अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में अपनी ताकत और बढ़ा रही है. अब अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने की तैयारी कर रही है. यह कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) हो सकता है.
यह खबर ऐसे समय में आई है जब ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं. युद्ध दूसरा हफ्ता चल रहा है. पहले से ही USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फोर्ड क्षेत्र में तैनात हैं. तीसरा कैरियर आने से अमेरिका की हवाई और समुद्री ताकत बहुत मजबूत हो जाएगी.
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तीसरा कैरियर क्यों भेजा जा रहा है और वर्तमान स्थिति
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका ने अब तक बहुत सारे हमले किए हैं. क्षेत्र में पहले से दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं – USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में और USS गेराल्ड आर. फोर्ड रेड सी में पहुंच चुका है. USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने हाल ही में अटलांटिक महासागर में अपनी अंतिम ट्रेनिंग एक्सरसाइज (COMPTUEX) पूरी की है.

यह एक्सरसाइज 5 मार्च 2026 को खत्म हुई. अब यह कैरियर डिप्लॉयमेंट के लिए तैयार है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कैरियर जल्द ही पूर्वी भूमध्य सागर या मध्य पूर्व की तरफ रवाना हो सकता है. इससे क्षेत्र में तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक साथ होंगे जो हाल के दशकों में बहुत कम देखा गया है. यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने और बड़े हमलों की तैयारी दिखाता है.
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की मुख्य विशेषताएं
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश निमित्ज क्लास का आखिरी और 10वां न्यूक्लियर पावर्ड सुपरकैरियर है. इसका पूरा नाम USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN-77) है. यह अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है. इसकी कुल लंबाई 1,092 फीट (लगभग 333 मीटर) है. फ्लाइट डेक की चौड़ाई 252 फीट (लगभग 77 मीटर) है. इसका ड्राफ्ट (पानी में गहराई) 37 फीट (लगभग 11 मीटर) है.
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पूरा वजन करीब 1,02,000 टन है. यह न्यूक्लियर रिएक्टर से चलता है जिसमें 2 A4W न्यूक्लियर रिएक्टर लगे हैं. इससे यह लगभग 56 किमी/घंटा पकड़ सकता है. बिना रिफ्यूलिंग के कई साल तक चल सकता है.
इस कैरियर पर कितने विमान और हथियार होते हैं
यह कैरियर एक तैरता हुआ एयरबेस है. इसमें 60 से 75 तक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर रखे जा सकते हैं. इसमें F/A-18 सुपर हॉर्नेट, F-35C लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर, E-2 हॉकआई अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट, EA-18G ग्राउलर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्लेन और MH-60 हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं.

कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और सबमरीन भी होते हैं जो मिसाइल डिफेंस देते हैं. इस पर कई डिफेंस सिस्टम जैसे फालैंक्स CIWS, RAM मिसाइल और सी स्पैरो मिसाइल लगे हैं. यह दुश्मन के हवाई हमलों से खुद को बचा सकता है. दूर तक हमला कर सकता है.
यह तैनाती युद्ध में क्या बदलाव लाएगी
तीसरा कैरियर आने से अमेरिका के पास मध्य पूर्व में बहुत ज्यादा हवाई ताकत होगी. हर कैरियर से रोजाना सैकड़ों सॉर्टी (उड़ानें) हो सकती हैं. इससे ईरान के मिसाइल ठिकानों, नौसेना और अन्य जगहों पर लगातार हमले किए जा सकेंगे. ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों का जवाब देना आसान हो जाएगा.
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अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह डिप्लॉयमेंट युद्ध को तेज करने या ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने का संकेत है. लेकिन नौसेना पर दबाव भी बढ़ेगा क्योंकि तीन कैरियर एक साथ रखना बहुत बड़ा काम है.
अमेरिका ईरान युद्ध में अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है. USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश का आना क्षेत्र में तनाव और बढ़ा देगा. पूरी दुनिया इस पर नजर रखे हुए है कि युद्ध कितना बड़ा होगा और क्या ईरान जवाब देगा. अमेरिकी नौसेना की यह तैयारी दिखाती है कि वह लंबे समय तक लड़ाई के लिए तैयार है.