पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने हाल ही में एक सनसनीखेज बयान दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि JF-17 फाइटर जेट के लिए इतने ऑर्डर मिल रहे हैं कि छह महीने बाद पाकिस्तान को IMF से कर्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने JF-17 को आसानी से मार गिराया था.
JF-17 थंडर: पाकिस्तान-चीन का संयुक्त फाइटर जेट, क्या है इसकी विशेषताएं?
JF-17 थंडर एक हल्का, सिंगल-इंजन वाला मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (पीएसी) और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (सीएसी) ने मिलकर बनाया है. इसे FC-1 शियाओलॉन्ग के नाम से भी जाना जाता है. यह जेट मुख्य रूप से पुराने मिराज और F-7 जेट्स को रिप्लेस करने के लिए बनाया गया है.
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JF-17 की तकनीकी विशेषता...
पाकिस्तान इसे अपना गर्व मानता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें चीनी तकनीक का बड़ा हिस्सा है. पाकिस्तान केवल असेंबली करता है. राजस्व का बड़ा हिस्सा चीन को जाता है.
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ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सर्जिकल स्ट्राइक और JF-17 का अंत
इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने JF-17 को मार गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यहां जानिए कैसे हुआ यह...
7 मई को भारतीय SU-30MKI फाइटर जेट्स और राफेल एयरक्राफ्ट ने पाकिस्तान के आंतकी अड्डों और एयरफोर्स बेस पर हमला किया. पाकिस्तान ने जवाब में JF-17 थंडर जेट्स को उड़ाया, जो मल्टी-रोल होने के कारण एयर डिफेंस के लिए इस्तेमाल हो रहे थे.

मार गिराने का तरीका: भारतीय SU-30MKI ने अपनी उन्नत रडार सिस्टम (बार्स रडार) और लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों (R-77 या अस्त्र मिसाइल) का इस्तेमाल किया. एक JF-17 को SU-30MKI ने 50 किमी से ज्यादा दूरी से लॉक करके मिसाइल से मार गिराया. पाकिस्तानी जेट की कम रेंज और पुरानी तकनीक (RD-93 इंजन की सीमित पावर) के कारण वह भारतीय जेट्स की स्पीड और मैन्यूवरेबिलिटी का मुकाबला नहीं कर सका.
नुकसान: ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के प्रमुख सैन्य ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें JF-17 समेत कई जेट्स शामिल थे. यह हाई-टेक वारफेयर का उदाहरण था, जहां भारत की सटीक मिसाइलें (ब्रह्मोस या स्पाइस बॉम्ब्स) ने पाकिस्तानी डिफेंस को चकनाचूर कर दिया.
यह ऑपरेशन भारत की नई 'रिस्पॉन्स डॉक्ट्रिन' का प्रतीक बना, जहां सीमित लेकिन प्रभावी कार्रवाई से दुश्मन को सबक सिखाया गया.
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ख्वाजा आसिफ का बयान: हकीकत या हवाई दावा?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 6 जनवरी 2026 को कहा कि हमारे प्लेन का टेस्ट हो गया है. हमें इतने ऑर्डर मिल रहे हैं कि हो सकता है छह महीने बाद आईएमएफ की जरूरत न पड़े. उन्होंने JF-17 का जिक्र करते हुए दावा किया कि मई 2025 के संघर्ष ने पाकिस्तानी सेना की ताकत साबित की और अब डिफेंस एक्सपोर्ट्स से अर्थव्यवस्था सुधरेगी.
लेकिन एक्सपर्ट इसे सही नहीं मानते...
पाकिस्तान का कर्ज लगभग 300 अरब डॉलर है, और JF-17 के ऑर्डर (जैसे सऊदी अरब से संभावित 2 अरब डॉलर का डील) से इतना बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा.
ऑपरेशन सिंदूर में JF-17 की असफलता ने उल्टा पाकिस्तान की कमजोरी उजागर की. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जेट की असेंबली में पाकिस्तान का हिस्सा सीमित है. राजस्व चीन को जाता है. सोशल मीडिया पर आसिफ के बयान की खिल्ली उड़ी, जहां लोग इसे 'नशे' से जोड़कर मजाक उड़ा रहे हैं.
JF-17 एक सक्षम जेट है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारतीय तकनीक उससे आगे है. आसिफ के दावे पाकिस्तान की आर्थिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश लगते हैं, लेकिन हकीकत में आईएमएफ पर निर्भरता जारी रहेगी.