कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद अच्छी नौकरी मिलना कभी युवाओं का सबसे बड़ा सपना हुआ करता था. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में यह सपना पहले से ज्यादा मुश्किल होता दिख रहा है. अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में हालिया ग्रेजुएशन सेरेमनी में छात्रों ने नौकरी और AI को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की. सवाल सिर्फ अमेरिका का नहीं है. भारत में भी इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे लाखों छात्र यही सोच रहे हैं कि आखिर AI उनके करियर को किस तरह बदलने वाला है.
अमेरिकी शिक्षा वेबसाइट The Hechinger Report के मुताबिक, AI की वजह से सबसे ज्यादा खतरा उन नौकरियों पर मंडरा रहा है जिन्हें अब तक करियर की शुरुआत माना जाता था. इनमें डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग, रिपोर्ट तैयार करना, रिसर्च असिस्टेंस और ग्राहक सेवा जैसी भूमिकाएं शामिल हैं.
दरअसल, कंपनियां अब ऐसे कई काम AI टूल्स से करवाने लगी हैं जिन्हें पहले नए कर्मचारी संभालते थे. इससे एंट्री-लेवल पदों की संख्या घट रही है और फ्रेशर्स के लिए नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है.
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा, लेकिन नई तरह की नौकरियां भी पैदा होंगी. आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स और AI मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की भारी मांग हो सकती है.
इंजीनियरिंग और MBA के छात्रों को अब क्या सीखना होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ डिग्री के भरोसे नौकरी पाने का दौर तेजी से बदल रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में सिर्फ वही प्रोफेशनल सफल होंगे जो AI को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि अपने सहायक के तौर पर इस्तेमाल करना सीखेंगे.अब कंपनियां ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं जो AI के साथ काम करना जानते हों. इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों के लिए ये स्किल्स अहम होती जा रही हैं.
क्या भारतीय कॉलेज इस बदलाव के लिए तैयार हैं?
भारत में हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और दूसरे प्रोफेशनल कोर्सों से निकलते हैं. लेकिन बड़ी संख्या में कॉलेज अब भी पुराने सिलेबस पर निर्भर हैं. कई संस्थानों ने AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करना शुरू किया है, लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि यह बदलाव अभी पर्याप्त नहीं है. कॉलेजों और कंपनियों के बीच तालमेल की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में सिर्फ तकनीकी ज्ञान काफी नहीं होगा. छात्रों को इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अनुभव भी जुटाना होगा.
डिग्री नहीं, स्किल तय करेगी भविष्य
AI को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन विशेषज्ञ इसे सिर्फ खतरे के रूप में नहीं देखते. उनका मानना है कि तकनीक हमेशा नौकरियों का स्वरूप बदलती रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार बदलाव की रफ्तार बहुत तेज है.
ऐसे में सवाल यह नहीं है कि AI नौकरियां ले जाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि आज के छात्र इस बदलाव के लिए खुद को कितनी जल्दी तैयार कर पाते हैं. क्योंकि आने वाले समय में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि नई स्किल और लगातार सीखने की क्षमता ही करियर की असली गारंटी होगी.