026 में उनका सालाना पैकेज ₹8 करोड़ से ज्यादा था. यूसुफ ने बातचीत के दौरान बताया कि गूगल बहुत अच्छा पैसा देता है, लेकिन इस समय OpenAI (चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी) और Anthropic जैसी नई AI कंपनियों में मिलने वाला 'इक्विटी पैकेज' (शेयर) एक अलग ही लेवल पर है. टेक प्रोफेशनल्स को लग रहा है कि नई एआई कंपनियों में शुरुआती दौर में जुड़ने से वे 'लाइफ-चेंजिंग' पैसा कमा सकते हैं, जो गूगल की बंधी-बंधाई सैलरी से कई गुना ज्यादा होगा.
बार-बार होने वाली छंटनी ने तोड़ा भरोसा
गूगल की पहचान हमेशा से एक ऐसी कंपनी के रूप में थी जहां नौकरी पूरी तरह सुरक्षित रहती थी. लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में कंपनी द्वारा 12,000 कर्मचारियों (लगभग 6% वर्कफोर्स) को निकालने और उसके बाद भी लगातार की जा रही छोटी छंटनी ने कर्मचारियों का भरोसा हिला दिया है. अब टेकर्स को लगता है कि गूगल जैसी बड़ी कंपनी में बने रहना भी पूरी तरह से सेफ नहीं है.
'बड़ी मशीन का छोटा पुर्जा' नहीं बनना चाहते युवा
गूगल छोड़ने वाली एक अन्य टेक प्रोफेशनल आशना दोषी ने 'बिजनेस इनसाइडर' से कहा कि बड़ी टेक कंपनियों में आप एक बहुत बड़ी मशीन के बेहद छोटे पुर्जे की तरह काम करते हैं. वहां आपको तुरंत फैसले लेने और अपने काम का सीधा असर देखने का मौका नहीं मिलता. यही वजह है कि युवा अब गूगल की सुरक्षित नौकरी छोड़कर खुद का 'एआई स्टार्टअप' (AI Startup) शुरू करने का रिस्क ले रहे हैं.
ऑफिस की सुविधाओं और बजट में कटौती
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में गूगल ने अपने ऑफिस कैफे के वर्किंग ऑवर्स घटाए हैं, ट्रैवल बजट कम किया है और टीम इवेंट्स या फेस्टिव सेलिब्रेशन के खर्चों में भी कटौती की है. साथ ही 'वर्क फ्रॉम होम' की पॉलिसियों को भी सख्त कर दिया गया है. इन छोटी-छोटी कटौतियों ने भी कर्मचारियों के अनुभव को बदला है.
बता दें कि ग्लोबल मार्केट का यह ट्रेंड भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए भी एक बड़ा सबक है. एआई के इस दौर में अब सिर्फ 'बड़ी कंपनी का टैग' काफी नहीं है. आज का युवा रिस्क लेने, खुद का स्टार्टअप खड़ा करने और नई तकनीकों (जैसे जेनरेटिव एआई) में महारत हासिल करके बड़ा दांव खेलने को तैयार है.