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पाकिस्तान सीमा पर नए हथियार तैनात, ड्रोन से छूटेगी मिसाइल

भारतीय सेना ने पश्चिमी मोर्चे पर दो स्वदेशी हथियार तैनात किए हैं - ULPGM लॉइटरिंग मुनिशन और AGNIKAA VTOL-1 FPV कामिकाजे ड्रोन. DRDO और Adani द्वारा विकसित ये सिस्टम हाई एल्टीट्यूड, EW में सटीक हमला करने में सक्षम हैं.

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ये है ULPGM सिस्टम यानी इस ड्रोन से छोटी मिसाइलें छोड़ी जा सकती हैं. (Photo: X/Rajnath Singh)
ये है ULPGM सिस्टम यानी इस ड्रोन से छोटी मिसाइलें छोड़ी जा सकती हैं. (Photo: X/Rajnath Singh)

भारतीय सेना ने पश्चिमी मोर्चे पर अपनी हमले की क्षमता को और मजबूत कर लिया है. अब सेना के पास दो स्वदेशी हथियार सिस्टम तैनात हो गए हैं - ULPGM (UAV-Launched Precision Guided Munition) और AGNIKAA VTOL-1 FPV Kamikaze Drone. ये दोनों सिस्टम पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित किए गए हैं. इन्हें इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (EP-6) के तहत पश्चिमी कमांड को सौंपा गया है.

हैदराबाद में भारतीय सेना की पश्चिमी कमांड के अधिकारियों की मौजूदगी में इन दोनों हथियारों को आधिकारिक रूप से सौंपा गया. इससे पहले इनकी हाई एल्टीट्यूड, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) और सटीक हमले की परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए थे. ये दोनों सिस्टम भारतीय सेना को दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और घातक हमला करने की नई क्षमता देंगे.

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ULPGM: भारत का पहला स्वदेशी लॉइटरिंग मुनिशन

ULPGM भारत का पहला स्वदेशी लॉइटरिंग मुनिशन है, जिसे DRDO और Adani Defence & Aerospace ने मिलकर विकसित किया है. यह एक UAV (ड्रोन) से लॉन्च किया जाने वाला प्रेसिशन गाइडेड मुनिशन है. इसमें Imaging Infrared (IIR) सीकर लगा है, जो दिन-रात और हर मौसम में काम करता है. 

यह रुके हुए और चलते-फिरते टारगेट्स को निशाना बना सकता है. ULPGM की कुल ऑपरेशनल रेंज 20 किलोमीटर तक है, जबकि मुनिशन का स्ट्राइक रेंज 2.5 किलोमीटर है. यह सिस्टम दुश्मन के बंकर, वाहन या महत्वपूर्ण ठिकानों को सटीकता से नष्ट करने में बेहद कारगर साबित होगा.

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AGNIKAA VTOL-1: FPV कामिकाज़े ड्रोन

AGNIKAA VTOL-1 एक First Person View (FPV) कामिकाजे ड्रोन है. यह खासतौर पर शहरी युद्ध, संकरी जगहों और खुले मैदान में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए बनाया गया है. 

इसकी खासियत है Vertical Take-Off and Landing (VTOL) क्षमता, यानी इसे उड़ाने या उतारने के लिए रनवे की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी उड़ान क्षमता 30 मिनट है, अधिकतम गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा और रेंज 5 किलोमीटर तक है. 

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यह ड्रोन ऊंचे इलाकों, GPS-ब्लॉक (GPS-denied) क्षेत्रों और इलेक्ट्रॉनिक जाम (EW) वाले माहौल में भी काम कर सकता है. इसमें तीन-स्तरीय ट्रिगर मैकेनिज्म और चार-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लगी है. यह मानव लक्ष्यों और हल्के वाहनों के खिलाफ 5 मीटर के घातक दायरे में विस्फोट कर सकता है.

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये दोनों सिस्टम?

ये दोनों स्वदेशी हथियार पश्चिमी मोर्चे (पाकिस्तान बॉर्डर) पर भारतीय सेना की स्ट्राइक क्षमता को बहुत बढ़ा देंगे. ULPGM लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता देता है, जबकि AGNIKAA VTOL-1 करीबी मुकाबले और खास मिशनों के लिए बेहद उपयोगी है. 

दोनों सिस्टम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम हैं. इनके जरिए भारतीय सेना अब विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम कर सकेगी. अपनी जरूरत के अनुसार हथियारों को और बेहतर बना सकेगी.

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सेना इन दोनों सिस्टमों को और आगे बढ़ाने की योजना बना रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ULPGM और AGNIKAA जैसे स्वदेशी ड्रोन और मुनिशन भविष्य के युद्ध में भारतीय सेना को बढ़त दिलाएंगे. ये सिस्टम दुश्मन की एयर डिफेंस को चकमा देने, महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने और सैनिकों के जीवन की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

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