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दूनागिरी, संशोधक, अग्रय, मालवन... इन 4 वॉरशिप से समंदर में कांपेंगे भारत के दुश्मन

भारतीय नौसेना जल्द ही चार स्वदेशी युद्धपोतों - स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी, सर्वे पोत संशोधक और एंटी-सबमरीन क्राफ्ट अग्रय और मालवन को कमीशन करने जा रही है. ये पोत नौसेना की समुद्री ताकत को हिंद महासागर में बढ़ा देंगे.

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ये है नीलगिरी क्लास की आईएनएस दूनागिरी वॉरशिप. (Photo: ITG)
ये है नीलगिरी क्लास की आईएनएस दूनागिरी वॉरशिप. (Photo: ITG)

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है. भारतीय नौसेना जल्द ही चार स्वदेशी युद्धपोतों - स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी, सर्वेक्षण पोत संशोधक और दो एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय व मालवन को कमीशन करने जा रही है. ये सभी पोत पूरी तरह भारत में बने हैं. अगले कुछ हफ्तों में इनकी कमीशनिंग होने वाली है.  

दूनागिरी स्टेल्थ फ्रिगेट

प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाई गई दूनागिरी नीलगिरी क्लास की पांचवीं फ्रिगेट है. इसे कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में बनाया गया है. 30 मार्च 2026 को इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया. यह युद्धपोत अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, शक्तिशाली हथियारों और बेहतरीन ऑटोमैटिक सिस्टम से लैस है.

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इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, MFSTAR रडार, MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम, 76mm तोप और एंटी-सबमरीन हथियार शामिल हैं. CODOG प्रोपल्शन सिस्टम के साथ यह कई तरह के मिशन कर सकता है. 75% स्वदेशी सामग्री वाले इस पोत ने सैकड़ों MSMEs को रोजगार दिया है. पुरानी INS दूनागिरी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए नई दूनागिरी नौसेना की ताकत बढ़ाएगी. इसका नाम उत्तराखंड के पर्वत पर रखा गया है. 

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अग्रय और मालवन: एंटी-सबमरीन युद्धपोत

अग्रय GRSE, कोलकाता द्वारा बनाया गया चौथा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है. यह लगभग 77 मीटर लंबा है. वॉटरजेट प्रोपल्शन से चलता है. इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और एडवांस सोनार सिस्टम लगे हैं जो समुद्र में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं.

मालवन कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया दूसरा ASW SWC है. यह महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मालवन शहर के नाम पर रखा गया है. लगभग 80 मीटर लंबा और 1100 टन वजन वाला यह पोत भी पानी के उथले इलाकों में एंटी-सबमरीन, माइन वारफेयर और तटीय निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है. दोनों पोतों में 80% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है.

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संशोधक: सर्वेक्षण पोत

संशोधक (Yard 3028) चार बड़े सर्वेक्षण पोतों (Survey Vessels Large) में आखिरी है. इसे भी GRSE, कोलकाता में बनाया गया है. 30 मार्च 2026 को डिलीवर किया गया यह 110 मीटर लंबा और 3400 टन वजन वाला पोत हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्र की गहराई मापने, नेविगेशन चैनल तय करने और महासागरीय डेटा इकट्ठा करने का काम करेगा. इसमें ऑटोनॉमस अंडर वॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), एडवांस्ड सोनार और DGPS जैसी उपकरण लगे हैं. यह पोत 18 नॉट से ज्यादा की रफ्तार पकड़ सकता है.

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ये चारों स्वदेशी पोत भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूती देंगे. खासकर चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच पनडुब्बी रक्षा, तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और बहुमुखी युद्ध क्षमता बढ़ेगी. इनके शामिल होने से नौसेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि होगी और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी. भारतीय नौसेना अब इन पोतों के कमीशनिंग की तारीखों का इंतजार कर रही है.  

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