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भारतीय वायुसेना ने रॉयल थाई एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास किया

9-12 फरवरी 2026 को इंडियन ओशन रीजन में IAF के Su-30MKI और IL-78 टैंकरों ने RTAF के SAAB Gripen जेट्स के साथ एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग की. अंडमान-निकोबार से ऑपरेशन हुआ. यह 'एक्ट ईस्ट' नीति का हिस्सा है, जो दोनों देशों की इंटरऑपरेबिलिटी और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है.

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भारतीय वायुसेना थाईलैंड की वायुसेना के साथ युद्धाभ्यास करती हुई. (Photo: ITG)
भारतीय वायुसेना थाईलैंड की वायुसेना के साथ युद्धाभ्यास करती हुई. (Photo: ITG)

भारतीय वायुसेना (IAF) ने 9 से 12 फरवरी 2026 तक इंडियन ओशन रीजन में रॉयल थाई एयर फोर्स (RTAF) के साथ एक संयुक्त 'इन-सिटू' (स्थानीय) एयर एक्सरसाइज की. यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने और आपसी समझ बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है.

अभ्यास का नाम और उद्देश्य

यह अभ्यास एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग पर केंद्रित था. इसका मुख्य उद्देश्य...

दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और इंटरऑपरेबिलिटी (एक-दूसरे के साथ काम करने की क्षमता) बढ़ाना. इंडियन ओशन रीजन में IAF की पहुंच और लॉन्ग-रेंज ऑपरेशंस दिखाना. फ्रेंडली फॉरेन कंट्री (FFC) के साथ मिलकर बेस्ट प्रैक्टिसेस का आदान-प्रदान करना. यह अभ्यास भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी का हिस्सा है, जो थाईलैंड के साथ एयरोस्पेस क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ा रहा है.

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कौन-कौन से विमान शामिल हुए?

भारतीय वायुसेना (IAF)... Su-30MKI मल्टी-रोल फाइटर जेट्स (मुख्य लड़ाकू विमान). IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर (लंबी दूरी की उड़ान के लिए ईंधन भरना). AWACS और AEW&C (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) – हवाई निगरानी और कमांड के लिए.

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रॉयल थाई एयर फोर्स (RTAF)... SAAB Gripen जेट्स (स्वीडिश मूल के मल्टी-रोल फाइटर). IAF के विमान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयरबेस से उड़े, जबकि थाई Gripens थाईलैंड के एयरबेस से. यह 'इन-सिटू' अभ्यास था, यानी दोनों पक्ष अपने-अपने बेस से ऑपरेट कर रहे थे, लेकिन हवाई क्षेत्र में मिलकर ट्रेनिंग की.

joint air exercise

अभ्यास कैसे हुआ?

  • Su-30MKI और Gripen जेट्स ने एयर कॉम्बैट मैन्यूवर्स किए – जैसे डॉगफाइट, इंटरसेप्शन और टारगेट ट्रैकिंग.
  • IL-78 टैंकरों ने Su-30MKI को मिड-एयर में ईंधन भरा, जिससे वे लंबी दूरी तक उड़ सके.
  • AWACS और RTAF के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (GCI) ने हवाई निगरानी और कमांड प्रदान की.
  • अभ्यास मलक्का स्ट्रेट के उत्तर में हुआ, जो इंडियन ओशन और साउथ चाइना सी को जोड़ता है – एक रणनीतिक महत्वपूर्ण क्षेत्र.
  • यह अभ्यास IAF की लॉन्ग-रेंज क्षमता और आइलैंड टेरिटरी में ऑपरेशनल सस्टेनेबिलिटी दिखाता है.

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क्यों महत्वपूर्ण है यह अभ्यास?

  • क्षेत्रीय सुरक्षा: इंडियन ओशन रीजन में बढ़ते खतरे (जैसे समुद्री लेन, पाइरेसी) से निपटने के लिए दोनों देश मिलकर तैयार हो रहे हैं.
  • इंडो-थाई डिफेंस टाई: थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का महत्वपूर्ण साथी है. यह अभ्यास 'एक्ट ईस्ट' को एयरोस्पेस डोमेन में ले जा रहा है.
  • इंटरऑपरेबिलिटी: अलग-अलग विमानों (Su-30MKI vs Gripen) के साथ काम करके दोनों पक्ष एक-दूसरे की तकनीक समझते हैं, जो भविष्य के संयुक्त ऑपरेशंस में मदद करेगा.
  • रणनीतिक संदेश: मलक्का स्ट्रेट जैसे चोकपॉइंट पर अभ्यास से क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा का संदेश जाता है.

यह अभ्यास 2026 का IAF का पहला अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज था. इससे भारत-थाईलैंड की दोस्ती मजबूत हुई और इंडियन ओशन में सहयोग बढ़ा. भविष्य में ऐसे अभ्यास और बढ़ेंगे, जो दोनों देशों की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेंगे.

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