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सीमा पर पिनाका की सातवीं रेजिमेंट तैनात, PAK-चीन रहेंगे अपनी हद में...

भारतीय सेना ने पिनाका रॉकेट लॉन्चर का सातवां रेजिमेंट ऑपरेशनल कर दिया है. अब कुल 7 रेजिमेंट सीमा पर तैनात हैं. गलवान के बाद सेना ने अपनी फायर पावर तेजी से बढ़ाई है. पिनाका 90 किमी तक सटीक हमला कर सकता है. आठवां रेजिमेंट इस साल और दो अगले साल शामिल होने वाले हैं. सेना का टारगेट 22 पिनाका रेजिमेंट तैनात करना है.

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पिनाका रॉकेट सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी थीं. (File Photo: DRDO)
पिनाका रॉकेट सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी थीं. (File Photo: DRDO)

भारतीय सेना ने अपने फायर पावर को और मजबूत करने के लिए पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) का सातवां रेजिमेंट तैनात कर दिया है. अब भारतीय सेना के पास कुल सात पिनाका रेजिमेंट हो गए हैं. रक्षा सूत्रों के अनुसार आठवां रेजिमेंट भी इस साल के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा.

अगले साल दो और रेजिमेंट शामिल होने की संभावना है, जिसके बाद कुल संख्या 10 हो जाएगी. सेना का लक्ष्य 22 पिनाका रेजिमेंट तैनात करना है. इस सिस्टम ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हालत खराब कर दी थी. 

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पिनाका क्या है और क्यों इतना खास?

पिनाका को DRDO ने विकसित किया है. यह भारत का अपना मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है. इसका मुख्य काम दुश्मन के ठिकानों पर बहुत कम समय में भारी मात्रा में रॉकेट दागना है. पुरानी पीढ़ी के पिनाका की रेंज 40 किलोमीटर थी, लेकिन नई गाइडेड पिनाका और लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट 90 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगा सकते हैं. एक सैल्वो में यह 12 रॉकेट मात्र 44 सेकंड में दाग सकता है.

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पिनाका रेजिमेंट्स को भारत-पाकिस्तान सीमा और LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) दोनों जगहों पर तैनात किया गया है. गलवान संघर्ष (2020) के बाद सेना ने अपनी आर्टिलरी क्षमता बढ़ाने पर खास ध्यान दिया. इसी क्रम में Rs 2580 करोड़ के अनुबंध के तहत भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, अब टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टुब्रो को छह रेजिमेंट बनाने का ऑर्डर दिया गया था. अब सातवां रेजिमेंट भी सीमा पर तैनात हो गया है.

Pinaka Seventh Regiment Deployed

पिनाका की खासियतें  

  • यह सभी मौसम में काम कर सकता है.  
  • बहुत कम समय में भारी मात्रा में आग बरसा सकता है.  
  • गाइडेड वर्जन में सटीक निशाना लगाने की क्षमता है.  
  • लॉन्चर चार हाइड्रॉलिक आउट्रिगर्स पर टिका होता है, जो फायरिंग के समय बैलेंस देते हैं.  
  • प्रत्येक पॉड में 6 लॉन्चर ट्यूब होते हैं, यानी एक साथ 12 रॉकेट दागे जा सकते हैं.

सेना का लक्ष्य है कि भविष्य में पिनाका की और एडवांस और लंबी रेंज वाली पीढ़ियां शामिल की जाएं. इससे भारतीय सेना की डीप स्ट्राइक कैपेबिलिटी काफी बढ़ जाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि पिनाका अब भारतीय आर्टिलरी का बैकबोन बन चुका है. 

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