scorecardresearch
 

12वीं फेल से 300 करोड़ की कंपनी के VP तक... आंखों में आंसू ला देगी अश्विनी कुमार की कहानी!

अश्विनी कुमार ने 40 साल की उम्र में आरामदायक नौकरी और वाइस प्रेसिडेंट का पद छोड़कर खुद का स्टार्टअप शुरू किया. उनकी कहानी संघर्ष, बीमारी, आर्थिक तंगी और व्यक्तिगत नुकसान के बावजूद हिम्मत और रिस्क लेने की प्रेरणा देती है. उन्होंने कई बार असफलताओं का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी और अंततः अपने बिजनेस को 100 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री तक पहुंचाया.

Advertisement
X
सोशल मीड‍िया में वायरल हुए थे अश्व‍िनी कुमार, संघर्ष से भरी है इनकी कहानी
सोशल मीड‍िया में वायरल हुए थे अश्व‍िनी कुमार, संघर्ष से भरी है इनकी कहानी

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक शख्स ने बताया कि कैसे उसने 40 साल की उम्र में आरामदायक जिंदगी, शानदार सैलरी और एक 300 करोड़ रुपये की कंपनी में 'वाइस प्रेसिडेंट' (VP) का रुतबा छोड़कर खुद का स्टार्टअप शुरू किया. उनकी इस हिम्मत ने लाखों लोगों को प्रेरित किया. यह सक्सेस स्टोरी थी अश्विनी कुमार की.

अक्सर लोग किसी की सफलता का सिर्फ चमकीला हिस्सा देखते हैं, लेकिन उस सफलता के पीछे संघर्षों की कितनी गहरी खाई होती है, यह बहुत कम लोग जानते हैं. आज हम आपको अश्विनी कुमार के उस सफर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आपको अहसास होगा कि जिंदगी चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न खड़ी कर दे, अगर आपमें रिस्क लेने का हौसला है तो आप कभी हार नहीं सकते.

एक कमरे का घर, ₹2500 की नौकरी

अश्विनी कुमार का जन्म किसी बड़े शहर या अमीर घराने में नहीं हुआ था. पंजाब के होशियारपुर के एक छोटे से कस्बे में उनका बचपन बीता, जहां पूरा परिवार एक कमरे के किराए के मकान में रहता था. पिता इकलौते कमाने वाले थे और बेहद सीमित आय में घर चलता था.

Advertisement

17 साल की उम्र में उन्होंने एक कंप्यूटर सेंटर से सीखना शुरू किया और नेटवर्क मार्केटिंग की दुनिया को देखा. शुरुआत में 6 महीने तक लगातार रिजेक्शन मिले, लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन यहीं से उन्होंने लोगों को समझना और लीडरशिप सीखी. 18 साल की उम्र में जब वे 12वीं की परीक्षा में फेल हुए, तो समाज की नजरों में वे पूरी तरह असफल हो चुके थे. हालात ऐसे बने कि उन्हें एक बार घर तक छोड़ना पड़ा. 20 साल की उम्र में उन्हें पहली नौकरी मिली, जिसकी सैलरी सिर्फ ₹2500 थी.

करोड़पति बनने के बाद सब कुछ हुआ तबाह, टीबी ने घेरा
21 साल की उम्र में अश्विनी ने अपनी पहली कंपनी शुरू की. लोगों ने कहा कि नहीं चलेगी, लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे ही साल कंपनी ने करीब 2 करोड़ रुपये का टर्नओवर पार कर लिया. इस कामयाबी में उनकी पत्नी हरदीप कौर का सबसे बड़ा हाथ था, जिन्होंने अपनी अच्छी-भली नौकरी छोड़कर अश्विनी के सपने को अपना बना लिया था.

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 23 साल की उम्र में अश्विनी को टीबी (TB) हो गई. छह महीने तक वे जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे. इसी बीमारी के दौरान 24 साल की उम्र में उनका यह सफल स्टार्टअप पूरी तरह तबाह हो गया. करोड़ों का कारोबार खत्म हो गया और अश्विनी एक बार फिर आर्थिक रूप से 'शून्य' पर आ गए.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मां ने 3 दिन बात नहीं की, "मां ने 3 दिन बात नहीं की, पत्नी ने कहा पागल… सोशल मीडिया पर स्टार्टअप फाउंडर की कहानी वायरल

जिंदगी का सबसे बड़ा झटका: पत्नी का साथ छूटा
27 साल की उम्र में अश्विनी की जिंदगी में वो काला दिन आया जिसने उन्हें भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया. उनकी पत्नी हरदीप इस दुनिया को छोड़कर चली गईं. वह सिर्फ उनकी हमसफर नहीं थीं, बल्कि उनके सपनों की सबसे बड़ी ताकत थीं.

जाने से पहले हरदीप की आखिरी इच्छा और उनकी लिखी चिट्ठियों में बस एक ही संदेश था, 'हार मत मानना, तुम्हें बहुत बड़ा करना है.' पत्नी के इन्हीं आखिरी शब्दों को अश्विनी ने अपनी नई जिंदगी की नींव बनाया. उन्होंने खुद को संभाला और कॉरपोरेट जगत में दोबारा कदम रखा.

₹2 करोड़ से ₹100 करोड़ तक पहुंचाया बिज़नेस
अश्विनी कॉरपोरेट जगत में आगे बढ़ते हुए एक कंपनी से जुड़े. अपनी रणनीति और कड़ी मेहनत के दम पर वे कंपनी के वाइस प्रेस‍िडेंट (सेल्स एंड मार्केट‍िंग) बने. उनके नेतृत्व में कंपनी ने 150 से अधिक शहरों में विस्तार किया और 2 करोड़ के बिजनेस को 100 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री तक पहुंचाया. अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने 1500 करोड़ रुपये से अधिक का बिजनेस जनरेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Advertisement

कोविड, एक्सीडेंट और फिर से उठ खड़े होने का जज्बा
जब सब कुछ ठीक चल रहा था, तब साल 2020 में नियति ने फिर परीक्षा ली. अश्विनी को दो बार गंभीर कोविड हुआ, उसी दौरान आर्थिक संकट आया और बमुश्किल 6 महीने की सेविंग्स बचीं. इसी बीच एक गंभीर सड़क दुर्घटना में वे बुरी तरह घायल हो गए और महीनों तक बिस्तर पर रहे.

लेकिन अश्विनी रुकने वाले नहीं थे. उन्होंने इस दौरान बिजनेस मैनेजमेंट में अपनी PhD पूरी की. साल 2024 में उन्होंने अपनी इस आरामदायक कॉरपोरेट नौकरी और वाइस प्रेसिडेंट के बड़े पद को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और शुरू कर दी खुद की कंपनी... अब वो युवाओं को सोशल मीड‍िया से खूब प्रेरित करते हैं. 

अश्विनी कुमार की यह कहानी हमें सिखाती है कि असफलता, बीमारी, आर्थिक तंगी या किसी अपने को खोने का गम आपकी जिंदगी का अंत नहीं होता. जब तक आपके भीतर खुद पर भरोसा और रिस्क लेने का साहस जिंदा है, आप हर बार शून्य से शुरुआत करके एक नया इतिहास रच सकते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement